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रंगोली

रंगोली लोककला  'रंगोली' महाराष्ट्र की लोक कला है। ‘रंगोली’ दो प्रकार से बनाई जाती है – (सूखी और गीली ) 'रंगोली' के लिए उपयुक्त धरातल भूमि है। पारंपरिक रंगोली बनाने में गेरू, सफेद खड़िया, चावल, सिंदूर, हल्दी, सूखा आटा प्रयाग किया जाता है। महाराष्ट्र के नागपुर की रहने वाली 'वंदना जोशी' को रंगोली लोक कला को बनाने में महारथ हासिल है। पानी के ऊपर रंगोली बनाने वाली विश्व की पहली महिला विश्व महिला वंदना जोशी हैं, जिन्होंने 7 फरवरी 2004 को दुनिया की सबसे बड़ी रंगोली बनाकर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड' में अपना नाम दर्ज करवाया। पानी पर रंगोली बनाने वाले दूसरे कलाकार राजकुमार चंदन है। 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड' तक रंगोली पहुँचाने वाली पहली महिला विजय लक्ष्मी मोहन, जिन्होंने सिंगापुर में 3 अगस्त 2003 को वह रिकार्ड बनाया

सौंदर्य क्या है

सौंदर्य किसे कहते हैं इस विषय पर भी क लावादियों और उपयोगिता वादियों में गहरा मतभेद रहा। पुरातन आदर्शवादियों के लिए यह 'परम तत्व तक ले जाने का मार्ग' या 'सृष्टि में एक सुचालित व्यवस्था' है । उधर कलावादी हरबर्ट के अनुसार, "सौन्दर्य क्या है, कुछ नहीं, केवल जो वह है- सौन्दर्य"! सौन्दर्यानुभूति में सम्बन्धों की पूरी समझ आ जाती है और सौन्दर्यबोध का सही निर्णय संभव होता है।  अब कला में कई धाराएं प्रवेश कर गईं, इसमें सौन्दर्य--योग्यं गुणों पर अधिक बल दिया जाने लगा, और इस प्रकार कला-वस्तु चीर-फाड़ कर बारीक निरीक्षण के योग्य बन गई। यह बौद्धिक विलास का साधन बन कर, कलाकार के स्टूडियो से अध्ययन-कक्ष या प्रयोगशाला में पहुँच गई। इस रूपाकार सिद्धान्त के अनुयायियों ने सौन्दर्यबोध में एन्द्रियक तत्व और अर्थ दोनों का अनदेखा किया। कला-वस्तु का विश्लेषण करके कला के उच्चतम नियम “कला-वस्तु एक आविभाज्य इकाई है" को भी नहीं माना। 19वीं शताब्दी का अन्तिम काल कट्टर विज्ञान का युग था। यहां वैज्ञानिक चीर-फाड़ का ही बोलबाला था। तभी इस युग के लिए कहा गया- “मन के बिना मनोविज्ञान” “सौन्दर...

कला का अर्थ एवं परिभाषा

कला की परिभाषा (Definition of Art ) अंतः करण में चल रहे विचारों का प्रगट रूप ही कला है समय-समय पर विद्वानों ने इस को परिभाषित करने के अलग अलग प्रयास किए हैं परंतु अभी तक कोई सर्वमान्य परिभाषा निश्चित नहीं हो पाई है फिर भी सारे विद्वान कला में कौशल को मानते हैं इसीलिए कहते हैं जहां जो कार्य कौशल पूर्वक किया जाए वह कला है बहुत से विद्वानों की कला के विषय में अलग-अलग धारणा है है जो इस प्रकार है पाश्चात्य विद्वानों की कला परिभाषा प्लेटो (Plato, 427 - 347 ई.पू.) – कला सत्य की अनुकृति की अनुकृति है। अरस्तू (Aristotle, 384 322 ई.पू.) – कला अनुकरण है। गेटे (Goethe, 1749 - 1832 ई.) – महान सत्य की प्रतिकृति प्रस्तुत करना ही कला की सबसे बड़ी समस्या है। कला प्रकृति की बौद्धिक परख है। क्रोचे (Croce, 1866-1952 ई.) कला प्रभावों की अभिव्यक्ति है। हीगेल (Hegel, 1770-1831 ई.) –कला अधिभौतिक सत्ता को व्यक्त करने का माध्यम है। टालस्टाय (Tolstoy, 18281910 ई.)–कला भावों का सम्प्रेषण है। रस्किन (John Ruskin, 18191900 ई.)–कला आह्लाद की अभिव्यक्ति है। शेली (Shelly, 1792 - 1822)–कला कल्पना की अभिव्यक्ति है। प्लाट...

