सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सितंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गुलेर शैली

गुलेर चित्र शैली  गुलेर शैली, पहाड़ी चित्रकला का एक प्रमुख रूप है, जो हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में विकसित हुई थी। इसे कांगड़ा चित्रकला का शुरुआती चरण माना जाता है। यह शैली अपनी कोमलता, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जानी जाती है।  इतिहास स्थापना: गुलेर राज्य की स्थापना 1405 ईस्वी में राजा हरिश्चंद्र ने की थी। विकास: 18वीं शताब्दी के मध्य में, मुगल दरबार में प्रशिक्षित कुछ कलाकार गुलेर के राजा दलीप सिंह (शासनकाल 1695-1741) और बाद में राजा गोवर्धन चंद (शासनकाल 1744-1773) के संरक्षण में आए। इन कलाकारों ने मुग़ल और लोक कला के तत्वों को मिलाकर एक नई शैली को जन्म दिया, जो बाद में गुलेर शैली के रूप में प्रसिद्ध हुई। प्रमुख कलाकार: इस शैली के विकास में पंडित सेउ और उनके पुत्रों नैनसुख और माणकू का महत्वपूर्ण योगदान था। नैनसुख को इस शैली का सबसे प्रसिद्ध कलाकार माना जाता है। प्रभाव: गुलेर शैली ने बाद में विकसित हुई कांगड़ा शैली को काफी प्रभावित किया।  विशेषताएँ विषय: गुलेर शैली के चित्रों में नायिका भेद (नायिका के विभिन्न मनोभावों का चित्रण), रामायण और भागवत पुराण जै...

माईकल एंजेलो

माईकल एंजेलो की कला यात्रा  माइकल एंजेलो, इटली के पुनर्जागरण काल के एक महान मूर्तिकार, चित्रकार और वास्तुकार थे। उनका पूरा नाम माइकल एंजेलो डि लोदोविको बुओनारोती सिमोनी था। उन्हें पश्चिमी कला के इतिहास में सबसे प्रतिभाशाली और प्रभावशाली कलाकारों में से एक माना जाता है।  मुख्य जानकारी जन्म: 6 मार्च 1475 को फ्लोरेंस, इटली में। निधन: 18 फरवरी 1564 को रोम, इटली में। कला के क्षेत्र: मूर्तिकला, चित्रकला, वास्तुकला और कविता। उपनाम: उनके समकालीन उन्हें "इल डिविनो" (द डिवाइन वन) कहते थे।  प्रसिद्ध कलाकृतियाँ मूर्तियां डेविड: विशाल संगमरमर की यह मूर्ति माइकल एंजेलो की सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है।पिएटा: यह संगमरमर की मूर्ति, जिसमें मैरी की गोद में यीशु का शव है, उनके शुरुआती और प्रसिद्ध कार्यों में से एक है। बैकस: रोमन देवता बैकस की यह मूर्ति उनके रोम प्रवास के दौरान बनाई गई थी।  चित्रकला सिस्टिन चैपल की छत: उन्होंने 1508 और 1512 के बीच वेटिकन शहर में स्थित सिस्टिन चैपल की छत पर अद्भुत भित्तिचित्र बनाए। आदम की रचना: यह सि...

फ्रांसिस्को गोया

फ्रांसिस्को गोया फ्रांसिस्को जोस डे गोया वाई लुसिएंटेस (1746-1828) स्पेन के एक प्रसिद्ध चित्रकार और प्रिंटमेकर थे, जिन्हें 18वीं सदी के अंत और 19वीं सदी की शुरुआत के सबसे महान कलाकारों में से एक माना जाता है। उन्हें आखिरी पुराने मास्टर और पहले आधुनिक कलाकार के रूप में भी जाना जाता है। उनकी कलाकृतियाँ उस दौर के सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल को दर्शाती हैं।  जीवन और करियर प्रारंभिक जीवन: गोया का जन्म 30 मार्च 1746 को स्पेन के आरागॉन में हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र में ही अपनी कला की शिक्षा शुरू कर दी थी। दरबारी चित्रकार: 1789 में, उन्हें स्पेन के राजा चार्ल्स चतुर्थ का दरबारी चित्रकार नियुक्त किया गया, जिससे उनकी कला को काफी प्रसिद्धि मिली। इस दौरान उन्होंने कई शाही और अभिजात वर्ग के लोगों के चित्र बनाए, जो चापलूसी से रहित और बहुत ही यथार्थवादी थे। कला शैली: गोया की कला में नवशास्त्रीयवाद और स्वच्छंदतावाद (रोमांटिसिज़्म) दोनों का प्रभाव दिखता है, यही कारण है कि उन्हें 'स्पेन का संधि कलाकार' कहा जाता है। उनकी कला में सामाजिक व्यंग्य, युद्ध की क्रूरता, और मानवीय पीड़ा का गहरा चित्रण ...

भारतीय कला के हस्ताक्षर

भारतीय कला के हस्ताक्षर' पुस्तक के लेखक हैं? 1 ज्योतिष जोशी  2 आनन्द कृष्ण 3 सुनीत चोपड़ा   4 राय कृष्ण दास उत्तर 1 ज्योतिष जोशी    स्पष्टीकरण   भारतीय कला के हस्ताक्षर" (Signatures of Modern Indian Art) शीर्षक वाली पुस्तक डॉ. ज्योतिष जोशी द्वारा लिखी गई है, और यह आधुनिक भारतीय कला के विकास और इसमें योगदान देने वाले चौदह अग्रणी कलाकारों का मूल्यांकन करती है। यह पुस्तक हिंदी में प्रकाशित है और इसमें कलाकारों की विधियों, तकनीकों और विषय-वस्तु के साथ-साथ तत्कालीन सामाजिक और वैचारिक पृष्ठभूमि का भी विश्लेषण किया गया है।  पुस्तक के मुख्य बिंदु: विषय: पुस्तक आधुनिक भारतीय कला के महत्वपूर्ण चित्रकारों और उनके कार्यों का विश्लेषण करती है।  लेखक: डॉ. ज्योतिष जोशी, जो दिल्ली स्थित एक कला समीक्षक, लेखक और स्तंभकार हैं।  भाषा: पुस्तक हिंदी में उपलब्ध है।  प्रकाशन: इसका प्रकाशन भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा किया गया है।  उद्देश्य: आधुनिक भारतीय कला को एक पहेली न बनाकर, कला-आलोचना को समृद्ध करना और आम पाठकों तक पहुँचाना है।  यह पुस्तक ...

