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बंगाल शैली अभ्यास सेट-12: अवनींद्रनाथ टैगोर और नंदलाल बोस के 25 महत्वपूर्ण प्रश्न

कला अभ्यास सेट - 12 विषय: बंगाल शैली एवं भारतीय कला का पुनर्जागरण काल 1. बंगाल शैली (पुनर्जागरण काल) के प्रवर्तक कौन थे? (A) रबींद्रनाथ टैगोर    (B) अवनींद्रनाथ टैगोर    (C) नंदलाल बोस    (D) ई.बी. हैवेल उत्तर देखें सही उत्तर: (B) अवनींद्रनाथ टैगोर 2. 'वॉश पद्धति' (Wash Technique) का जन्मदाता किसे माना जाता है? (A) असित कुमार हल्दार    (B) अवनींद्रनाथ टैगोर    (C) क्षितींद्रनाथ मजूमदार    (D) नंदलाल बोस उत्तर देखें सही उत्तर: (B) अवनींद्रनाथ टैगोर 3. बंगाल शैली पर किस विदेशी पद्धति का प्रभाव सर्वाधिक पड़ा? (A) जापानी वॉश    (B) चीनी रेखांकन    (C) यूरोपीय छाया-प्रकाश    (D) उपरोक्त सभी उत्तर देखें सही उत्तर: (A) जापानी वॉश पद्धति 4. 'मास्टर मोशाय' के नाम से कौन सा चित्रकार प्रसिद्ध था? (A) अवनींद्रनाथ टैगोर    (B) नंदलाल बोस ...

अवनींद्रनाथ टैगोर और बंगाल शैली

अवनींद्रनाथ टैगोर और बंगाल शैली: TGT, PGT, NET और असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका 1. जीवन परिचय: एक नजर में जन्म: 7 अगस्त, 1871 (जोड़ासाँको, कलकत्ता)। उपनाम: शिल्प गुरु, कला सम्राट, भारतीय कला के पितामह। प्रमुख पद: कलकत्ता आर्ट स्कूल के उप-प्रधानाचार्य (1905) और इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट के संस्थापक (1907)। परीक्षा उपयोगी तथ्य (TGT/PGT): अवनींद्रनाथ ने कला की प्रारंभिक शिक्षा इटालियन कलाकार ओ. गिलहार्डी और चार्ल्स पामर से प्राप्त की थी। 2. वॉश शैली (Wash Technique): भारतीय कला की नई पहचान अवनींद्रनाथ टैगोर को भारत में 'वॉश पद्धति' का जनक माना जाता है। 1902 में जापानी कलाकार योकोयामा ताइकान और हिशिदा के भारत आगमन ने अवनी बाबू को जलरंगों के एक नए प्रयोग से परिचित कराया। विशेषता: रंगों को बार-बार धोकर उनमें कोमलता और पारदर्शिता लाना। नेट/प्रोफेसर स्तर का तथ्य: वॉश शैली में 'धुंधलापन' (Misty effect) जापानी प्रभाव है, जबकि 'रेखांकन' में अजंता और मुगल शैली का प्रभाव है। 3. कालजयी कृतियाँ (Masterpieces) परीक्षाओं में अक्सर उनके चित्रों का का...

Abanindranath Tagore MCQs in Hindi for TGT PGT Art Exam

अवनींद्रनाथ टैगोर: महत्वपूर्ण 25 प्रश्नोत्तर (क्विज़) टीजीटी/पीजीटी कला परीक्षा के लिए विशेष अभ्यास सेट Abanindranath Tagore Painting for TGT PGT Art. 1. अवनींद्रनाथ टैगोर का जन्म कब और कहाँ हुआ था? (A) 1871, जोरासांको (B) 1861, कोलकाता (C) 1882, मुंगेर (D) 1891, शांतिनिकेतन सही उत्तर देखें उत्तर: (A) 1871, जोरासांको 2. भारत में 'आधुनिक भारतीय चित्रकला' का जनक किसे माना जाता है? (A) राजा रवि वर्मा (B) नंदलाल बोस (C) अवनींद्रनाथ टैगोर (D) अमृता शेरगिल सही उत्तर देखें उत्तर: (C) अवनींद्रनाथ टैगोर 3. अवनींद्रनाथ ने किस जापानी कलाकार से 'वास' तकनीक सीखी थी? (A) ओकाकुरा (B) योकोहामा ताइकान (C) हिशिदा (D) उपर्युक्त सभी सही उत्तर देखें उत्तर: (B) योकोहामा ताइकान 4. प्रसिद्ध चित्र 'भारत माता' अवन...

