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मार्च, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

lokkala

लोक चित्रकला (Folk Art Painting )  छत्तीसगढ़ के संदर्भ में लोक कला का अर्थ जन सामान्य की कला को लोक कला के नाम से जाना जाता है यह बिना किसी जटिल प्रक्रिया के निर्मित की जाती है अगर हम दूसरे शब्दों में कहें तो मानव द्वारा आसपास की उपलब्धि सामग्री का प्रयोगकर कर निर्मित किए जाने वाले चित्रों को भी लोककला की संज्ञा दी जाती है लोककला कलाकार कहीं पर जाकर अध्ययन नहीं करता बल्कि अपनी परंपरा और पीढ़ियों से ही यह संरक्षित और हस्तांतरित होती रहती है lok kal evam janjatiy kala evam sanskrati santhan up छत्तीसगढ़ में लोक कला कलाओं की दृष्टि से छत्तीसगढ़ काफी समृद्ध राज्य रहा है यहां के आदिवासी समाज में कलाओं का अद्भुत संसार दिखाई पड़ता है जो हमें आज ही आकर्षित और आनंदित करता रहता है चाहे आदिवासी समाज हो या कोई अन्य सभी में लोक कलाएं अवश्य दिखाई देती हैं यह अपने परंपराओं और संस्कारों से पोषित होती रहती हैं Lok kala अपने स्वरूप में विशेष तौर पर पर्व त्यौहार एवं किसी महत्वपूर्ण अवसर पर ही दिखाई पड़ती है यह अक्सर महिलाओं के द्वारा पोषित की जाती है कभी-कभी पुरुष बीच में शक्ति भाग लेते ह...

dancing girl

Dancing girl सिंधु सभ्यता की मूर्तियों में प्रयुक्त सामग्री मोहनजोदड़ो से प्राप्त मूर्ति शिल्प मुख्य रूप से तीन प्रकार की सामग्री से बनी हैं  मिट्टी  पत्थर  धातु    धातु से बनाई गई मूर्तियों में नृत्य करती महिला सबसे अधिक प्रसिद्ध है यह मूर्ति सिंधु सभ्यता के मोहनजोदड़ो नामक स्थल से प्राप्त हुई है Dancing girl की कलात्मक विषेताएं डांसिंग गर्ल अपनी बनावट और आकार के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है यह एक दुबली पतली लड़की के रूप में दर्शाई गई है जिसके पैर नहीं है सिर पीछे की तरफ टेढ़ा है बालों को दाएं कंधे पर जुड़े के रूप में बांधा गया है गले में चार लड़ियों वाला हार पहने हुए हैं एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि दोनों हाथों में चूड़ियां समान नहीं है बाएं हाथ में 24 दाएं हाथ में चार चूड़ियां हैं Dancing girl आकृति नग्न अवस्था में अंकित है बाया पैर मुड़ा हुआ है जिस पर बाया हाथ टिका हुआ है दाया हाथ कमर पर स्थित है मूर्ति में हाथों की लंबाई सामान्य से अधिक है यह हड़प्पा काल की मूर्तियों में देखी जाने वाली प्रमुख विशेषता रही है मूर्ति तत्कालीन उन्नत ढलाई पद्धति को भी दर्शाती ह...

कला का अर्थ एवं परिभाषा

कला की परिभाषा (Definition of Art ) अंतः करण में चल रहे विचारों का प्रगट रूप ही कला है समय-समय पर विद्वानों ने इस को परिभाषित करने के अलग अलग प्रयास किए हैं परंतु अभी तक कोई सर्वमान्य परिभाषा निश्चित नहीं हो पाई है फिर भी सारे विद्वान कला में कौशल को मानते हैं इसीलिए कहते हैं जहां जो कार्य कौशल पूर्वक किया जाए वह कला है बहुत से विद्वानों की कला के विषय में अलग-अलग धारणा है है जो इस प्रकार है पाश्चात्य विद्वानों की कला परिभाषा प्लेटो (Plato, 427 - 347 ई.पू.) – कला सत्य की अनुकृति की अनुकृति है। अरस्तू (Aristotle, 384 322 ई.पू.) – कला अनुकरण है। गेटे (Goethe, 1749 - 1832 ई.) – महान सत्य की प्रतिकृति प्रस्तुत करना ही कला की सबसे बड़ी समस्या है। कला प्रकृति की बौद्धिक परख है। क्रोचे (Croce, 1866-1952 ई.) कला प्रभावों की अभिव्यक्ति है। हीगेल (Hegel, 1770-1831 ई.) –कला अधिभौतिक सत्ता को व्यक्त करने का माध्यम है। टालस्टाय (Tolstoy, 18281910 ई.)–कला भावों का सम्प्रेषण है। रस्किन (John Ruskin, 18191900 ई.)–कला आह्लाद की अभिव्यक्ति है। शेली (Shelly, 1792 - 1822)–कला कल्पना की अभिव्यक्ति है। प्लाट...

पेस्टल रंग माध्यम एवं तकनीक

पेस्टल कलर माध्यम और तकनीक पेस्टल (Pastal Colour)  पेस्टल आज सर्वसाधारण में प्रचलित माध्यम है। यह सर्वशुद्ध और साधारण चित्रण माध्यम है। प्रायः बच्चों को इस विधि से चित्रण का अभ्यास कराया जाता है। किन्तु सिद्धहस्त चित्रकार भी इसका प्रयोग करते हैं। चित्र रचना करते समय रंगों में किसी प्रकार का द्रव माध्यम मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है। अतः इसे शुष्क माध्यम की श्रेणी में रखते हैं। रंगों के मिश्रण में विविधता की दृष्टि से इसमें सीमित बल ही उत्पन्न हो पाते हैं। रंग का प्रायः कागज पर से झड़ने का ख़तरा बना रहता है इसलिए फिक्सेटिव का प्रयोग करते हैं। जो स्प्रे करके पेस्टल द्वारा रचित कृति पर लगाते हैं, पेस्टल का दोष यही है कि इसका रख-रखाव बहुत कठिन है। रंगत की सीमित तान कल्पना और स्वतंत्रता को भी सीमित कर देती है। यदि श्रेष्ठ कागज और पूर्ण स्थायी रंगतों का प्रयोग करें तो यह चित्रण का सर्वाधिक स्थायी माध्यम है। चित्रभूमि (Surface)— पेस्टल के लिए खुरदुरेपन की विभिन्न श्रेणियों में तैयार कागज बाज़ार में उपलब्ध हैं। इस कागज के रोयें (Grains) इस प्रकार के होने चाहिए जो पेस्टल की बत्ती (Pastol C...