पेस्टल रंग माध्यम एवं तकनीक

पेस्टल कलर माध्यम और तकनीक पेस्टल (Pastal Colour)  पेस्टल आज सर्वसाधारण में प्रचलित माध्यम है। यह सर्वशुद्ध और साधारण चित्रण माध्यम है। प्रायः बच्चों को इस विधि से चित्रण का अभ्यास कराया जाता है। किन्तु सिद्धहस्त चित्रकार भी इसका प्रयोग करते हैं। चित्र रचना करते समय रंगों में किसी प्रकार का द्रव माध्यम मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है। अतः इसे शुष्क माध्यम की श्रेणी में रखते हैं। रंगों के मिश्रण में विविधता की दृष्टि से इसमें सीमित बल ही उत्पन्न हो पाते हैं। रंग का प्रायः कागज पर से झड़ने का ख़तरा बना रहता है इसलिए फिक्सेटिव का प्रयोग करते हैं। जो स्प्रे करके पेस्टल द्वारा रचित कृति पर लगाते हैं, पेस्टल का दोष यही है कि इसका रख-रखाव बहुत कठिन है। रंगत की सीमित तान कल्पना और स्वतंत्रता को भी सीमित कर देती है। यदि श्रेष्ठ कागज और पूर्ण स्थायी रंगतों का प्रयोग करें तो यह चित्रण का सर्वाधिक स्थायी माध्यम है। चित्रभूमि (Surface)— पेस्टल के लिए खुरदुरेपन की विभिन्न श्रेणियों में तैयार कागज बाज़ार में उपलब्ध हैं। इस कागज के रोयें (Grains) इस प्रकार के होने चाहिए जो पेस्टल की बत्ती (Pastol C...

rangon ke prakar

चित्रकला में माध्यम  जल रंग (Water Color) :-  जल रंग चित्रकला का सबसे प्रचलित माध्यम है। यह रंग मुख्यतः पारदर्शी होता है तथा इसका प्रयोग खुरदुरा एवं मोटे कागज पर किया जाता है । साथ ही इसका मुख्य माध्यम जल होता है। जल रंग का प्रयोग चित्र में लाइट टू डॉर्क किया जाता है तथा चित्र में हाई-लाइट के लिए पेपर को सफेद छोड़ दिया जाता है। जल रंग के लिए प्रयोग में लाये जाने वाला कागज है - फैब्रियानो, सांडर्स, कॉट्रीज, हैंडमेड तथा व्हाट्स मैन पेपर आदि । इसमें पेंटिंग के लिए सेबल हेयर ब्रश सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि ब्रश के जो बाल होता ओ बहुत ही सॉफ्ट होता है, जिससे रंग मिश्रण करने में आसानी होती है। इसमें राउंड एवं नकीला ब्रश का प्रयोग किया जाता है, जिससे की डिटेल्स वर्क करने में आसानी होती है। जल रंग से दृश्य चित्रण एवं आउट डोर कार्य करने के लिए सबसे अच्छा माध्यम है, क्योंकि इसमें सिमित समय में कार्य पूरा करना होता है। पोस्टर रंग (Poster color) : पोस्टर पेंट एक डिस्टेंपर पेंट है जो आमतौर पर एक प्रकार से गोंद-पानी या गोंद को उसके बाइंडर के रूप में उपयोग करता है। यह सामान्य रूप से ए...

