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अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संयोजन के सिद्धांत

संयोजन के सिद्धांत principles of composition       दो या दो से अधिक तत्वों मैं सामंजस्य स्थापित कर मधुर योजना का निर्माण करना ही संयोजन है जिसमें से एक तत्व की प्रधानता रहती है वैसे तो चित्रकला में रेखा रंग रूप तान पोत अंतराल आदि तत्व को संयोजित कर कलाकार सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करता है यह कलाकार के प्रयोग और अनुभव पर ही निर्भर करता है कि वह इन तत्वों का किस प्रकार प्रयोग करता है हो सकता है एक कलाकार में किसी तत्व की प्रधानता हो दूसरे कलाकार में किसी तत्व की प्रधानता हो कलाकार रेखा के प्रयोग से चित्रतल को कई भागों में विभक्त कर संयोजन का भावी स्वरूप देता है एक अध्ययनरत विद्यार्थी के लिए यह प्रयोग का विषय है वह जितना कला के तत्वों को चित्र फलक पर परस्पर रखकर अनुभव प्राप्त करेगा उसका संयोजन उतना ही सुखद और सरल होगा फिर भी यह विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता है कि उसका संयोजन दूसरों को सही ही लगेगा यह तो व्यक्तिगत अनुभव और सामर्थ्य की बात है      आगे बढ़ने से पहले इतना स्पष्ट करना आवश्यक है संयोजन व्यक्तिगत रूचि पर निर्भर करता है जो कलाकार की प्र...

अंतराल का अर्थ एवं परिभाषा

अंतराल space अंतराल चित्रकला का सबसे महत्वपूर्ण तत्व इसके बिना चित्र रचना संभव नहीं है अंतराल या स्पेस अथवा धरातल ही वह कार्यक्षेत्र होता है जहां पर कलाकार अपने चित्र का निर्माण करता है जो द्विआयामी होता है कलाकार इस पर विविध तत्वों तथा चित्र सामग्री की सहायता से त्रिआयामी प्रभाव उत्पन्न करता है प्राचीन भारतीय शिल्पशास्त्रों में भी अन्तराल को विभिन्न नामों से जाना गया है जैसे स मरागण सूत्रधार में भूमि बंधन , विष्णुधर्मोत्तर पुराण में स्थान, अभिलाषी चिंतामन में स्थान निरुपण आदि नामों से जाना गया है अंतराल की परिभाषा definition of space      कलाकार जिस भूमि पर चित्रण कार्य करता है वह अंतराल का लाती है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि वह स्थान जो चित्र निर्माण के रूप में प्रयोग में लाया जाता है वह अंतराल कहलाता है जैसे कागज लकड़ी दीवाल आदि। अंतराल का महत्व importance on space     अंतराल वह स्थान है जिस पर कलाकार अपनी कल्पना को मूर्त रूप प्रदान करता है इसके अभाव में वह चित्र को नहीं गढ़ सकता एक कलाकार के लिए अंतराल के महत्व को जानना और समझना दोनों ही महत्वपूर्ण...

Meaning of texture and definition

पोत का अर्थ Meaning of texture                पोत का अर्थ धरातल की बनावट से होता है इस संसार में बहुत सी वस्तुएं पाई जाती है जिनकी सतह का निर्माण भिन्न भिन्न प्रकार का होता है तथा देखने में भी पृथक प्रकार का सुखद अनुभव होता है प्रकृति के साथ-साथ मानव निर्मित विभिन्न प्रकार की वस्तुओं में भी बहुत अलग अलग निर्मित होता है जैसे पत्थर लकड़ी फूल फल आदि पोत की परिभाषा definition of texture            किसी वस्तु की सतह या धरातल के गुण को ही पोत कहते हैं दूसरे शब्दों में सतह के गुण को ही पोत कहते हैं पाल क्ली पोत पर अपने विचार रखते हुए कहा हर पदार्थ के अपने गुण होते हैं अब जैसे पत्थर है वह कठोर है सो वह नर्म मांस जैसा नहीं दिखाया जाना चाहिए हर विचार के लिए उसके अनुकूल एक पदार्थजन्य आकार होता है कलाकार जिस धरातल का प्रयोग करता है उस धरातल का भी अपना एक स्वभाव होता है वह अपनी रुचि के अनुसार तथा विषय के अनुसार चयन करता है जैसे हल्का खुरदुरा खुरदुरा दानेदार अन्य कई प्रकार के धरातल कलाकार प्रयोग में लाता है कलाकार च...

