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जनवरी, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ललित कला अकादमी

ललित कला अकादमी ललित कला अकादमी का उद्घाटन 15 अगस्त 1954 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम आजाद द्वारा नई दिल्ली में किया गया। 11 मार्च 1957 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत रजिस्टर्ड कराया गया। उद्घाटन में अकादमी के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए मौलाना अब्दुल कलाम ने कहा कि अकादमी को अतीत की गौरवशाली परंपराओं को संरक्षित करने और हमारे आदिवासी कलाकारों के काम से उन्हें समृद्ध करने के लिए काम करना चाहिए ललित अकादमी ने भारत में समकालीन आधुनिक लोक और आदिवासी कला की जीवंत जटिलताओं और सामने आने वाले पैटर्न को प्रतिबंधित करने वाले।  क्षेत्रीय कार्यालय  ललित कला अकैडमी के चेन्नई, कोलकाता, भुवनेश्वर, गढ़ी में क्षेत्रीय कार्यालय और शिमला, अहमदाबाद, अगरतला, पटना में उप केंदों  है। प्रकाशन समकालीन कला पत्रिका का प्रकाशन ललित कला अकादमी नई दिल्ली द्वारा किया जाता है कार्य

राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा नई दिल्ली

राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा भारतवर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर कलाओं को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की स्थापना जयपुर हाउस, नई दिल्ली में 29 मार्च 1954 में स्थापित की गई। इसका इसका अध्यक्ष हरमन गोएट्स को बनाया गया, कुछ समय पश्चात 1956 में मुकुल चंद्र डे को अध्यक्ष के पद पर प्रतिष्ठित किया गया। इस कला दीर्घा का संचालन भारत सरकार के पास है।  स्थापना   1954 बेबसाइट    https://sites.google.com/view/ngmaindia/ngma उद्देश्य राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की स्थापना का मुख्य उद्देश्य 18 वीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान तक की कलाकृतियों का संग्रह तथा उनका समय-समय पर प्रदर्शन भी रहा है यहां  पर पुस्तकालय और समकालीन पत्रिकाओं का एक कलेक्शन भी है यहां पर देश के जाने-माने कलाकारों की कृतियां संग्रहीत हैं इनमें चित्रकला, मूर्तिकला, छापाकला और फोटोग्राफ सम्मिलित हैं।  राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की शाखाएं राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की सफलता को देखते हुए इसका विस्तार बेंगलुरु एवं मुंबई में शाखाएं खोलकर किया गयाहाल है।

के सी एस पणिकर

KCS PANNIKAN की कला यात्रा  कला में प्रयोगवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा देने वाले कलाकार के सी एस पणिकर  का जन्म कोयंबतूर में हुआ था इनका पूरा नाम कोवलेजी चिरामपुथुर शंकर पणिकर है। पिता की मृत्यु के बाद डाक विभाग में इन्होंने नौकरी कर ली परंतु कला के प्रति लगाव के कारण त्यागपत्र देकर मद्रास कॉलेज आफ स्कूल आर्ट में दाखिला लिया। वहां पर देश के प्रसिद्ध मूर्तिशिल्पकार देवी प्रसाद राय चौधरी का सानिध्य मिला उनकी देखरेख में इन्होंने अपनी कला शिक्षा पूरी की। आरंभिक कार्य मालाबार तट पर जल रंग माध्यम में झील, नाव, नावघाट, बाजार, नारियल के पेड़ आदि के चित्र बनाते हुए व्यतीत हुआ। इस काल के प्रमुख चित्र हैं कैनाल डी ग्रेव। केसीएस पणिकर ने परंपरागत शैली से प्रेरित होकर सौंदर्य के नए प्रतिमान स्थापित किया जो उनके चित्र न्यूड और स्लीपिंग न्यूड में दिखाई पड़ते हैं 1950 की कला शैलियों में यथार्थवादी प्रभाव भी चित्रों पर दिखाई पड़ता है। जो बच्चा, गार्डन श्रृंखला में देखा जा सकता है 1963 से लेकर 1975 तक का समय के सी एस पणिकर की कला यात्रा में स्वर्णिम काल रहा है। इस अवध में आदिवासी ज्यामितिय ...