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लौह स्तंभ

     लौह स्तंभ (Iron Pillar) 1 लौह स्तंभ का निर्माण किस शासक के समय में हुआ? 1 चंद्रगुप्त प्रथम 2 चंद्रगुप्त द्वितीय 3 समुद्रगुप्त 4 स्कंद गुप्त 2 दिल्ली का प्रसिद्ध लौह स्तंभ जो सदियों से अटूट खड़ा है, निम्नलिखित में से किस ऐतिहासिक परिवेश परिसर में स्थित है? 1 जामा मस्जिद परिसर 2  लाल किला परिसर 3 कुतुब मीनार परिसर 4 हुमायूं का मकबरा परिसर 3  लौह स्तंभ की ऊंचाई कितने मीटर है? 1,  6 मीटर 2,  7 मीटर 3,  8 मीटर 4,  9 मी 4  लौह स्तंभ का संबंध किस हिंदू देवता से रहा है? 1 शिव 2 विष्णु 3 गणेश 4 उपरोक्त सभी 5 वर्तमान में महरौली का लौह स्तंभ किस राज्य में स्थित है ? 1 मध्य प्रदेश  2 दिल्ली  3 तमिलनाडु  4 उत्तर प्रदेश  उत्तर 1.2, 2.3, 3.2, 4.2, 5.2 उपरोक्त प्रश्नों की व्याख्या   महरौली का लौह स्तंभ दिल्ली में कुतुब मीनार परिसर में स्थित है। इसकी ऊंचाई 7. 2 मी है। यह स्तंभ निर्माण में प्रयुक्त धातुओं की जंगरोधी संरचना के लिए विशेष तौर पर प्रसिद्ध है। इस स्तंभ का निर्माण भगवान विष्णु के सम्म...

पिपरहवा स्तूप

पिपरहवा स्तूप piprahwa stupa यह स्तूप उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर जिले में है। इस स्थल की खुदाई से एक विशाल स्तूप और कई मठों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इस स्तूप का निर्माण मौर्य शासको ने कराया पिपरहवा स्तूप का समय 240 से 200 ईसा पू र्व है। इस स्तूप की खोज 19वीं शताब्दी के अंत में विलियम कलैक्सटन पेप्पे (william claxton peppe) द्वारा हुई। पिपरहवा स्तूप  उत्तर प्रदेश का सबसे प्राचीन स्तूप है

उत्तर प्रदेश विधानसभा की वास्तुकला

प्रदेश विधानसभा की वास्तुकला का परिचय https://uplegisassembly.gov.in/ विधान भवन की वास्तुकला  काउन्सिंल हाउस (विधान भवन) के भव्य भवन की नींव 15 दिसम्बर, 1922 को तत्कालीन गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर द्वारा रखी गयी थी तथा 21 फरवरी, 1928 को इसका उद्घाटन हुआ था। इस भवन का निर्माण कलकत्ता की कम्पनी मेसर्स मार्टिन एण्ड कम्पनी द्वारा किया गया था। इसके मुख्य आर्कीटेक्ट सर स्विनोन जैकब तथा श्री हीरा सिंह थे। उस समय इसके निर्माण हेतु 21 लाख रूपया स्वीकार हुआ था। इस भवन की स्थापत्य यूरोपियन और अवधी निर्माण की मिश्रित शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भवन अर्धचक्राकार रूप में मुख्य रूप से दो मंजिलों में मिर्जापुर (चुनार) के भूरे रंग के बलुआ पत्थरों के ब्लाक से निर्मित है। अर्धचक्र के बीच में 'गोथिक' शैली का गुम्बद है जिसके शीर्ष पर एक आकर्षक छतरी है। इस गुम्बद के चारों ओर सजावट के रूप में ‘रोमन’ शैली में बड़े आकार की पत्थर की मूर्तियां बनी हुयी हैं। भवन के बाहरी भाग के पोर्टिको के ऊपर संगमरमर से प्रदेश का राज्य चिन्ह बना हुआ है। भवन के अन्दर अनेक हाल एवं दीर्घायें हैं जो मुख्यत: आगरा और जयप...

Badami caves

चालुक्य कालीन चित्रकला, मूर्तिकला और स्थापत्य कला     चालुक्य शासकों ने बागलकोट के आसपास बादामी, एहोल और pattadakal आदि स्थानों पर 550-750 के मध्य दक्षिण भारत में मंदिरों का निर्माण किया जो अब कर्नाटक  राज्य के  बागलकोट जिले में मालप्रभा नदी के किनारे स्थित है बादामी के चालुक्य के अतरिक्त कल्याणी और बेंगी के चालुक्य शासकों  ने भी दक्षिण भारत पर राज्य किया इस प्रकार चालुक्यों का शासन छठी शताब्दी से शुरू होकर 13वी तक चला चालुक्यों द्वारा किए गए निमार्ण कार्य निम्न प्रकार है nataraj badami cave 1 बादामी की गुफाएं     बादामी गुफा मंदिर कर्नाटक राज्य के बागलकोट जिले में स्थित है जिन्हें प्राचीन समय में वातापी  नाम से भी पुकारा जाता था बादामी गुफा का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से निर्मित चट्टानों से हुआ है बादामी केव में हिंदू, जैन धर्म से संबंधित चित्र एवं मूर्तियां प्राप्त होती हैं जो चालुक्य राजवंश की अमूल्य निधि हैं बादामी गुफाओं की खोज      बादामी के गुफा मंदिरों की खोज प्रसिद्ध कलाविद स्टेला क्रामरिश Stella Kramarisch ने की इसे ...

