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भारत माता पेंटिंग

भारत माता चित्र Bharat Mata Painting भारत माता कलाकृति का निर्माण कला गुरु आबींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1905 में किया गया है यह चित्र भारत को रूपक के रूप में एक देवी के प्रतिबिंब में दर्शाया गया है। भगवा वस्त्र धारी एक महिला, जिसके चार हाथ और जमीन पर खड़ी हुई है। सर के पीछे आभामंडल को दिखाया गया है तथा हाथों में माला, वस्त्र, पुस्तक, अन्न को अंकित किया गया है। जिनका प्रतीकात्मक महत्व है। यह तत्व देश की समृद्धि शाली आध्यात्मिक सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। भारत माता अपने बच्चों को अन्न, वस्त्र, ज्ञान एवं आध्यात्मिक उन्नति करने का मार्ग दिखाती हुई अंकित की गई है। यह इस शैली में भारतीय तत्वों का प्रभाव दिखाई दे रहा है यह स्वदेशी आंदोलन का प्रतिफल है। चित्र के चारों तरफ सुंदर बॉर्डर को अंकित किया गया है जो चित्र के सौंदर्य में चार चांद लगा देता है। माध्यम          जलरंग आकार     10.5x6 इंच  संग्रह         विक्टोरिया मेमोरियल हॉल, कोलकाता 

सुप्रीम कोर्ट में स्थापित मूर्तियां

Supreme Court में स्थपित मूर्तियां  देश के सर्वोच्च न्यायालय में अभी तक तीन कलाकारों के मूर्ति शिल्प स्थापित किए गए हैं। मदर इंडिया गांधी जी डॉ भीमराव अंबेडकर डॉ भीमराव अंबेडकर की मूर्ति यह मूर्ति 26 जनवरी 2023 को संविधान दिवस के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट परिसर में लगाई गई। मूर्ति स्थापित करने में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की मुख्य भूमिका है। प्रतिमा का अनावरण देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया। यह प्रतिमा 3 फीट के बेस स्टेंड पर ऊंचाई 7 फीट है जो वकील की तरह गाउन और बैंड पहने हुए बनाई गई है तथा एक हाथ में संविधान की प्रति हैं। भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमावत ने इस प्रतिमा का निर्माण किया है।  यह प्रतीमा कांसे से बनी है। मदर इंडिया की मूर्ति इस मूर्ति का निर्माण इस मूर्ति का निर्माण ब्रिटिश मूल के भारतीय नागरिक चिंतामणि कर  ने किया था  भारत माता को महिला के रूप में दिखाया गया है जिनकी गोद में एक शिशु है तथा हाथ में संविधान के प्रतीक के रूप में एक किताब खुली हुई बनाई गई है किताब पर समानता के लिए तराजू का प्रतीक अंकित किया गय...

होरोती का प्रण चित्र

Oath of the Horatti painting credit by wikipedia कलाकार Jacques Louis David  माध्यम. कैनवस पर तेल रंग संग्रहालय लुब्र म्यूजियम साइज़ 90x121 cm होरत्ती का प्रण चित्र( होरेशिआ का प्रण, Oath of the Horatti)  यह नव शास्त्रीवाद का प्रथम चित्र माना जाता है। इसका निर्माण डेविड ने 1774_75 ई के आसपास किया। इस चित्र में रोमन जनतंत्र को आदर्श माना गया है। इस समय राज्य सत्ता कमजोर हो रही थी इसी कारण जनता में यह चित्र काफी प्रसिद्ध रहा था। राजा ने राजनैतिक हित के कारण इस चित्र को खरीद भी। होरती का प्रण चित्र, रोम और अल्बा लाेंगा ( Rome and Alba Longa) के मध्य विवाद पर आधारित है। रोमन इतिहास की कथा के अनुसार इस समय दो राज्यों में पूरी सेना के मध्य युद्ध न होकर चुने गए प्रतिनिधियों के मध्य युद्ध होता था। रोम की रक्षा के लिए होरोती परिवार के तीन भाई को पित अपने हाथ में तीन तलवारे लेकर राज्य की रक्षा की सौगंध दिलाता है। इसी प्रकार पड़ोसी शहर अल्बा के क्यूरिति (Curiatii) परिवार के तीन भाई भी चुने गए। देश प्रेम के लिए अपनी प्राणों की बाजी लगाने जा रहे होरोती भाइ...

dancing girl

Dancing girl सिंधु सभ्यता की मूर्तियों में प्रयुक्त सामग्री मोहनजोदड़ो से प्राप्त मूर्ति शिल्प मुख्य रूप से तीन प्रकार की सामग्री से बनी हैं  मिट्टी  पत्थर  धातु    धातु से बनाई गई मूर्तियों में नृत्य करती महिला सबसे अधिक प्रसिद्ध है यह मूर्ति सिंधु सभ्यता के मोहनजोदड़ो नामक स्थल से प्राप्त हुई है Dancing girl की कलात्मक विषेताएं डांसिंग गर्ल अपनी बनावट और आकार के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है यह एक दुबली पतली लड़की के रूप में दर्शाई गई है जिसके पैर नहीं है सिर पीछे की तरफ टेढ़ा है बालों को दाएं कंधे पर जुड़े के रूप में बांधा गया है गले में चार लड़ियों वाला हार पहने हुए हैं एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि दोनों हाथों में चूड़ियां समान नहीं है बाएं हाथ में 24 दाएं हाथ में चार चूड़ियां हैं Dancing girl आकृति नग्न अवस्था में अंकित है बाया पैर मुड़ा हुआ है जिस पर बाया हाथ टिका हुआ है दाया हाथ कमर पर स्थित है मूर्ति में हाथों की लंबाई सामान्य से अधिक है यह हड़प्पा काल की मूर्तियों में देखी जाने वाली प्रमुख विशेषता रही है मूर्ति तत्कालीन उन्नत ढलाई पद्धति को भी दर्शाती ह...

journeys end painting

बोलती तस्वीर अंतिम यात्रा  antim yatra abinanra nath taegor प्रसिद्ध कलाकृति प्रसिद्ध कलाकृति अंतिम यात्रा में अवनींद्र नाथ ठाकुर ने अपने जीवन के उन पलों को भावनात्मक रूप से प्रकट किया है जो उन्हें रविंद्र नाथ टैगोर की मृत्यु के समय अनुभव हुआ था वह जीवन पीड़ा इनके चित्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है 19वीं शताब्दी के अंत में अवनींद्र नाथ ठाकुर  ने भारत में लगातार लोकप्रिय होती जा रही ब्रिटिश एकेडमिक शिक्षा पद्धति और तेल माध्यम को चुनौती देने का कार्य किया और उस समय की एकेडमी के अथवा यथार्थवादी कला परंपरा को नकारा तथा उसके सम्मुख नए सौंदर्यशास्त्र के प्रतिमान स्थापित करने का प्रयास किया भारतीय लघु चित्र शैली मुगल और जापानी वास तकनीक से काफी प्रभावित थे अवनींद्र नाथ ठाकुर ने अपने जीवन काल में कई महत्वपूर्ण कलाकृतियों का निर्माण किया जिनमें से यात्रा का अंत भी एक विशिष्ट कलाकृति रही है अवनी नाथ ठाकुर की इस कलाकृति में अभिव्यंजना की एक नई भाषा दिखाई पड़ती है इस कृति में एक ऊंट को दिखाया गया है जो लंबी दूरी पर ले जाया जा रहा है उस उसके ऊपर लगे गए मुझसे वह नीचे की ...