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मार्च, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

tgt pgt art test paper 13

T G T। PGT art paper By ,avneet kumar  1 सिएना की चित्रकला का पिता कहा जाता है A ज्योतो B दूच्चियो C मैसाच्चियो D पाउलो उच्चेलो 2 किस प्रागैतिहासिक" क्षेत्र में हांथी का अंकन हुआ है A भीमबेटका  B होशंगाबाद C सिंघनपुर D पंचमढ़ी 3 गांधार कला भारत के किस भाग में पनपी A उत्तर- दक्षिण  B उत्तर-पश्चिम C पश्चिम-पूर्व D पूर्व 4 भित्ति चित्रों की परंपरा किस युग से रही है A मध्य युग  B पषान युग C आदिम युग D ऐतिहासिक युग  5 डिजनी जनक है A वीडियो फिल्मिंग के B ब्लॉक मेकिंग के C एनिमेशन प्रक्रिया के D स्टील फोटोग्राफी के 6 "बाटिक में क्रेक ज्यादा लाने के लिए कौन सा वैक्स अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाता है A बीज वैक्स B प्यूनिक वैक्स C फिक्सेटिव वैक्स D पैराफिन 7 "किस लैण्डस्केप चित्रकार से प्रभाववादीयों से प्रेरणा ली थी A टर्नर B कांस्टेबल C मिले C गोया  8"भारत में फाववादी कला के प्रणेता थे। A रणवीर सिंह विष्ट B शैलोज मुखर्जी C कृष्ण रेड्डी D रामकिंकर बैज 9 "कुदरत सिंह" कीस कला के लिए प्रसिध्द है A मीनाकारी B कार्टून  C मूर्तिकारी  D सभी  10 "उदात्त...

Somalal shah

सोमालाल शाह         सोमालाल शाह का जन्म 14 फरवरी 1905 कपवड़ज गुजरात में हुआ स र जे जे स्कूल ऑफ आर्ट मुंबई से कला शिक्षा प्राप्त की कुछ समय के लिए बड़ौदा के कला भवन में प्रवेश किया तत्पश्चात् इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरियंटल  में कला की बारीकियां सीखी यहां अवीन्द्रनाथ ठाकुर और उनके प्रमुख शिष्य का प्रभाव भी सोमालाल शाह के चित्रण कार्य पर पड़ा           सोमालाल शाह ने आरंभिक समय में तेल पद्धति में चित्र बनाना प्रारंभ किया परंतु बंगाल शैली के कलाकारों के संपर्क में आने के बाद शैली में व्यापक परिवर्तन दिखाई दिया सोमालाल शाह ने भारतीय विषय को अधिकतर यूरोपीय शैली में अंकित किया है चित्रों में हल्का वास प्रयोग किया है इनकी रंग योजना शांतिपूर्ण सरल सुरम्य है यही सरलता सुरम्यता एवं मीठापन इनकी शैली की प्रमुख विशेषता है जीवन के प्रेरक पक्षों, रम्य प्रसंगों एवं भाव युक्त चित्रों का सृजन किया है  सोमालाल शाह के जीवन में निर्णायक प्रभाव कोलकाता में पढ़ा जहां पर इनके अंतःकरण के अनुकूल वातावरण मिला देश की समृद्ध कला परंपरा को देखने समझने का दृष्टि...