Artist

 यूनानी चित्रकला का अविष्कार कर्ता- सीमोन यूनानी चित्रकला का वास्तविक जन्मदाता- पाली गनोतास सर्वप्रथम रंगों के द्वारा छाया प्रकाश दिखाया- आपोलोडोरस अंधकार वाले भाग में मिट्टी का प्रयोग किसने किया किदियास  दिखावा करने वाला कलाकार ज्यूकीसास करुण दृश्यों का चितेरा कहा जाता है- एरिस्तादीज हेलेनिस्टिक युग का रेफेल कहा जाता है एपेलीज इटली की चित्रकला का पिता (father of Italian painting)- सिमाबु  सिएना की चित्रकला का पिता (father of Siena painting)- डुविच्चिओ इटली में शुरू हुई पुनरुत्थान शैली के लक्षण दिखाई दिए- ज्योतो सर्वप्रथम परिप्रेक्ष्य किसने दिखाया- ज्योत्तों इटली की चित्रकला को बैजेंटाईन से मुक्ति दिलाई- ज्योत्यों फ्लोरेंस में पुनरुत्थान शैली का प्रथम चित्रकार मस्सधिओ फ्लोरेंस की वास्तुकला में पुनुर्थान का प्रारम्भ हुनेलेसकी मूर्तिकला में पुनुर्थान की शुरुवात दोनातेल्लो पैनल चित्रकार कहा जाता है सांद्रोबॉटिचेल्ली बारोक कला का पिता - माईकल एंजेलो इटली की कला का वयोवृद्ध आचार्य तिथियां कोमलताम भावनाओ का चित्रकार कोरज्जियो तैल चित्रण का जनक या अलसी के तेल का प्रयोग जान वान अ...

K venkatappa

        के वेंकटप्पा         के वेंकटप्पा का जन्म कलाकार पृष्ठभूमि में हुआ इनका परिवार सोने की पत्ती के प्रयोग की पारंपरिक शैली में पारंगत था इनकी आरंभिक शिक्षा मैसूर में हुई तथा कला की विशेष शिक्षा बंगाल कॉलेज ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट में हुई। इन्हें अवनींद्र नाथ ठाकुर का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ यह स्वयं को पुनर्जागरण काल आंदोलन की धारा से जोड़ते थे तथा अपने आप को कर्नाटक का कलाकार का लाने में गर्व महसूस करते थे       वेंगटप्पा 1920 के आसपास मैसूर में जा बसे यहां पर अपना एक स्टूडियो भी बनाया यहीं पर इन्होंने रामायण और महाभारत से संबंधित अपनी श्रेष्ठ कलाकृतियों का सृजन किया है प्रताप सिंह, शंकराचार्य, शिष्यों के साथ बुद्ध, महाशिवरात्रि, दमयंती, टीपू सुल्तान, एक पारसी महिला अपने सिंगार कक्ष में आदि कुछ इनकी श्रेष्ठ चित्र हैं इनके दो चित्र अर्धनारीश्वर और चरित पक्षी काफी महत्वपूर्ण है जिन्होंने भारत के साथ-साथ विदेशों में खूब ख्याति प्राप्त की     चरत पक्षी चित्र पक्षी चित्रण का संपूर्ण चित्र है जो फारसी, मुगल, पहाड़ी ...

