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जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Padam puraskar 2022

Padma Awards MINISTRY OF HOME AFFAIRS PRESS NOTE North Block, New Delhi-1 Dated the 25th January, 2022 Padma Awards   - one of the highest civilian Awards of the country, are conferred in  three categories, namely, Padma Vibhushan, Padma Bhushan and Padma Shri. The Awards  are given in various disciplines/ fields of activities, viz.- art, social work, public affairs,  science and engineering, trade and industry, medicine, literature and education, sports, civil  service, etc. ‘Padma Vibhushan’ is awarded for exceptional and distinguished service;  ‘Padma Bhushan’ for distinguished service of high order and ‘Padma Shri’ for distinguished  service in any field. The awards are announced on the occasion of Republic Day every year. 2. These awards are conferred by the President of India at ceremonial functions which  are held at Rashtrapati Bhawan usually around March/ April every year. This year the  President has approved conferment of 128 Padma...

Tgt pgt art paper 27

TGT PGT kala practice set 27 TGT,PGT, NET  By avneet Kumar    1 "घायल सुअर तथा गैंडे का आखेट "चित्र कहां से मिला है होशंगाबाद सिघनपुर मिर्ज़ापुर भीमबेटका 2 स्वास्तिक ,सुर्य ,चक्र वा चौखटे के चिन्ह  किस गुफा से प्राप्त है 1 पंचमढ़ी 2 मंदसौर 3 बेल्लारी 4 बाइनार्ड एडकल 3 भीमबेटका को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया 1 1883 2 1983  3 2003  4 2004 Q4 पहाड़गढ़ किस नदी के किनारे 1 नर्मदा नदी 2 सोन नदी 3 असान नदी 4 बेतवा नदी Q5 कोटाडीजी खोज किसने की 1यज्ञ दत्त शर्मा 2 आर‌•एस• विष्ट 3 फजल अहमद  4 ए• घोष 6 चित्रसूत्र में कितने प्रकार के चित्र बताए गए हैं 1 3 2 4 3 5 4 9 Q7 विनयपिटक का चीनी भाषा में अनुवाद किसने किया 1 राजीव कुमार 2 कुमार जीव 3 ए के स्वामी Q8 अनुशासन की टोकरी किसे कहा जाता है  1 सूत्र पिटक  2 अभिध्ममपिटक  3 विनय पिटक 4  चरियापिटक Q9 "नेचुरल हिस्ट्री पुस्तक" किसकी 1 टा़लमी 2 इब्नबतूता 3 प्लिनी 4 टेसियस Q10 "बाजारकेव"में किसका विशालकाय चित्र है 1 बारहसिंगा  2 कुत्ता 3 हिरन 4bबकरी 11 बेल्लारी (कर्नाटक) के क्षेत्र है 1 उपगल्लू ...

kala ka samany parichay

कला कला मानव की सहज अभिव्यक्ति है । कला हमारे विचारों का एक दृश्य रूप है। है हमारी कल्पना शक्ति, सृजन शक्ति से युक्त है। यह सृजनशक्ति व्यक्ति में अपनी विशेष मनोभावनायें संवेदनायें विचार पद्धति होने के कारण होती है। कला के माध्यम से नई-नई सम्भावनायें जन्म लेती है, सभ्यता एवं संस्कृति का कास होता है। और कला का नया रूप समाने आता है तथा नये मापदण्ड थापित होते हैं। गैतिहासिक काल से लेकर वर्तमान में प्रयोगधर्मी कला तक का सफर मानव अपने अनुभवों और भावों को व्यक्त करते हुए पूर्ण किया है । मानव ने अपनी दिनचर्या में कला की तमाम विधाओं के माध्यम से अपनी उन्नति स्पष्टता से दिखाई देती  है। आज मानव कला के विभिन्न रूपों को अपनाते हुए, सौन्दर्य और भावों को व्यक्त करने में सहज है इन सम्भावनाओं को देखते हुए भविष्य में कलाओं के माध्यम से सौन्दर्य के उच्च स्तरों को हम प्राप्त कर सकते हैं। ललित कलाओं को पाँच भागों में बाँटा जा सकता है-  चित्रकला,  मूर्तिकला,  स्थापत्य कला ,  संगीत एवं  काव्य।  जहाँ हम चित्रकला में द्विआयामी प्रभाव में अपने भावों को व्यक्त करते है वही मूर्...

Devi Prasad Rai Chaudhary

कला किसी के बाप की बपौती नहीं है  देवी प्रसाद राय चौधरी  भारतीय कला के इतिहास में कुछ ऐसे कलाकारों से हमारा परिचय होता है जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को अपने सृजन में महत्वपूर्ण विषय के रूप में अंकित किया है देवी प्रसाद राय चौधरी के मूर्ति शिल्प अपनी सजीवता के लिए प्रसिद्ध रहे हैं जिन्हें देखने पर एक क्षण आभास होता है कि इतिहास ठहर सा गया है नंदलाल बसु, यामिनी राय जैसे कलाकार गांधीजी के आदर्शवादी जीवन से काफी ज्यादा प्रेरित थे आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विचारों तथा संघर्षों की प्रतिध्वनि देवी राय प्रसाद के मूर्तिशिल्प और शहीद स्मारकों में मिलती है भ्रमण को मंदिर में हरिजन प्रवेश की उद्घोषणा, अंतिम प्रहार भूख पीड़ित श्रम की विजय अधिकांश मूर्ति शिल्प इसका प्रमाण है देवी प्रसाद राय चौधरी की मूर्ति शिल्प में सुरेंद्रनाथ बनर्जी महात्मा गांधी और मोतीलाल नेहरू की प्रतिमा या साधारण सी लगती है महात्मा गांधी की प्रतिमा था कि दुबली पतली आकृति वाली दिखाई पड़ती है परंतु गांधी जी की इस प्रतिमा में आत्मबल को प्रतीकात्मक रूप में दिखाया गया है ज...

Vinod Bihari mukharji

विनोद बिहारी मुखर्जी अंधापन बहुत जटिल होता है सत्यजीत राय प्रसिद्ध कलाकार विनोद बिहारी मुखर्जी का जन्म 7 फरवरी  1904 बेहला कोलकाता में हुआ था 1919 ईस्वी में शांतिनिकेतन बीरभूम पश्चिम बंगाल में प्रवेश लिया यहीं पर इन्हें नंदलाल बोस जैसे योग्य कला शिक्षक प्राप्त हुए तथा अध्ययन के पश्चात यहीं पर कला शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए जन्म 1904 बेहला मृत्यु  1980 फिल्म  इनर आई पुस्तक  चित्रकर विनोद बिहारी मुखर्जी अपने गुरु नंदलाल बोस के टच वर्क से विशेष रूप से प्रभावित थे अतः  वैसे ही चित्रण करते हुए चित्र को पूर्ण करना चाहते थे शांतिनिकेतन में उनकी रुचि चित्रण के अपेक्षा भित्ति चित्रण में अधिक दिखाई देती है अतः वह भित्ति चित्रकार के रूप में भी विशेष प्रसिद्ध हुए हैं बंगाल शैली की भावुकता तथा साहित्यिक विषयों की अपेक्षा चित्रात्मक तत्वों जैसे हल्के रंगों, गतिपूर्ण रेखांकन तथा टेक्चर आदि को अपने चित्रों में अधिक महत्व दिया है जयाप्पास्वामी ने इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए इन्हें भारतीय कला का सेतु बंध कहा है इनके चित्रों का मुख्य विषय दैनिक जीवन तथा बीरभूम के निवासी र...