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नवंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

chitrakala me phythm

Chitrakala me pravah ka mahatva कलाकार के लिए प्रवाह की आवश्यकता क्यों है       एक कलाकार के लिए प्रवाह का उचित का ज्ञान होना अत्यधिक आवश्यक है बिना इसके कलाकृति में सौंदर्य के भाव को जगाया नहीं जा सकता है रिदम या प्रवाह उसी प्रकार से एक कलाकार के लिए महत्वपूर्ण है जिस प्रकार से शरीर में आत्मा का यह कलाकृति में प्राणों का संचार करती है और उसे सौंदर्य युक्त बनाती है संसार के लगभग सभी ललित कलाओं में प्रवाह या लय विद्यमान हैं अजंता, एलोरा, बाघ, एलिफेंटा, खजुराहो आदि स्थलों की चित्र एवं मूर्तियों में यह तत्व मुख्य रूप से विद्यमान है यहां तक इनकी प्रसिद्धि के पीछे यह यही तत्व मुख्य भूमिका निभाता है  rhythm प्रवाह की परिभाषा     प्रवाह का अर्थ चित्र भूमि पर दृष्टि का स्वतंत्र अबाध एवम् मधुर विचरण होता है  प्रवाह व्युक्त चित्र में नेत्र को उलझाना अथवा कष्टदायक विरोधाभास का सामना नहीं करना पड़ता है यह प्रवाह रेखा, रूप, वर्ण तथा तान सभी से मिलकर उत्पन्न होता है     अंतराल में कोई गति नहीं होती परंतु जैसे ही इसमें कोई बिंदु प्रगट होता है तनाव...

Artist

 यूनानी चित्रकला का अविष्कार कर्ता- सीमोन यूनानी चित्रकला का वास्तविक जन्मदाता- पाली गनोतास सर्वप्रथम रंगों के द्वारा छाया प्रकाश दिखाया- आपोलोडोरस अंधकार वाले भाग में मिट्टी का प्रयोग किसने किया किदियास  दिखावा करने वाला कलाकार ज्यूकीसास करुण दृश्यों का चितेरा कहा जाता है- एरिस्तादीज हेलेनिस्टिक युग का रेफेल कहा जाता है एपेलीज इटली की चित्रकला का पिता (father of Italian painting)- सिमाबु  सिएना की चित्रकला का पिता (father of Siena painting)- डुविच्चिओ इटली में शुरू हुई पुनरुत्थान शैली के लक्षण दिखाई दिए- ज्योतो सर्वप्रथम परिप्रेक्ष्य किसने दिखाया- ज्योत्तों इटली की चित्रकला को बैजेंटाईन से मुक्ति दिलाई- ज्योत्यों फ्लोरेंस में पुनरुत्थान शैली का प्रथम चित्रकार मस्सधिओ फ्लोरेंस की वास्तुकला में पुनुर्थान का प्रारम्भ हुनेलेसकी मूर्तिकला में पुनुर्थान की शुरुवात दोनातेल्लो पैनल चित्रकार कहा जाता है सांद्रोबॉटिचेल्ली बारोक कला का पिता - माईकल एंजेलो इटली की कला का वयोवृद्ध आचार्य तिथियां कोमलताम भावनाओ का चित्रकार कोरज्जियो तैल चित्रण का जनक या अलसी के तेल का प्रयोग जान वान अ...

aifacs

अखिल भारतीय ललित कला और शिल्प सोसायटी All India fine art and craft society             1928 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने लंदन में इंडिया हाउस बनाने का फैसला किया। भारत के प्रमुख कलाकार AIFACS के बैनर तले एक साथ आए और ब्रिटिश सरकार के साथइण्डियन हाउस को सजाने का काम उठाया। यह वह समय था कि ब्रिटिश सरकार ने इंडिया हाउस की सजावट लिए कलाकारों का चयन करने के लिए ब्रिटिश सरकार के सक्षम अपनी पहली अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी लंदन भेजी। प्रदर्शनी के चार कलाकारों धीरेंद्र कृष्ण, देब बर्मन, रनाडा उकिल, ललित मोहन सेन, सुधांग्शु चौधरी को चुना गया था और उनके द्वारा निष्पादित कार्य अभी भी इंडिया हाउस, लंदन को सुशोभित करते हैं। aifacs स्थापना वर्ष 1928 स्थान दिल्ली क्षेत्रीय शाखा पंचकुला हरियाणा Website https://www.aifacs.org.in        1928 में लंदन भेजी गई प्रदर्शनी को यूरोपीय देशों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और इसे विभिन्न यूरोपीय देशों में प्रसारित किया गया और 1932 में वापस लौटा। तब से सोसायटी नियमित रूप से अपनी अखिल भारतीय वार्षिक कला प्रदर्श...

