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अप्रैल, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

medium and technique in art

चित्रकला में माध्यम एवं तकनीक चित्रकला में माध्यम का प्रयोग :  चित्रकला में विषय एवं तकनीक के साथ साथ माध्यम की भी मुख्य भूमिका होती है, इनके अनुपस्थिति में चित्र का मूर्त रूप संभव नहीं है। समय के साथ-साथ चित्रों के माध्यम एवं तकनिकों में परिवर्तन हुआ। अगर हम प्रागैतिहासिक काल के चित्रों से लेकर वर्तमान समय के चित्रों में माध्यम के प्रयोग को देखें तो इसमें बहुत ही परिवर्तन हुआ। जहाँ गुफा चित्रण में आदि मानव गेरु रंग, खड़िया एवं कोयला के प्रयोग से चित्रण करते थे, तो अजंता, बाघ, जोगीमारा, तथा सितलबासल आदि गुफा के भित्तिचित्रण में टेम्परा का प्रयोग हुआ। इसके बाद तैल रंग , जल रंग तथा ऐक्रेलिक रंग का प्रयोग वृहद पैमाने पे शुरू हुआ। चित्रकला में माध्यम का प्रयोग निम्नलिखित है :  १. पेंसिल २ रबड़ ३. जल रंग ४. पोस्टर रंग ५. तैल रंग ६. एक्रेलिक रंग ७. टेम्परा ८. फ्रेस्को ९. कोलाज १०. मोजैक ११. स्याही १२. डिजिटल पेंटिंग आदि । १. पेंसिल (Pencil):-  किसी भी माध्यम में चित्र बनाने से पहले चित्रपट पर पेंसिल से रेखांकन या ड्राइंग करना अतिआवश्यक है चित्र में रेखांकन के लिए पेंसिल के अलावे...

khilaune banana

भारत में खिलौने बनाना  ऐसे कलात्मक कार्य को कहते है जो उपयोगी होने के साथ साथ घर सजाने के काम में आता है जिसे मुख्यत हाथ से या सुलभ औजारों की सहायता से बनाया जाता है ऐसी कलाओं का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व होता है हस्तशिल्प किसी भी देश की अभिव्यक्ति होने के साथ साथ उस देश की संस्कृति परम्परा और विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। भारत की भव्य सांस्कृतिक विरासत और सदियों से क्रमिक रूप से विकास कर रही इस परंपस की झलक देश की हस्तशिल्प वस्तुओं में दिखाई पड़ती है हस्तकला अलग-अवन माध्यम एव अलग-अलग क्षेत्र होने के बाद भी इसके विषयवस्तु परंपरा पर आधारित होती है। हस्त शिल्प निम्न प्राकर के होते है   बांस हस्तशिल्प जूट हस्तशिल्प धातु हस्तशिल्प काष्ट हस्तशिल्प मिट्टी हस्तशिल्प  खिलौने बच्चे और खिलौने का संबंध जन्म से ही रहा है हम यह भी कह सकते हैं की खिलौनों के बिना हम बच्चों की दुनियां कल्पना भी नहीं कर सकते हैं  बच्चों को  खिलोनें विशेष रूप से आकति एवं मोहित करता है खिलौने में बच्चों के भावात्मक और शारीरिक विकास में सहायक होते है सरल एवं परंपरागत खिलौनों के द्वारा बच्च...

handi craft

 हस्त निर्मित कलाएं हस्तकला की परिभाषा “हस्त निर्मित सभी कलात्मक वस्तुएं जो रचनात्मक हो, जिसमे मशीन का प्रयोग ना हो हस्तकला कहलाती है।" हस्तकला का परिचय हस्तकलाओं का जन्म एवं विकास मूलतः मनुष्य की आवश्यकताओं से संबंधित है। शुरुआत में यह अप्रशिक्षित ग्रामीण लोगों के रचनात्मकता का उदाहरण था । मनुष्य अपनी आवश्यकता के वशीभूत होकर अपनी दैनिक उपयोग की वस्तुओं को खाली समय में निर्माण करता रहा। बाद में यह वंशानुगत हो गया। ऐसा समाज का वर्ग जो हस्तकला से संबंधित है और निर्भर भी संस्कृति मंत्रालय ने ऐसे वर्गों को बढ़ावा देने के लिए इसे "कला" के अंतर्गत रखा और देश के विभिन्न हिस्सों में शिल्पमेले या क्राफ्टमेले का आयोजन करता है। जिससे कि हस्तकला से जुड़े कलाकारों का सामाजिक और आर्थिक पक्ष मजबूत हो सके ऐसे लोगों को अपनी पहचान और सम्मान भी मिल सके। हस्तकलाओं के अंतर्गत दो प्रकार की वस्तुओं का निर्माण हुआ है एक दैनिक जीवन में उपयोग की दूसरी स्वतः सुखाय, सजावटी वस्तुएं यदि हम हस्तकला को श्रृंखलावद्ध अपने अतीत से जोड़े तो पाएंगे कि प्रागैतिहास काल का मनुष्य अपने हाथों द्वारा ज...

sudhir ranjan khastagir

सुधीर रंजन खस्तगीर भारतीय कला का एक ऐसा आधार स्तंभ जिसने आधुनिक कला के विषय में प्रचलित इस मिथक को तोड़ा की आधुनिक कला के विकास के लिए यूरोप की अंधी अनुकृति आवश्यक है अपनी कला को अर्थ वान बनाने के लिए सुधीर रंजन खस्तगीर ने सदैव अपनी पुरातन परंपराओं से जुड़ते रहे इसीलिए सुधीर रंजन खस्तगीर को लोग चित्रकार की पदवी से भी नवाजा गया है जन्म सुधीर रंजन खस्तगीर का जन्म सितंबर 1960 ईस्वी में बांग्लादेश के सीट गांव में हुआ था इनके पिता एक इंजीनियर से बचपन से ही इनकी चित्रकला में विशेष रूचि देखने को मिली शिक्षा 1925 ईस्वी में खटके ने उच्च शिक्षा के लिए शांति निकेतन में भेजा गया जहां पर पुलिस ने ने क्रांतिकारी समझ कर पकड़ लिया पढ़ाई छोड़ कर घर लौट आए परंतु पुणे 1928 ईस्वी में शांति निकेतन में प्रवेश लिया जहां पर अनिल नाथ टैगोर व नंदलाल बस के सानिध्य में करा शिक्षा प्राप्त की शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात आऊंगी नाथ के आग्रह पर देश की कला एवं संस्कृति को समझने के लिए कोर्णाक अजंता एलोरा एलिफेंटा महाबलीपुरम का भ्रमण किया ग्वालियर के सिंधिया स्कूल मैं अध्यापक के रूप में 4 साल तक काम किया तथा 1936 में दू...