गुलेर चित्र शैली गुलेर शैली, पहाड़ी चित्रकला का एक प्रमुख रूप है, जो हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में विकसित हुई थी। इसे कांगड़ा चित्रकला का शुरुआती चरण माना जाता है। यह शैली अपनी कोमलता, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जानी जाती है। इतिहास स्थापना: गुलेर राज्य की स्थापना 1405 ईस्वी में राजा हरिश्चंद्र ने की थी। विकास: 18वीं शताब्दी के मध्य में, मुगल दरबार में प्रशिक्षित कुछ कलाकार गुलेर के राजा दलीप सिंह (शासनकाल 1695-1741) और बाद में राजा गोवर्धन चंद (शासनकाल 1744-1773) के संरक्षण में आए। इन कलाकारों ने मुग़ल और लोक कला के तत्वों को मिलाकर एक नई शैली को जन्म दिया, जो बाद में गुलेर शैली के रूप में प्रसिद्ध हुई। प्रमुख कलाकार: इस शैली के विकास में पंडित सेउ और उनके पुत्रों नैनसुख और माणकू का महत्वपूर्ण योगदान था। नैनसुख को इस शैली का सबसे प्रसिद्ध कलाकार माना जाता है। प्रभाव: गुलेर शैली ने बाद में विकसित हुई कांगड़ा शैली को काफी प्रभावित किया। विशेषताएँ विषय: गुलेर शैली के चित्रों में नायिका भेद (नायिका के विभिन्न मनोभावों का चित्रण), रामायण और भागवत पुराण जै...
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