Manishi dey

मनीषी दे (1909-1966 )  daughter of the soil         डे साहब का कलात्मक परिवार में  जन्म हुआ मनीषी दे का पालन-पोषण रवीन्द्रनाथ ठाकुर की देख-रेख में हुआ था। उनके बड़े भाई मुकुल दे और बहन रानी चन्दा बचपन के साथी थे और दोनों ही प्रतिभाशाली चित्रकार थे। चित्रकला के उनके प्रथम शिक्षक अवनीन्द्रनाथ ठाकुर थे। बाद में शान्ति निकेतन में उन्होंने नन्दलाल बसु से शिक्षा प्राप्त की फिर भी अपने विद्रोही तथा फक्कड स्वभाव के कारण वे उनके अन्धअनुयायी नहीं बन पाये। उन्होंने अपने कार्य को कभी भी गम्भीरता से नहीं लिया। चित्रकला उनके लिये एक प्रकार का खिलवाड़ थी और केवल 'मूड' में आने पर ही चित्र बनाते थे। उनके विभिन्न चित्रों में विभिन्न शैलियों के दर्शन होते है। टाटा परिवार के उनके मित्रों ने उन्हें व्यापारिक कला की ओर प्रोत्साहित किया फलतः उन्होंने टाटा, रेलवे तथा कई कपड़ा मिलों के लिये अनेक सुन्दर विज्ञापन बनाये। विज्ञापन तथा डिजाइन के क्षेत्र में उन्होंने नये प्रतिमान स्थापित किये। उन्होंने विभिन्न प्रकार की नारियों के उत्फल्ल सुकोमल रूपों में अपार मोहकता भर दी है। कुछ समय तक...

tgt pgt art test paper 22

tgt pgt kala practice set 22 बंगाल शैली या वाश शैली से कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न 1 बंगाल शैली का उदय हुआ 1 शांतिनिकेतन 2 कोलकाता 3 वीरभूमि 4 नदिया 2 Government College art of craft कोलकाता की की संबद्धता किस विश्वविद्यालय से है 1 कोलकाता विश्वविद्यालय  2 रवींद्र विश्वभारती विश्वविद्यालय वीरभूमि 3 उत्तरी बंगाल विश्वविद्यालय कोलकाता 4 प्रेसडेंसी कॉलेज कोलकाता 3 वास शैली के जनक थे  1अवनींद्र नाथ टैगोर 2 गगनेंद्र नाथ टैगोर  3 नंदलाल बसु  4 ई वी हैवेल 4 अवनींद्र नाथ टैगोर के विषय में कौन सा कथन गलत है 1 अंतिम यात्रा चित्र बनाया है 2 कालकाता स्कूल में शिक्षित थे 3 स्वदेशी आंदोलन में विषेश रुचि नहीं ली 4 इनके शिष्यों में वास शैली का प्रचार पूरे भारत में किया 5 अवनींद्र नाथ टैगोर ने कच और देवयानी चित्र का निर्माण किया  1 बंगाल स्कूल  2 विचित्र क्लब  3 कलाभवन 4 इंडियन सोसायटी आफ ओरिएंटल आर्ट 6   अवनींद्र नाथ टैगोर प्रसिद्ध चित्र  Journey's End ke विषय में असत्य है 1 चित्र में प्रतीकात्मक भाव का संयोजन हुआ है  1 रविंद्र नाथ की मृत्यु के बाद बनाय...

Abdul Rahaman chugtai

अब्दुल रहमान चुगताई रेखाएं कितनी महीना और कोमल है जैसे कमलनाल के रेशे हो     नन्दलाल बसु arjun as a victor - a r chughtai जन्म 1894 लाहौर मृत्यु  17 जनवरी 1975 लाहौर पाकिस्तान शिक्षा  मेयो कॉलेज आफ आर्ट शिक्षक  मेयो कॉलेज आफ आर्ट              अब्दुल रहमान चुगताई मुगल एवं राजस्थानी परंपरा के कलाकार थे जिन्होंने लघु चित्रकला को एक समकालीन परिवेश में परिष्कृत कर नया रूप प्रदान किया इनकी शैली में फारसी शैली का भी प्रभाव दिखाई देता है फिर भी कलाकार की कुशलता ने नए आयाम गढ़े हैं चुगताई की रेखांकन और रंग योजना काफी महत्वपूर्ण थी इनकी शैली पर चीन जापान अजंता मुगल एवं राजस्थानी शैली का प्रभाव भी दिखाई पड़ता है नंदलाल बसु ने अब्दुल रहमान चुगताई के चित्रों की प्रशंसा करते हुए लिखा रेखाएं कितनी महीना और कोमल है जैसे कमलनाल के रेशे हो                मोहम्मद अब्दुल चुगताई का जन्म 2 सितंबर 1894 ईसवी में लाहौर वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था कलाकारी इनको परंपरा से ही प्राप्त हुई थी मेयो कॉलेज आफ आर्ट ...