एक्रेलिक रंग का विकास

एक्रेलिक रंग का विकास एक्रेलिक रंग की खोज लैटिन अमेरिकी कलाकारों के एक समूह द्वारा 1930 के दशक में की गई थी, जिन्होंने जल्दी सूखने वाले और टिकाऊ रंगों की आवश्यकता महसूस की थी, खासकर बाहरी भित्तिचित्रों के लिए। ये रंग ऐक्रेलिक पॉलीमर के पानी-आधारित मिश्रण से बनते हैं, जो सूखने पर पानी प्रतिरोधी बन जाते हैं और विभिन्न प्रकार की सतहों पर उपयोग किए जा सकते हैं, जैसे कि कैनवास, दीवारें और कपड़े।    आरंभ : ऐक्रेलिक पेंट 1930 के दशक में विकसित किए गए थे, जो उन कलाकारों की ज़रूरत को पूरा करते थे जो ऐसे रंगों की तलाश में थे जो तेल रंगों के सूखने के समय की तुलना में जल्दी सूखें और टिकाऊ हों। मुख्य निर्माता : 1956 में, जोस एल. गुटिएरेज़ ने मेक्सिको में पोलिटेक ऐक्रेलिक आर्टिस्ट्स कलर्स का उत्पादन किया, और परमानेंट पिगमेंट्स ने लिक्विटेक्स रंगों का उत्पादन किया, जो पहले आधुनिक ऐक्रेलिक इमल्शन कलाकार पेंट थे। एक्रेलिक रंग के गुण और उपयोग बहुमुखी प्रतिभा: ऐक्रेलिक पेंट बहुत बहुमुखी होते हैं, जिन्हें पतली परतों या मोटी इम्पैस्टो तकनीकों में लगाया जा सकता है।  स्थायित्व: एक बार सूख जाने ...

पशुपति शिव

पशुपति शिव (Shiva Pashupati)  सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त पशुपति की शिव मुहर, एक प्रसिद्ध कलाकृति है जो मोहनजोदड़ो नामक स्थल से प्राप्त हुई है। इस मुहर पर मुख्य आकृति के दाई ओर भैंस और गैंडा तथा बाई ओर हाथी और बाघ है नीचे की तरफ हिरण बनाए गए हैं इस मुहर की मुख्य आकृति तीन सींगों वाला मुकुट पहने एक देवता की है, जो योग मुद्रा में पलथी मार कर बैठा है इस आकृति को विद्वानों ने शिव का आदिम रूप माना है। पाशुपत शिव से जुड़े हुए अन्य महत्वपूर्ण बिंदु  खोज पशुपतिनाथ सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो पुरातात्विक स्थल से मिली है  आकृति इसमें तीन सिंगों वाले मुकुट पहने देवता की हैं योग मुद्रा में बैठे हैं। देवता के बाई ओर हाथी बाघ और दाई ओर बैल गैंडा तथा नीचे की तरफ हिरण बनाए गए हैं।  इस मुहर का संबंध पशुपति अर्थात हिंदू देवता भगवान शिव से संबंध स्थापित किया जाता है। संरक्षण यह मुहर वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय ने दिल्ली में रखी हुई है। निर्माण सामग्री सेलखड़ी पत्थर  माप 3.56 सेमी ऊंची, 3.53 सेमी लंबी, 0.76 सेमी चौड़ी 

jatin das

जतिन दास, समकालीन कलाकार जतिन दास का जन्म उड़ीसा के मयूरभंज में 1941 हुआ था।   प्रो एस बी पलसीकर के मार्गदर्शन में जे जे स्कूल आफ आर्ट मुंबई से अध्ययन किया। जतिन दास एक चित्रकार, कवि, मूर्तिकार, भित्ति चित्र चित्रकार, प्रिंटमेकर, शिक्षक एवं सांस्कृतिक विशेषज्ञ के तौर पर जाने जाते हैं। जतिन दास ने जे डी सेंटर आफ आर्ट की स्थापना की। भारतीय कविता समिति नई दिल्ली के सदस्य है। जतिन दास ने डाक विभाग के लिए कई डाक टिकट का डिजाइन तैयार किया।  प्रिंट मेकर के रूप में जिन्होंने वुडकट, सेरीग्राफ, लिथोग्राफ आदि माध्यमों में कार्य किया है। पुरस्कार  जतिन दास की उपलब्धियां को देखते हुए देश के राष्ट्रपति द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद भूषण से सम्मानित किया गया। रविंद्र भारती विश्वविद्यालय द्वारा डि.लीट की उपाधि संबंधित किया गया। राष्ट्रीय पुरस्कार 1976  उड़ीसा राज्य अकादमी पुरस्कार 1971  साहित्य अकादमी पुरस्कार 2000  संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1998  उड़ीसा राज्य सरकार द्वारा लाइव टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2005  चित्र श्रृंखला    पलायन (Excodus...