medium and technique in art

चित्रकला में माध्यम एवं तकनीक चित्रकला में माध्यम का प्रयोग :  चित्रकला में विषय एवं तकनीक के साथ साथ माध्यम की भी मुख्य भूमिका होती है, इनके अनुपस्थिति में चित्र का मूर्त रूप संभव नहीं है। समय के साथ-साथ चित्रों के माध्यम एवं तकनिकों में परिवर्तन हुआ। अगर हम प्रागैतिहासिक काल के चित्रों से लेकर वर्तमान समय के चित्रों में माध्यम के प्रयोग को देखें तो इसमें बहुत ही परिवर्तन हुआ। जहाँ गुफा चित्रण में आदि मानव गेरु रंग, खड़िया एवं कोयला के प्रयोग से चित्रण करते थे, तो अजंता, बाघ, जोगीमारा, तथा सितलबासल आदि गुफा के भित्तिचित्रण में टेम्परा का प्रयोग हुआ। इसके बाद तैल रंग , जल रंग तथा ऐक्रेलिक रंग का प्रयोग वृहद पैमाने पे शुरू हुआ। चित्रकला में माध्यम का प्रयोग निम्नलिखित है :  १. पेंसिल २ रबड़ ३. जल रंग ४. पोस्टर रंग ५. तैल रंग ६. एक्रेलिक रंग ७. टेम्परा ८. फ्रेस्को ९. कोलाज १०. मोजैक ११. स्याही १२. डिजिटल पेंटिंग आदि । १. पेंसिल (Pencil):-  किसी भी माध्यम में चित्र बनाने से पहले चित्रपट पर पेंसिल से रेखांकन या ड्राइंग करना अतिआवश्यक है चित्र में रेखांकन के लिए पेंसिल के अलावे...

khilaune banana

भारत में खिलौने बनाना  ऐसे कलात्मक कार्य को कहते है जो उपयोगी होने के साथ साथ घर सजाने के काम में आता है जिसे मुख्यत हाथ से या सुलभ औजारों की सहायता से बनाया जाता है ऐसी कलाओं का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व होता है हस्तशिल्प किसी भी देश की अभिव्यक्ति होने के साथ साथ उस देश की संस्कृति परम्परा और विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। भारत की भव्य सांस्कृतिक विरासत और सदियों से क्रमिक रूप से विकास कर रही इस परंपस की झलक देश की हस्तशिल्प वस्तुओं में दिखाई पड़ती है हस्तकला अलग-अवन माध्यम एव अलग-अलग क्षेत्र होने के बाद भी इसके विषयवस्तु परंपरा पर आधारित होती है। हस्त शिल्प निम्न प्राकर के होते है   बांस हस्तशिल्प जूट हस्तशिल्प धातु हस्तशिल्प काष्ट हस्तशिल्प मिट्टी हस्तशिल्प  खिलौने बच्चे और खिलौने का संबंध जन्म से ही रहा है हम यह भी कह सकते हैं की खिलौनों के बिना हम बच्चों की दुनियां कल्पना भी नहीं कर सकते हैं  बच्चों को  खिलोनें विशेष रूप से आकति एवं मोहित करता है खिलौने में बच्चों के भावात्मक और शारीरिक विकास में सहायक होते है सरल एवं परंपरागत खिलौनों के द्वारा बच्च...

