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पशुपति शिव

पशुपति शिव (Shiva Pashupati)  सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त पशुपति की शिव मुहर, एक प्रसिद्ध कलाकृति है जो मोहनजोदड़ो नामक स्थल से प्राप्त हुई है। इस मुहर पर मुख्य आकृति के दाई ओर भैंस और गैंडा तथा बाई ओर हाथी और बाघ है नीचे की तरफ हिरण बनाए गए हैं इस मुहर की मुख्य आकृति तीन सींगों वाला मुकुट पहने एक देवता की है, जो योग मुद्रा में पलथी मार कर बैठा है इस आकृति को विद्वानों ने शिव का आदिम रूप माना है। पाशुपत शिव से जुड़े हुए अन्य महत्वपूर्ण बिंदु  खोज पशुपतिनाथ सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो पुरातात्विक स्थल से मिली है  आकृति इसमें तीन सिंगों वाले मुकुट पहने देवता की हैं योग मुद्रा में बैठे हैं। देवता के बाई ओर हाथी बाघ और दाई ओर बैल गैंडा तथा नीचे की तरफ हिरण बनाए गए हैं।  इस मुहर का संबंध पशुपति अर्थात हिंदू देवता भगवान शिव से संबंध स्थापित किया जाता है। संरक्षण यह मुहर वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय ने दिल्ली में रखी हुई है। निर्माण सामग्री सेलखड़ी पत्थर  माप 3.56 सेमी ऊंची, 3.53 सेमी लंबी, 0.76 सेमी चौड़ी 

कोणार्क का सूर्य मंदिर

कोणार्क मंदिर (सूर्य मंदिर)  मंदिर का इतिहास    यह मंदिर उड़ीसा की पुरी जिले में स्थित है। यह कोणार्क नामक शहर में स्थित होने के कारण इसे कोणार्क का सूर्य मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण गंग वंश के शासन नरसिंह देव प्रथम ने 1250 में कराया था।  इस मंदिर का निर्माण गंग राजवंश ने अपनी विजय के उपलक्ष में कराया था । यह मंदिर चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित है। कोणार्क के सूर्य मंदिर की स्थापत्य कला  इस मंदिर का निर्माण रथ की रचना के आधार पर किया गया है  कोणार्क के सूर्य मंदिर के चार मुख्य भाग हैं, गर्भग्रह, जगमोहन, नृत्य मंडप, भोग मंडप । रथ में दोनों तरफ 12-12 पहिए लगे हैं, जिनका व्यास 9 फीट 8 इंच है, प्रत्येक पहिए में आठ तिलिया है। रथ को खींचने के लिए सात अश्व बनाए गए हैं। मंदिर का गर्भ ग्रह लगभग में 68 मीटर ऊंचा था।  मूर्तियां  मंदिर के गर्भग्राम में सूर्य की क्लोराइड पत्थर की मूर्ति है, जिसे ब्लैक पैगोडा भी कहा जाता है। मंदिर में स्त्री पुरुष के प्रेम मिलन विषयक मूर्तियां भी अंकित की गई है। वाद्य यंत्र बजती नायिका मूर्ति विशेष प्रसिद्ध है।...

सचिन तेंदुलकर की मूर्ति

Sachin Tendulkar ki Murti I feel as if I met God Pramod Kamble सचिन तेंदुलकर की लाइफ साइज (आदम कद)की मूर्ति वानखेडे क्रिकेट स्टेडियम मुंबई में स्थापित की गई सचिन तेंदुलकर का स्टैचू ब्रॉन्ज माध्यम में बनाया गया है इस मूर्ति का उद्घाटन विश्व कप 2023 के भारत और श्रीलंका के मध्य खेले गए वनडे मैच में किया गया इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि, शरद पवार, राजीव शुक्ला आदि मौजूद थे अहमदनगर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रमोद कामले ने सचिन तेंदुलकर को जीवंत प्रतिमा का निर्माण किया जो ट्रेडमार्क  मुद्रा में बनी है बाया पैर फैलाए हुए लिफ्टेड ड्राइव के लिए तैयार शरीर थोड़ा झुका हुआ सर ऊंचा तथा बाला आसमान की तरह उठा हुआ है यह मुद्रा दर्शकों को सदैव लुभाती रहती है यह त्रिभंग मुद्रा में बनाई गई है यह प्रतिमा मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा स्थापित की गई है

मूर्तिकार प्रदोष दासगुप्ता की कला यात्रा

Pradosh Dasgupta Sculptures 1912-1991 transcending time समकालीन भारतीय कला क्या है इसका कोई निश्चित चरित्र है या अपने स्वयं में परिपूर्ण है अन्य राष्ट्रों से अलग होकर इसने दुनिया में अपनी पहचान कैसे बनाएं इस प्रश्न का उत्तर जितना स्पष्ट है उससे अधिक आस्थान विश्वासों में स्वयं के चरित्र को देखना जो धार्मिक प्रथाओं और सदियों पुरानी रीति-रिवाजों परंपराओं तौर-तरीकों आदतो से बंधा हुआ है से बंधा हुआ है लोग दूसरे शब्दों में कहें दो लोगों के जीवन जीने का तरीका स्पष्ट रूप से दिखता है समकालीन दुनिया में कुछ इस तरह से फैला हुआ है जो लोगों के जीवन को काफी हद तक नियंत्रित या ढलता भी है इस को नापने का कोई निश्चित तरीका नहीं है निसंदेह गोली की स्थिति जलवायु और परिस्थितियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं या वनस्पति और जैविक जीवन से मिलता जुलता है चाहे दुनिया का कोई कोना हो बुनियादी अवधारणा है वैसी ही रहती हैं भारतीय मूर्तिकला के माध्यम से भारतीय मूर्तिकला के दृश्य अगर समकालीन भारतीय कला को देखा जाए तो इसमें नई सहेलियों के विकास के कई चरण आपको दिखाई पढ़ेंगे इनके संरक्षण के लिए समय-समय पर विभिन्न राजा और धार...