Kala Sansthan aur Kala Kendra

              कला  संगठन और केन्द्र        आधुनिक समय में पुरातन परंपराएं टूट रही थी नई परंपराएं जन्म ले रही थी कलाकार भी इसी उहापोह से गुजर रहा था उसके सामने बंगाल शैली की थोथी अनुकृत को तोड़ने का प्रयास कर रहा था तो वहीं अपनी कला में पश्चिम का दबाव भी अनुभव कर रहा था ऐसे में कुछ कलाकारों ने मिलकर ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया जहां पर वह स्वतंत्र रूप से अपने विचारों का आदान प्रदान कर सके तथा चित्रों का प्रदर्शन भी आयोजित कर सकें          आधुनिकता की अंधी दौड़ में कहीं पर भारतीय पुरातन मान्यताएं दम तोड़ने लगी थी उनका स्थान नवीन मान्यताएं ले रही थी पर कलाकार इन पुरातन मान्यताओं को यूं ही मरते हुए नहीं देखना चाहते थे और ना ही पश्चिम की अनुकृति कर ही जीना चाहते थे वह तो बस अपने आसपास के जीवन के अनुभव को अपने चित्रों में व्यक्त करना चाहते थे स्वतंत्र होकर अपना सृजन करना चाहते थे जिस पर किसी प्रकार का कोई दबाव ना हो वह अपना हो निजी हो अपने देश की आत्मा का प्रतिनिधित्व करता हो Industrial Art society 1854 ...

jogen Chaudhary

Kalakar jogen Chaudhari मेरे ये चित्र वह सब चीजें दिखाते हैं जो मैं पसंद करता हूं जिन चीजों को मैं प्यार करता हूं और जिन से मैं नफरत करता हूं मैंने इन चित्रों को जिस शैली और रूपाकारों में पेंट किया है वह इस देश के लोगों और यहां के जीवन के एक खास तरह के स्वभाव और स्थिति में ही जन्म ले सकते थे जोगेंद्र चौधरी        tiger in moon light     जोगेन चौधरी का जन्म 15 फरवरी 1939 ईस्वी को फरीदापुर वर्तमान बांग्लादेश में हुआ था देश के विभाजन के बाद पश्चिम बंगाल में आकर रहने लगे इनका आरंभिक जीवन बड़े कष्ट में व्यतीत हुआ आरंभिक दिनों में कई दिनों तक भूखे पेट रहकर ही स्कूल जाना पड़ता था अपने बचपन में खुले प्रवेश में रहे प्रकृति से को निकटता के साथ देखा नदी तालाब मछलियां और विभिन्न प्रकार के रोजमर्रा से जुड़े हुए विषय इन के अंतः करण में समा गए जो इनके विषयों में लगातार उभरते रहे  जन्म              15 फरवरी 1939  शिक्षा             बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट अध्यापन प्रसिद्ध      ...

art College Lucknow

                उत्तर प्रदेश की आधुनिक और समकालीन कला के विकास में लखनऊ कला विद्यालय का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है प्रदेश में स्थापित या प्रथम कला विद्यालय था जिसकी स्थापना 1911 ईस्वी में की गई थी इस विद्यालय में वर्तमान में पूरे प्रदेश में कला की आधारशिला रखी तथा लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की कला और दिशा को निर्धारित किया यहां से निकले कलाकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाई तथा देश और प्रदेश का समान भी बढ़ाया  College of art Lucknow  के प्रथम प्रधानाचार्य नैथेनियल हर्ड थे लखनऊ कला विद्यालय को 1911 में स्कूल और डिजाइन के नाम से जान आ गया 1925 में श्री असित कुमार हालदार को यहां का प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया यह लखनऊ कॉलेज आफ आर्ट के प्रथम भारतीय प्रधानाचार्य थे इन्होंने अपने साथ बंगाल शैली या वास शैली की विधा का यहां पर श्रीगणेश किया इनके पश्चात l m sen, b sen आदि ने इस विद्यालय के प्राचार्य पद को धारण किया इनके समय में अकादमिक और वास शैली बराबर विकसित होती रही 1956 ईस्वी में सुधीर रंजन खस्तगीर के प्रधानाचार्य ब...