handi craft

 हस्त निर्मित कलाएं हस्तकला की परिभाषा “हस्त निर्मित सभी कलात्मक वस्तुएं जो रचनात्मक हो, जिसमे मशीन का प्रयोग ना हो हस्तकला कहलाती है।" हस्तकला का परिचय हस्तकलाओं का जन्म एवं विकास मूलतः मनुष्य की आवश्यकताओं से संबंधित है। शुरुआत में यह अप्रशिक्षित ग्रामीण लोगों के रचनात्मकता का उदाहरण था । मनुष्य अपनी आवश्यकता के वशीभूत होकर अपनी दैनिक उपयोग की वस्तुओं को खाली समय में निर्माण करता रहा। बाद में यह वंशानुगत हो गया। ऐसा समाज का वर्ग जो हस्तकला से संबंधित है और निर्भर भी संस्कृति मंत्रालय ने ऐसे वर्गों को बढ़ावा देने के लिए इसे "कला" के अंतर्गत रखा और देश के विभिन्न हिस्सों में शिल्पमेले या क्राफ्टमेले का आयोजन करता है। जिससे कि हस्तकला से जुड़े कलाकारों का सामाजिक और आर्थिक पक्ष मजबूत हो सके ऐसे लोगों को अपनी पहचान और सम्मान भी मिल सके। हस्तकलाओं के अंतर्गत दो प्रकार की वस्तुओं का निर्माण हुआ है एक दैनिक जीवन में उपयोग की दूसरी स्वतः सुखाय, सजावटी वस्तुएं यदि हम हस्तकला को श्रृंखलावद्ध अपने अतीत से जोड़े तो पाएंगे कि प्रागैतिहास काल का मनुष्य अपने हाथों द्वारा ज...

important term of art 1

Gouache :  चित्रण का एक विधान जिसमें गोंद मिश्रित अपारदर्शक रंगों उपयोग होता है। इसमें प्रयोग विशेषता  Graphic   ग्राफिक अनेक तकनीक जिसके द्वारा सतह कोई आकृति बनाकर उसे सतह छाप लेते हैं। इस तकनीकों में लियोग्राफी, एचिंग, वुडकट, एन्थेविंग इत्यादि सम्मिलित मूलतः ड्राइंग तथा पेन्टिंग भी जाती परन्तु आजकल यह स्वतन्त्र कला मानी जाती है। Tone Tone और मिडिल टोन किसी भी रंगत का बल जो काले सफेद मध्य बल अनुरूप हो  Hatching हैचिंग बल अथवा छाया प्रभाव उत्पन्न करने का वह ढंग जिसमें पास-पास रेखायें खींचकर ऐसा प्रभाव किया जाता है। यदि ये रेखायें एक-दूसरे काटते खींची जायें तो Cross hatching जाता Horizon Line हारिजन लाइन दृष्टि तल अथवा क्षितिज रेखा Impasto: इम्पेस्टो भारी अथवा मोटे-मोटे रंगों का प्रयोग (तैल रंगों अथवा टेम्परा में)।  Linoxyn   वायु सूख जाने पर अलसी तेल की चमड़ी जैसी झिल्ली Local Colour   सिद्धांततः किसी वस्तु का अपना रंग जो बातावरण, प्रकाश तथा समीपस्थ अन्य रंगों प्रभावित हो। परन्तु सम्भव नहीं Mankin : मेकिन चित्रकार की सहायतार्थ मानवदेह का नमूना Mass चित...

important term of art

कला से सबंधित महत्वपूर्ण परिभाषाएं  Academic Style of Painting : एकैडमिक स्टाइटल प्राफ पेन्टिंग स्थापित परम्परा के अनुसार अथवा मान्य सिद्धान्तों के अनुसार चित्रण करना। इसमें मौलिकता का कोई स्थान नहीं होता । Action Painting : एक्सन पेन्टिंग अमेरिकन चित्रकार जंक्सन पोलक द्वारा प्रतिपादित वह चित्रण शैली जिसमें रंगों का पूर्णतया वस्तु-आकृति विहीन (Abstract) प्रभाव उत्पन्न होता है। इसका विधान सपाट चित्र भूमि पर रंग छिड़कने, फेंकने अथवा टपकाने की तीव्र प्रक्रिया है, जिसके प्रभाव आकस्मिक होते हैं और उन्हें अन्ततः इच्छित संयोजन का रूप दे दिया जाता है। Alla Prima : अल्ला प्राइमा सीधे चित्रण - एक बार के रंग प्रयोग द्वारा चित्र को पूर्ण करना। यह विधि उस विधि के विपरीत है जिसमें रंग की कई सतह लगाकर चित्र पूर्ण किया जाता है है Advancing Colours : अग्रगामी रंगत-पुष्ट अमिश्रित रंग जो चित्र भूमि से आगे बढ़ते अनुभव हों। गर्म रंग (जैसे लाल) आगे बढ़ते तथा ठण्डे (जैसा नीला) पीछे हटते प्रतीत होते हैं। Asymmetry : अनुसम्मित – नन्दतिक अनियमितता से उत्पन्न सौन्दर्य किसी विषय-वस्तु के आकृति निरूपण में नन्...

