अपभ्रंश शैली apbhransh Shaili 8 वीं शताब्दी से लेकर सांस्कृतिक पुनरुत्थान के पूर्व 16वीं शताब्दी तक की चित्रकला मध्यकालीन चित्रकला के नाम से जानी जाती है किंतु मध्यकाल को दो भागों में विभाजित करने के बाद उत्तर मध्यकालीन चित्र शैली के नामकरण को लेकर विद्वानों में काफी मतभेद रहा है कुछ विद्वान जै न शैली गुजराती शैली पुस्तक शैली पश्चिमी भारती शैली एवं सुलिपी शैली आदि नामों से पुकारा है क्योंकि मध्यकाल में प्राप्त प्रारंभिक तथा अधिकांश चित्र जैन धर्म से संबंधित थे अतः इस कारण से कुछ विद्वानों ने इसे जैन शैली का नाम दिया किंतु गुजरात के विभिन्न केंद्रों से मिले अधिकांश चित्र हिंदू धर्म के पौराणिक ग्रंथों तथा तत्कालीन साहित्य ग्रंथों से संबंधित हैं अतः मध्य काल में विकसित कला शैली को श्री एन सी मेहता ने गुजरात शैली कहा किंतु कुछ समय पश्चात गुजरात के अतिरिक्त मालवा राजस्थान के अनेक केंद्रों से भी इस शैली के चित्र प्राप्त हुए अतः इसे डॉ आनंद कुमार स्वामी ने पश्चिमी भारतीय शैली वाला का नाम...
History of fine art, Indian and western art, painting, sculpture, graphics art, architecture, advertising art and typography. tgt pgt kala