Sarada Charan Ukil

शारदा चरण उकील       दिल्ली की आधुनिक चित्रकला को निश्चित दिशा देने वाले कलाकारों में को शारदा चरण उकील का नाम काफी सम्मान के साथ लिया जाता है अपनी आरंभिक शिक्षा बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट से कला में पूर्ण की वहां पर कला गुरु अवींद्रनाथ से विशेष कला शिक्षा प्राप्त की शारदा बाबू ने अपने गुरु से कला की बारीकियां सीखी तथा वास शैली का भी  विशेष अध्ययन किया और अवींद्रनाथ ठाकुर कभी भी किसी शिष्य को विषयवस्तु के चुनाव और शैली के प्रयोग को लेकर किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं करते थे गुरु का यही स्वतंत्र स्वभाव शारदा चरण के व्यक्तित्व के विकास में सहायक रहा जन्म       14 नवम्बर 1888 विक्रमपुर ढाका बांग्लादेश मृत्यु        21 जुलाई 1940 दिल्ली शिक्षा     बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट गुरु         अवींद्र नाथ टैगोर पुरुस्का र 1930 - 31 वायरसराय गोल्ड कप, 1940 ऑल इंडिया फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट सोसायटी नई दिल्ली शिक्षक     1912-17 गैरीपुर असम,1918 दिल्ली आर्ट कॉलेज, 1926 सारदा उकील ऑफ आर्ट दिल्ली पत्रिका ...

tgt pgt art test paper 12

tgt artTest pepr By, avneet kumar 1 कला शब्द का प्रयोग किया जाता है A दृश्य कला हेतु B चित्रकला हेतु C रचना कला हेतु  D श्रव्य कला हेतु  2 रागरागिनीयो की श्रृंखला चित्रित करने वाले चित्रकार हैं A रामगोपाल विजयवर्गीय B मुकुंद चंदे C सत्यजीत रे D यामिनी राय 3 महाराष्ट्र क्षेत्र की सबसे प्राचीन गुफा मानी जाती है A भांजा B कार्ले  C कन्हेरी  D जूनागढ़  4 वीणावादिनी" चित्र के चित्रकार हैं  A राजा रवि वर्मा B नंदलालबसु C असित कुमार हालदर  D अवनींद्र नाथ टैगोर 5 1934 ई० मे काँसे से निर्मित "जयहिंद" किसकी कृति है A प्रदोष दास गुप्ता B निरोध मजूमदार C सोमनाथ D अमरनाथ सहगल  6 नियामतनामा पुस्तक आधारित है  A अर्थशास्त्र पर B पाकशास्त्र पर C धार्मिक D ऐतिहासिक  7 ललित कला मोनोग्राम के मुख्य पृष्ठ पर छापा सूर्यमुखी फूल के चित्रकार हैं A बेंद्रे B सुजा C नंदलालबसु D रजा 8 काले ग्रेनाइट से बने मूर्ति शिल्प "हॉर्स" के मूर्तिकार हैं A सतीश गुजराल B पी वी जानकीराम C सोमनाथ होर  D धनराज भगत 9 लाल चित्रकला कक्ष" चित्र के चित्रकार हैं A मातिस B पिकासो...

Ravi Shankar Raval

   रवि शंकर रावल 1892-1977 A bridge between Gujrat and the Revivalist movement by Esther David          भारतीय चित्रकला के इतिहास में रविशंकर रावल उन कलाकारों की श्रेणी में आते हैं जो बंगाल स्कूल से इतर अपनी कला शैली का विकास कर सकें रविशंकर रावल पत्रकार, चित्रकार, कलासमीक्षा भी  थे Esther David ने रविशंकर रावल को बंगाल शैली और गुजरात कला के मध्य का सेतु मानते हैं  कलासमीक्षा की बारीकियां ई वी हैवेल से सीखी रविशंकर रावल का जन्म 1892 में भावनगर गुजरात में हुआ था इनके पिता इन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे परंतु रावल की बचपन से रुचि चित्रकला में थी अपने सपनों को साकार करने के लिए रविशंकर रावल ने जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में प्रवेश लिया अकादमिक शैली में कार्य करने लगे तथा स्वयं को कला जगत में स्थापित किया आजीवन कला की सेवा करते हुए इस कलाकार का 1977 मे निधन हो गया   रविशंकर रावल रावण ने आरंभिक दौर में  तेल रंग पद्धति में महापुरुषों के व्यक्ति चित्र बनाना प्रारंभ किया धीरे-धीरे इन्होंने भारतीय कला का अध्यन किया और अपनी स्वतंत्र शैली का वि...