Kala aur saundarya

कला और सौंदर्य दृश्य कला-सौदर्यानुभूति सौन्दर्य एक मानसिक अवधारण है क्योंकि वस्तुओं के रूप को विश्लेषण के द्वारा सुन्दर या कुरूप मानती है तर्क के द्वारा विभिन्न अनुभूतियों को स्पष्ट किया जाता है। बुद्धि और भावना में वही सम्बन्ध है, जो सत्य और सौन्दर्य में पाया जाता है। मानवता का प्रथम गुण विवेक और उसका तर्कपूर्ण प्रयोग है, जिससे यह सौन्दर्य को समझता है। जो वस्तु प्रिय होती है वह सुन्दर भी लगती है यहीं से कला प्रारम्भ होती है। कला में तीन तत्व प्रमुख रूप से विद्यमान रहते हैं रूप, भोग एवं अभिव्यक्ति रूप आन्तरिक और बाहय दो प्रकार का होता है कला में चाहे रूप की प्रधानता होती है। कला का अन्तिम ध्येय सौन्दयनुिभूति है जिसे प्रत्येक श्रोता या दर्शक आनन्द की प्रप्ति के समय अनुभव करता है। सौन्दयनुिभूति का तात्पर्य सौन्दर्य के भाव को नष्ट करना ही पाप है और सौन्दर्य को बनाये रखना ही पुण्य है। सौन्दर्य प्राप्ति के आवश्यक तत्व 1- सत्य की खोज। 2- कला कल्याणकारी हो। 3- कला सौन्दर्य है, जिसकी अनुभूति सौन्दर्य के ज्ञान पर आधारित है।  दृश्य कला-सौदर्यानुभूति सौन्दर्यशास्त्र ऐस्थेटिक शब्द युनानी भाषा ...

kala ka samany parichay

कला कला मानव की सहज अभिव्यक्ति है । कला हमारे विचारों का एक दृश्य रूप है। है हमारी कल्पना शक्ति, सृजन शक्ति से युक्त है। यह सृजनशक्ति व्यक्ति में अपनी विशेष मनोभावनायें संवेदनायें विचार पद्धति होने के कारण होती है। कला के माध्यम से नई-नई सम्भावनायें जन्म लेती है, सभ्यता एवं संस्कृति का कास होता है। और कला का नया रूप समाने आता है तथा नये मापदण्ड थापित होते हैं। गैतिहासिक काल से लेकर वर्तमान में प्रयोगधर्मी कला तक का सफर मानव अपने अनुभवों और भावों को व्यक्त करते हुए पूर्ण किया है । मानव ने अपनी दिनचर्या में कला की तमाम विधाओं के माध्यम से अपनी उन्नति स्पष्टता से दिखाई देती  है। आज मानव कला के विभिन्न रूपों को अपनाते हुए, सौन्दर्य और भावों को व्यक्त करने में सहज है इन सम्भावनाओं को देखते हुए भविष्य में कलाओं के माध्यम से सौन्दर्य के उच्च स्तरों को हम प्राप्त कर सकते हैं। ललित कलाओं को पाँच भागों में बाँटा जा सकता है-  चित्रकला,  मूर्तिकला,  स्थापत्य कला ,  संगीत एवं  काव्य।  जहाँ हम चित्रकला में द्विआयामी प्रभाव में अपने भावों को व्यक्त करते है वही मूर्...

