सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सितंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नंदलाल बोस Nandalal Bose

   chitrakar nandlal bose ek parichay    नंदलाल बोस का जन्म 3 दिसंबर 1882 ईसवी को खड़कपुर बिहार में हुआ था उनका परिवार मध्यमवर्गीय था  पिता पूर्ण चंद्र बोस दरभंगा के राजा के जंगलात के मैनेजर थे उनकी माता क्षेत्रमणि देवी एक धार्मिक स्त्री थी तथा शिल्प में उनकी विशेष रूचि थी और ऐसा नंदलाल बोस का कथन है कि जो कुछ भी कला अभिरुचि के प्रति अनुराग है वह  अपनी माता के माध्यम से प्राप्त हुआ है     इनकी प्रारंभिक शिक्षा बड़ी ही अस्त व्यस्त रही नियमित रूप से इन्हें मिडिल स्कूल में भर्ती कराया गया जहां पर अपनी शिक्षा प्राप्त की 1897 में कोलकाता आ गए यहां केंद्रीय कॉलेज स्कूल में प्रवेश लिया परंतु आगे की पढ़ाई में मन न लगा अंत में बोस की जिद के आगे हार मान कर परिवार वालों ने इन्हें कोलकाता कला विद्यालय में प्रवेश दिला दिया       गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट     1909 मैं लेडी हरिधम जो एक अंग्रेज कलाकार थी अजंता  चित्रों की अनुकृतियों के लिए भारत आई और सिस्टर निवेदिता ने नंदलाल बोस असित कुमार हलदर वेंटप्पा और समरेंद्र नाथ गुप्त...

कथनी करनी

  सुबह का समय था सूरज अपने श्वेत अश्व वाले रथ पर बैठकर अभी दिन की सैर पर निकलने वाला ही है सारा परिवेश उसकी लालिमा से युक्त हो गया है पेड़ पौधे भी इस अद्भुत दृश्य को अपने हृदय में चित्र की भांति बैठाने के लिए आंखें गडा कर बैठे हैं पशु पक्षी सभी अपने नित्य कार्यों पर जाने को तैयार हैं तभी एक बंदर आकर राजा साहब का संदेश सुनाता है आज राज्य में कई महापुरुष पधारे हैं जिनके मात्र विचारों के श्रवण से आप सभी के सारे दुख दर्द दूर हो जाएंगे       राज्य की सारी प्रजा बंदर भालू चिटी हिरण आदि एकत्र हुए विद्वान मंडली के लिए सजे हुए पंडाल को देख लोग सम्मोहित हो रहे थे पदों पर पच्चकारी का कार्य उस पर पड़ता प्रातः कालीन प्रकाश अद्भुत दृश्य निर्मित कर रहा था लोगों को वैकुंठधाम का भ्रम उत्पन्न हो रहा था राजपुरोहित आकर राजा के स्वागत में जय जयकार के नारे लगाते हैं राजा सिंहासन आसीन होकर सभा को प्रारंभ करने का आदेश देता है राजा के मुंह पर एक अभिमान की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी वह मन में विचार कर रहा था कि आज कितना शुभ दिन आया है राज्य के सारे कर्मशील व्यक्ति एक साथ एकत्र होने होकर...

राजा रवि वर्मा ( 1848-1906 )