Shailendra nath dey

kalakar shailendra nath dey     मानव जीवन के मूक भावों को प्रत्यक्ष रुप से दर्शाने वाली कला ही एक चाक्षुष माध्यम है  शैलेंद्र नाथ दे जन्म       1890 इलाहाबाद मृत्यु        1971 शिक्षा      बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट  शिक्षक    जयपुर स्कूल ऑफ आर्ट  व्यवसाय   चित्रकार  मेघदूत - शैलेंद्र नाथ दे, इलाहाबाद संग्रहालय            भारतीय चित्रकला के पुनरुत्थान काल का केंद्र रहे बंगाल स्कूल आफ आर्ट से स्वदेशी भावना की अलख जगाने वाले कला गुरु अवनींद्रनाथ टैगोर ने सारे देश में चित्र कला के विस्तार के लिए अपने शिष्यों को भेजा जिनमें से शैलेंद्र डे का नाम प्रमुखता के साथ लिया जाता है इन्होंने जयपुर स्कूल ऑफ आर्ट में जाकर बंगाल शैली का प्रचार प्रसार किया शैलेंद्र डे की कला देसी परंपरा से प्रभावित होने के साथ ही अलंकरण से भी युक्त थी राजस्थान में कार्य करते करते यहां की संस्कृति प्राकृतिक वातावरण एवं इतिहास की पृष्ठभूमि भी इनके चित्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ने लगती है...

Lalit Mohan Sen

ललित मोहन सेन L M Sen जन्म          1898 शांतिपुर नदिया पश्चिम बंगाल मृत्यु           1954 शिक्षा          लखनऊ कॉलेज ऑफ आर्ट, रॉयल एकेडमी ऑफ लंदन ग्राफिक्स आर्ट शिक्षक       कला विद्यालय लखनऊ व्यवसाय     चित्राकार छापाकार मूर्तिकार           ललित मोहन सेन अनवत कला साधना के बल पर अपना कला जगत में स्थान निश्चित किया नियमों का पालन करने वाले, सरल स्वभाव तथा कार्य के प्रति सच्ची लगन रखने थे चित्रकार होने के साथ-साथ एल एम सेन मूर्तिकार, प्रिंट मेंकर तथा फोटोग्राफर के रूप में भी जाने जाते हैं इन्होंने कभी भी स्वयं को किसी एक माध्यम तक सीमित नहीं रखा बल्कि जल रंग, तैल रंग, पेस्टल, ग्वाश, इंक, टेम्परा एवं प्रिंट मेकिंग के कई माध्यमों में आश्चर्यजनक कार्य किया एक कलाकार और शिक्षक के रूप में इनका अतुलनीय योगदान है इनके सानिध्य में बी एन जिज्जा, ईश्वर दास, मदन लाल नागर, रणवीर सिंह बिष्ट, एच एल मेढ़ आदि कलाकार निकले जिन्होंने भारतीय चित्रकला को नए आयाम दिए इन...