proportion in Indian painting

 भारतीय चित्रकला में प्रमाण    प्रमाण का महत्व         एक सफल कलाकार के लिए प्रमाण का ज्ञान होना अत्यधिक आवश्यक है बिना इसके सार्थक चित्र का निर्माण करना संभव प्रतीत नहीं होता इसके द्वारा कलाकार चित्रभूमि को इस प्रकार से विभाजित करता है कि वह देखने में रुचिकर प्रतीत हो तथा नीरसता को दूर किया जा सके परिभाषा         प्रमाण को संबद्धता का सिद्धांत भी कहा जाता है आकृतियों का अपना प्रमाण तथा सभी आकृतियों का एक दूसरे से संबंध और सभी आकृतियों तान तथा वर्ण इत्यादि का चित्र भूमि से संबंध निश्चित करता है      प्रमाण का कोई निश्चित सिद्धांत नहीं बनाया जा सकता फिर भी ऐसी सीमाएं जानी जा सकती हैं जिनका अतिक्रमण करने पर अरुचिकर प्रमाण की उत्पत्ति होती है अतः प्रमाण का सर्वप्रथम दायित्व चित्र में रुचि उत्पन्न करना है कुछ लोगों में स्वतः ही अच्छे प्रमाण के प्रति रुचि होती है परंतु कुछ लोगों को अच्छे प्रमाण का ज्ञान प्राप्त करना होता है इसीलिए प्रारंभ में एक आधार की आवश्यकता होती है शेष अनुभव से प्राप्त हो जाता है यूक्लिड गोल्डन...

chitrakala me phythm

Chitrakala me pravah ka mahatva कलाकार के लिए प्रवाह की आवश्यकता क्यों है       एक कलाकार के लिए प्रवाह का उचित का ज्ञान होना अत्यधिक आवश्यक है बिना इसके कलाकृति में सौंदर्य के भाव को जगाया नहीं जा सकता है रिदम या प्रवाह उसी प्रकार से एक कलाकार के लिए महत्वपूर्ण है जिस प्रकार से शरीर में आत्मा का यह कलाकृति में प्राणों का संचार करती है और उसे सौंदर्य युक्त बनाती है संसार के लगभग सभी ललित कलाओं में प्रवाह या लय विद्यमान हैं अजंता, एलोरा, बाघ, एलिफेंटा, खजुराहो आदि स्थलों की चित्र एवं मूर्तियों में यह तत्व मुख्य रूप से विद्यमान है यहां तक इनकी प्रसिद्धि के पीछे यह यही तत्व मुख्य भूमिका निभाता है  rhythm प्रवाह की परिभाषा     प्रवाह का अर्थ चित्र भूमि पर दृष्टि का स्वतंत्र अबाध एवम् मधुर विचरण होता है  प्रवाह व्युक्त चित्र में नेत्र को उलझाना अथवा कष्टदायक विरोधाभास का सामना नहीं करना पड़ता है यह प्रवाह रेखा, रूप, वर्ण तथा तान सभी से मिलकर उत्पन्न होता है     अंतराल में कोई गति नहीं होती परंतु जैसे ही इसमें कोई बिंदु प्रगट होता है तनाव...

कला में प्रयुक्त होने वाले कुछ महत्वपूर्ण शब्द

Academic style of Painting      प्रचलित परंपरा के अनुसार बनाए गए चित्र को पारंपरिक अकादमिक शैली के चित्र कहा जाता है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं मान्य सिद्धांतों के अनुसार बनाए जाने वाले चित्र