गुप्त काल के मंदिर

गुप्त काल की वास्तु कला   गुप्त काल को प्राचीन भारत या हिंदू संस्कृति का स्वर्ण युग अथवा क्लासिक युग के नाम से जाना जाता है इस समय सामाजिक आर्थिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से समाज प्रगति पथ पर आगे बढ़ा तथा गुप्तकालीन शक्तिशाली राजाओं ने राजनीतिक स्थिरता प्रदान की इसी के फलस्वरूप अजंता जैसी श्रेष्ठ चित्र शैली का जन्म हुआ जो भारत की अमूल्य धरोहर है    गुप्त काल में मंदिर निर्माण की परंपरा का प्रारंभ हुआ जो आगे चलकर और विकसित होकर समृद्धि हुई कला विद पार्टी ब्राउन ने गुप्त काल की कला की दो विशेषताएं बताई हैं  1 सौंदर्य परख स्वरूप Aesthetic Character 2 संरचनात्मक स्वरूप Structural Character       गुप्त काल की कला इन्हीं प्रवृत्तियों पर केंद्रित रही जो वास्तु चित्र मृदभांड आदि में देखी जा सकती है इसी काल में धर्म एवं कला का अद्भुत समन्वय स्थापित हुआ तथा विदेशी प्रभाव समाप्त होकर देसी शैली पूर्ण रूप से विकसित रूप में दिखाई पड़ती है गुप्त काल के मंदिरों का आरंभिक इतिहास    वैदिक काल में मंदिर खुले प्रांगण में स्थित होते थे जहां पर एक देव मूर्ति ...

Nagar Shaili

नागर शैली की वास्तुकला  नागर शैली मंदिर के अंग                                   नागर शैली नगर से बना है सर्वप्रथम नगर में निर्माण होने के कारण अथवा अधिक संख्या में होने के कारण इसे नागर की संज्ञा दी गई शिल्पशास्त्र के अनुसार नागर मंदिरों के 8 प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं नागर शैली के महत्वपूर्ण अंग 1 मूल अथवा आधार - जिस पर संपूर्ण भवन खड़ा किया जाता है 2 मसूरक - नीव और दीवारों के बीच का भाग 3 जांघ - दीवारों, विशेषता गर्भगृह की दीवारें 4 कपोत - carnish 5 शिखर - मंदिर शीर्ष भाग अथवा गर्भग्रह का ऊपरी भाग 6 ग्रीवा - शिखर का ऊपरी भाग 7 वर्तुलाकर  अमलाक - शिखर के शीर्ष पर कलश के नीचे का भाग 8 कलश - शिखर का शीर्ष भाग        नागर शैली के मंदिर वर्गाकार होते थे इनकी बनावट ऊपर की ओर शिखर जैसी होती थी जो तिरछी छोटी रेखाओं के द्वारा अंदर की ओर युक्ति जाती थी तथा शीर्ष पर आमलक सुशोभित होता था जिसके ऊपर कलश होता था कलश के ऊपर देवता को समर्पित चिन्ह लगाया जाता था     इस...

खजुराहो के मंदिर

खजुराहो के मंदिर समूह    संरक्षण..                   1818 में सर्वप्रथम फ्रैंकलीन नामक अंग्रेज शोधकर्ता ने इन्हें बहुत बड़े जंगल में देखा और खंडहरों के रूप में अपने यात्रा में उल्लेखित किया इससे प्प्रेरणा पाकर अंग्रेज सरकार पीसी बर्ट नामक अंग्रेज इंजीनियर को खजुराहो की पूर्ण जानकारी हेतु भेजा उन्होंने 1838 में से देखा और यहां की मूर्तिकला का उल्लेख है खजुराहो मध्य प्रदेश खजुराहो का मंदिर समूह के रूप में उत्तर भारती नागर शैली शीर्ष बिंदु को प्राप्त हुई यह मंदिर समूह छतरपुर कस्बे से 40 किलोमीटर तथा महोबा से किलोमीटर दूर स्थित खजुराहो के विश्वविख्यात मंदिर समूह उपस्थित है          2 पूर्वी मंदिर समूह.. 1हनुमान मंदिर 2 ब्रम्हा मंदिर 3 वामन व खाखरा मठ 4जावरी मंदिर 5 घंटाई मंदिर 6 जैन मंदिर समूह, पाशर्वनाथ, आदिनाथ, शांतिनाथ मंदिर            खजुराहो के मंदिर नागर शैली के सबसे सुंदर तथा विकसित मंदिर हैं इस सहेली की विशेषता यह है कि ऊंची जगहों पर पर्वतों के सदृश्य उत्तरोत्...