कला में तान का उपयोग एवं महत्व

    चित्रकला के तत्वों में तान तान का अर्थ Meaning of Tone           तान कलाकार के वर्ण चातुर्य को अर्थवान बनाती है रंगत के गहरे या हल्के स्वरूप को तान या टोन कहा जाता है जैसे-जैसे प्रकाश की तरफ हम बढ़ते हैं वैसे वैसे तान परिवर्तित होती रहती है और जैसे ही हम प्रकाश से अंधकार की तरफ बढ़ते हैं वैसे ही रंग के तान में अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ने लगता है तान की परिभाषा definition of tone      तान किसी रंग के हल्के या गहरे पन तान या टोन कहा जाता है तान का वर्गीकरण classification of tone         मुख्य रूप से तान को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है 1 छाया dark tone         जब कलाकार  रंग की मिडिल टोन से डार्क टोन की तरफ कार्य करता है तो यह टोन प्राप्त होती है स्थान को प्राप्त करने के लिए ब्लैक कलर मिलाया जाता है 2 मध्यम middle tone          जब कलाकार छाया और प्रकाश के मध्य की रंगत का प्रयोग करता है तो यह तान दिखाई पड़ती है अन्...

चित्रकला में रूप और उसका महत्व

रूप From            कलाकार जैसे ही चित्र भूमि पर अंकन प्रारंभ करता है रूप का निर्माण प्रारंभ हो जाता है जो भावी कलाकृति को अर्थ प्रदान करता है साथ ही अपने साथ विभिन्न प्रकार की समस्याएं भी लाता है जैसे ताल विभाजन रूप का प्रभाव आदि कलाकार जब चित्र भूमि पर रूप का निर्माण करता है तो चित्र दो भागों में विभक्त हो जाता है एक सक्रिय आकार (active From ) दूसरा सहायक आकार (negative From) सक्रिय आकार (active or positive or committed From) चित्र तल (space) वह सब्जेक्ट को सक्रिय होकर सहयोग प्रदान करता है वह सक्रिय कार कहलाता है जैसे अजंता का मरणासन्न राजकुमारी चित्र दूसरा सहायक आकार (negative and committed From) सहायक आकार वह  तल (space)  होता है जो मौन होते हुए भी विषयवस्तु को अर्थ प्रदान करता है             एक कलाकृति में सक्रिय और सहायक दोनों तारों का अत्यधिक महत्त्व है यह क्रिया परस्पर अनुभव के द्वारा और विकसित होती जाती है दोनों के परस्पर तालमेल से कलाकृति को और अर्थ मान बनाया जाता है इन दोनों के समुचित इस्तेमाल से कला सिद...

TGT PGT ART TEST PAPER

1. भारत में चांदी का प्राचीनतम साक्ष्य मिला  1   वैदिक काल                      2 सिंधु सभ्यता  3    ताम्र पाषाण संस्कृति         4 उत्तर वैदिक काल 2. चित्रकला का प्रादुर्भाव किस पर हुआ 1 पत्थर      2 लकड़ी     3  धातु       4 पेपर 3. तूलिका का प्रथम प्रयोग किस काल में हुआ 1 प्रिमेटिव  2 वैदिक    3 इजिप्ट  4 सुमेरिया 4. चित्रकला का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है  1 रंग     2 धरातल      3 रूप      4 रेखा 5. संगीत विषय पर आधारित चित्र किस गुफा में हुआ है 1 पंचमढ़ी  2 भीमबेटका  3 सिंघनपुर 4 होशंगाबाद 6. Tree lover चित्र है 1 विनोद बिहारी मुखर्जी  2 सलोज मुखर्जी 3 मृणाली मुखर्जी।        4 मीरा मुखर्जी 7. रंगों में रक्त मिलाकर चित्र बनाने वाला कलाकार है 1ब्रुगेल  2 रूबेंस  3 लूसियान फ्रायड 4 वेरोनिज ...

Colour

रंग Colour          रंगो के द्वारा मानव अपने जीवन को विविध प्रकार से सजाता है गुहावासी मानव से लेकर आप तक इनका महत्व कम नहीं हुआ है रंग मनुष्य को सदैव अपनी तरफ आकर्षित करते रहते हैं इनके सौंदर्य के वशीभूत होकर ही मनुष्य ने रंगो को परस्पर मिलाकर विविध प्रकार की रंगत ओं का निर्माण किया है वैसे तो रंग प्रकाश का गुण है और उसी की मात्रा पर उनका मान निर्भर करता है प्रकाश कम या अधिक होने से उनकी रंगत में भी परिवर्तन दिखाई पड़ता है पर सामान्यता दर्शक इन सूक्ष्म आयामों पर विचार नहीं करता वह तो महेज उनके नामों से ही पहचानता है फिर भी कहीं ना कहीं इनका प्रभाव उसकी मनोदशा पर भी पड़ता है तभी तो रंगो का विशेष ध्यान रखा जाता है किस परिस्थिति में किस प्रकार के परिधान या रंगों का उपयोग करना चाहिए           रंग या वर्ण की परिभाषा वर्ण प्रकाश का वह गुण है जो कोई स्थूल वस्तु नहीं इसका कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है बल्कि अक्ष पटल  द्वारा मस्तिष्क पर पड़ने वाला एक प्रभाव है       दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि रंग प्रक...