Sarada Charan Ukil

शारदा चरण उकील       दिल्ली की आधुनिक चित्रकला को निश्चित दिशा देने वाले कलाकारों में को शारदा चरण उकील का नाम काफी सम्मान के साथ लिया जाता है अपनी आरंभिक शिक्षा बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट से कला में पूर्ण की वहां पर कला गुरु अवींद्रनाथ से विशेष कला शिक्षा प्राप्त की शारदा बाबू ने अपने गुरु से कला की बारीकियां सीखी तथा वास शैली का भी  विशेष अध्ययन किया और अवींद्रनाथ ठाकुर कभी भी किसी शिष्य को विषयवस्तु के चुनाव और शैली के प्रयोग को लेकर किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं करते थे गुरु का यही स्वतंत्र स्वभाव शारदा चरण के व्यक्तित्व के विकास में सहायक रहा जन्म       14 नवम्बर 1888 विक्रमपुर ढाका बांग्लादेश मृत्यु        21 जुलाई 1940 दिल्ली शिक्षा     बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट गुरु         अवींद्र नाथ टैगोर पुरुस्का र 1930 - 31 वायरसराय गोल्ड कप, 1940 ऑल इंडिया फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट सोसायटी नई दिल्ली शिक्षक     1912-17 गैरीपुर असम,1918 दिल्ली आर्ट कॉलेज, 1926 सारदा उकील ऑफ आर्ट दिल्ली पत्रिका ...

Kshitindranath Mazumdar

क्षितिन्द्र नाथ मजूमदार संत चित्रकार क्षितिन्द्र नाथ मजूमदार      भारतीय आधुनिक चित्रकला के इतिहास में क्षितिन्द्र नाथ मजूमदार ही ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने वैष्णो संप्रदाय से संबंधित चित्र बनाने में अपना पूरा जीवन लगा दिया जिनके लिए चित्रकला भक्ति का साधन थी इनके चित्रों को देखकर उनके अंदर बैठे संत कलाकार को देखा जा सकता है जो अपने ह्रदय में समाए हुए भावों को रेखा रंग के माध्यम से चित्र फलक पर उतार था तथा जिन्हें देखकर दर्शक भाव विभोर हो जाता था इसीलिए संत चित्रकार या भाव के सम्राट के नाम से भी पुकारा जाता है चैतन्य का त्याग  जीवन परिचय और शिक्षा        क्षितिन्द्रनाथ मजूमदार का जन्म 31जुलाई 1891 में मुर्शिदाबाद के जगती गांव में हुआ था अल्पआयु में ही इनकी माता का देहांत हो गया था पिता केदारनाथ ने बालक मजूमदार को अकेले ही पाला मजूमदार की आरंभिक शिक्षा घर पर ही हुई क्षितिन्द्रनाथ की कला के प्रति रुचि बाल्यकाल से ही थी जो बड़े होने के साथ और मुखर होती गई पिता केदारनाथ मजूमदार ने क्षितिन्द्रनाथ मजूमदार के इस हुनर से परिचित थे इसीलिए आगे की शिक्षा ...

Asit Kumar Haldar

         असित कुमार हल्दार          असित कुमार हल्दार  आधुनिक चित्रकला के एक श्रेष्ठ चित्रकार थे जिन्होंने भारतीय परंपराओं को आगे बढ़ाया असित कुमार हल्दार का जन्म 10 सितंबर 1890 ईस्वी को कोलकाता पश्चिम बंगाल में हुआ था आपके पिता एक कलाकार थे इसी कारण से आप को कला विरासत में प्राप्त हुई हल्दार जी की पारंपरिक शिक्षा मूर्ति निर्माता जदुनाथ पाल और बक्केश्वर पाल के सानिध्य में हुई तत्पश्चात बंगाल कला विद्यालय में 1906 में प्रवेश लिया यहां पर श्री अवनीन्द्र नाथ के सानिध्य में शिक्षा ग्रहण की अवनीन्द्र नाथ के सानिध्य में रहकर चित्रकला की कई बारीकियां सीखी तथा भारतीय परंपरागत कला के विषय में भी काफी ज्ञान अर्जित कर लिया यही कारण था कि शिक्षा पूर्ण करने के बाद असित कुमार भारतीय कला के एक महान कलाकार के रूप में स्वयं को स्थापित कर सके शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात रवींद्र नाथ टैगोर के आग्रह पर 1911 ईस्वी में कला भवन सांतिनिकेतन में अध्यापन का कार्य करने लगे तथा 1923 में जयपुर कला विद्यालय एवं 1925 से 1945 तक लखनऊ कला विद्यालय में प्राचार्...