संयोजन के सिद्धांत

संयोजन के सिद्धांत principles of composition       दो या दो से अधिक तत्वों मैं सामंजस्य स्थापित कर मधुर योजना का निर्माण करना ही संयोजन है जिसमें से एक तत्व की प्रधानता रहती है वैसे तो चित्रकला में रेखा रंग रूप तान पोत अंतराल आदि तत्व को संयोजित कर कलाकार सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करता है यह कलाकार के प्रयोग और अनुभव पर ही निर्भर करता है कि वह इन तत्वों का किस प्रकार प्रयोग करता है हो सकता है एक कलाकार में किसी तत्व की प्रधानता हो दूसरे कलाकार में किसी तत्व की प्रधानता हो कलाकार रेखा के प्रयोग से चित्रतल को कई भागों में विभक्त कर संयोजन का भावी स्वरूप देता है एक अध्ययनरत विद्यार्थी के लिए यह प्रयोग का विषय है वह जितना कला के तत्वों को चित्र फलक पर परस्पर रखकर अनुभव प्राप्त करेगा उसका संयोजन उतना ही सुखद और सरल होगा फिर भी यह विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता है कि उसका संयोजन दूसरों को सही ही लगेगा यह तो व्यक्तिगत अनुभव और सामर्थ्य की बात है      आगे बढ़ने से पहले इतना स्पष्ट करना आवश्यक है संयोजन व्यक्तिगत रूचि पर निर्भर करता है जो कलाकार की प्र...

अंतराल का अर्थ एवं परिभाषा

अंतराल space अंतराल चित्रकला का सबसे महत्वपूर्ण तत्व इसके बिना चित्र रचना संभव नहीं है अंतराल या स्पेस अथवा धरातल ही वह कार्यक्षेत्र होता है जहां पर कलाकार अपने चित्र का निर्माण करता है जो द्विआयामी होता है कलाकार इस पर विविध तत्वों तथा चित्र सामग्री की सहायता से त्रिआयामी प्रभाव उत्पन्न करता है प्राचीन भारतीय शिल्पशास्त्रों में भी अन्तराल को विभिन्न नामों से जाना गया है जैसे स मरागण सूत्रधार में भूमि बंधन , विष्णुधर्मोत्तर पुराण में स्थान, अभिलाषी चिंतामन में स्थान निरुपण आदि नामों से जाना गया है अंतराल की परिभाषा definition of space      कलाकार जिस भूमि पर चित्रण कार्य करता है वह अंतराल का लाती है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि वह स्थान जो चित्र निर्माण के रूप में प्रयोग में लाया जाता है वह अंतराल कहलाता है जैसे कागज लकड़ी दीवाल आदि। अंतराल का महत्व importance on space     अंतराल वह स्थान है जिस पर कलाकार अपनी कल्पना को मूर्त रूप प्रदान करता है इसके अभाव में वह चित्र को नहीं गढ़ सकता एक कलाकार के लिए अंतराल के महत्व को जानना और समझना दोनों ही महत्वपूर्ण...

Meaning of texture and definition

पोत का अर्थ Meaning of texture                पोत का अर्थ धरातल की बनावट से होता है इस संसार में बहुत सी वस्तुएं पाई जाती है जिनकी सतह का निर्माण भिन्न भिन्न प्रकार का होता है तथा देखने में भी पृथक प्रकार का सुखद अनुभव होता है प्रकृति के साथ-साथ मानव निर्मित विभिन्न प्रकार की वस्तुओं में भी बहुत अलग अलग निर्मित होता है जैसे पत्थर लकड़ी फूल फल आदि पोत की परिभाषा definition of texture            किसी वस्तु की सतह या धरातल के गुण को ही पोत कहते हैं दूसरे शब्दों में सतह के गुण को ही पोत कहते हैं पाल क्ली पोत पर अपने विचार रखते हुए कहा हर पदार्थ के अपने गुण होते हैं अब जैसे पत्थर है वह कठोर है सो वह नर्म मांस जैसा नहीं दिखाया जाना चाहिए हर विचार के लिए उसके अनुकूल एक पदार्थजन्य आकार होता है कलाकार जिस धरातल का प्रयोग करता है उस धरातल का भी अपना एक स्वभाव होता है वह अपनी रुचि के अनुसार तथा विषय के अनुसार चयन करता है जैसे हल्का खुरदुरा खुरदुरा दानेदार अन्य कई प्रकार के धरातल कलाकार प्रयोग में लाता है कलाकार च...