         चित्रकार राजा रवि वर्मा  Kalakar Raja Ravi Varma Kalakar Raja Ravi Varma का परिचय      राजा रवि वर्मा का जन्म ऐसे वातावरण में हुआ जब भारतीय चित्रकला के सम्मुख स्वीकार्यता का संकट खड़ा था राजा रवि वर्मा ने जन सुलभ विषयों अथवा उन विषयों को अपना चित्रण आधार बनाया जो जन सामान्य में युगो युगो से समाएं हुए थे यही कारण था राजा रवि वर्मा के चित्र जनसाधारण के दिलों तक पहुंच सके इसीलिए राजा रवि वर्मा को जनसामान्य का चित्रकार भी कहा जाता है महिला और हंस कृति टिकट पर - राजा रवि वर्मा              रवि वर्मा का जन्म केरल राज्य के तिरुवंतपुरम से 24 मील दूर किलीमन्नुर में 1848 हुआ था चित्रकारों का राजकुमार तथा राजकुमारों में चित्रकार की संज्ञाओं से राजा रवि वर्मा को संबोधित किया जाता है भारतीय(तंजोर शैली) तथा पश्चिमी अकादमिक यथार्थवाद के बीच के सेतु स्वरूप थे राजा रवि वर्मा पहले प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार थे जिन्होंने कैनवास पर आइल रंगों से कार्य प्रारंभ किया इन्होंने यूरोपी चित्रण पद्धति में सर्वश्रेष्ठ भार...

इस कलम से क्या लिखूं

      आज शिक्षक दिवस है जो श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिन पर मनाया जाता है इस अवसर पर मेरे बच्चे (विद्यार्थी) ने मुझे एक पेन उपहार में दी उसे काफी देर देखने के बाद मैं सोचने लगा ऐसा क्या है इस पेन में जो मैं लगातार देख रहा हूं किसी भी दुकान पर जाकर ऐसी या इससे भी महंगी पेन ले लूं पर  मस्तिष्क इस तर्क से सहमत नहीं था वह मेरे मन से इस बात पर लड़ गया बोला आप कितना संकुचित सोचते हो इस कलम की कोई कीमत नहीं है इसमें तो उसकी अपार श्रद्धा और विश्वास है जिसकी तुम रोज सुबह शाम वंदना करते हो उसके प्रसाद पर शक कर रहे हो उस बच्चे की श्रद्धा को तो देखो जिसने तुम्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया तुम क्या हो क्या कर रहे हो कभी तो कुछ ऐसा कार्य किया होगा जो वह बच्चा बड़ी मेहनत करके आपके लिए  पेन लाया है इसे मात्र उपहार मान लेना उस बच्चे का नहीं बल्कि उस ईश्वर का अपमान हैं और आप अपनी छोटी संकुचित सोच का परिचय दे रहे हैं       कहते हैं बच्चे भगवान का रूप है वह बहुत भोले भाले होते हैं मुझे इस तर्क को मानना ही होगा किसी विद्वान ने कहा है देने वाले...

मन क्यों निराश है

   माना संसार आनंद से परिपूर्ण है जो आनंद आसपास मुझे अपनी तरफ आकर्षित करता था वही आनंद मिलने पर भी मन को नए रोमांच का अनुभव नहीं करा पा रहा है मन ज्यादा उच्च आकांक्षी तो नहीं हुआ है ऐसा मुझे पूर्ण रूप से आभास है पर ऐसा क्यों है यह नहीं पता जीवन में जिस चीज के लिए प्रयास कर रहा था व सिद्ध होते हुए भी ऐसा लगता है जैसे जीवन स्थिर हो गया इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता जब कभी भ्रमण करने का मौका मिलता है तो ऐसा लगता है जैसे जिंदगी रंगीन हो गई हो अंदर का एक बच्चा आज फिर से मचलने लगता है जो सब कुछ जानना चाहता है हर पल को जीना चाहता है उसे बड़ी शानदार गाड़ियों में न हीं घूमने है शौक है न ही फाइव स्टार होटल में खाने-पीने और नहीं शान शौकत से जीने की चाह है वह तो किसी तरह प्रकृति के सौंदर्य का साक्षात्कार करना चाहता है अपने दोस्तों और चाहने वालों के साथ वक्त व्यतीत करना चाहता है ऐसी छोटी-छोटी चीजें पाकर ऐसा संतुष्ट हो जाता है मानव सारे संसार की खुशियां उसने पाली हो यह सच भी है जीवन बदलाव और नए अनुभव का योग है जो ज्यादा समय तक एक तरह नहीं रह सकता है      ...