Chitrakala me pravah ka mahatva कलाकार के लिए प्रवाह की आवश्यकता क्यों है एक कलाकार के लिए प्रवाह का उचित का ज्ञान होना अत्यधिक आवश्यक है बिना इसके कलाकृति में सौंदर्य के भाव को जगाया नहीं जा सकता है रिदम या प्रवाह उसी प्रकार से एक कलाकार के लिए महत्वपूर्ण है जिस प्रकार से शरीर में आत्मा का यह कलाकृति में प्राणों का संचार करती है और उसे सौंदर्य युक्त बनाती है संसार के लगभग सभी ललित कलाओं में प्रवाह या लय विद्यमान हैं अजंता, एलोरा, बाघ, एलिफेंटा, खजुराहो आदि स्थलों की चित्र एवं मूर्तियों में यह तत्व मुख्य रूप से विद्यमान है यहां तक इनकी प्रसिद्धि के पीछे यह यही तत्व मुख्य भूमिका निभाता है rhythm प्रवाह की परिभाषा प्रवाह का अर्थ चित्र भूमि पर दृष्टि का स्वतंत्र अबाध एवम् मधुर विचरण होता है प्रवाह व्युक्त चित्र में नेत्र को उलझाना अथवा कष्टदायक विरोधाभास का सामना नहीं करना पड़ता है यह प्रवाह रेखा, रूप, वर्ण तथा तान सभी से मिलकर उत्पन्न होता है अंतराल में कोई गति नहीं होती परंतु जैसे ही इसमें कोई बिंदु प्रगट होता है तनाव...
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