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अंतराल का अर्थ एवं परिभाषा

अंतराल space

अंतराल चित्रकला का सबसे महत्वपूर्ण तत्व इसके बिना चित्र रचना संभव नहीं है अंतराल या स्पेस अथवा धरातल ही वह कार्यक्षेत्र होता है जहां पर कलाकार अपने चित्र का निर्माण करता है जो द्विआयामी होता है कलाकार इस पर विविध तत्वों तथा चित्र सामग्री की सहायता से त्रिआयामी प्रभाव उत्पन्न करता है प्राचीन भारतीय शिल्पशास्त्रों में भी अन्तराल को विभिन्न नामों से जाना गया है जैसे समरागण सूत्रधार में भूमि बंधन, विष्णुधर्मोत्तर पुराण में स्थान, अभिलाषी चिंतामन में स्थान निरुपण आदि नामों से जाना गया है

अंतराल की परिभाषा definition of space

     कलाकार जिस भूमि पर चित्रण कार्य करता है वह अंतराल का लाती है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि वह स्थान जो चित्र निर्माण के रूप में प्रयोग में लाया जाता है वह अंतराल कहलाता है जैसे कागज लकड़ी दीवाल आदि।

अंतराल का महत्व importance on space

    अंतराल वह स्थान है जिस पर कलाकार अपनी कल्पना को मूर्त रूप प्रदान करता है इसके अभाव में वह चित्र को नहीं गढ़ सकता एक कलाकार के लिए अंतराल के महत्व को जानना और समझना दोनों ही महत्वपूर्ण है अंतराल का चुनाव कैसे और किस माध्यम के लिए करना है यहां उस स्थान की जलवायु और उपलब्धता तथा चित्र के रखरखाव आदि बातों पर निर्भर करता है फिर भी अध्ययनरत कलाकारों के लिए कागज और स्थानीय उपलब्ध, सामग्री का प्रयोग किया जाता है जब कलाकार चित्र पर कार्य करना आरंभ करता है तो धरातल कई भागों में विभक्त हो जाता है अभी तक कोई सर्वमान्य सिद्धांत नहीं आया है जो यह बता सके की अंतराल विभाजन की उचित पद्धति कौन सी है भारतीय कला इतिहास में अजंता जैन पाल मुगल राजस्थानी पहाड़ी कंपनी आदि शैलियों में प्रथक प्रथक अंतराल विभाजन दिखाई पड़ता है आज के कलाकारों में भी अन्तराल विभाजन की यही विशेषता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है

चित्रभूमि का विभाजन space division

चित्र भूमि पर रेखांकन करते चित्र भूमि दो भागों में विभाजित हो जाती है यह विभाजन दो प्रकार का है

1 सम विभक्ति formal division

     रेखाओं की सहायता से चित्र भूमि को इस प्रकार विभक्त करना कि दाएं बाएं उपर नीचे तथा चारों तरफ केंद्र से दूरी बराबर हो प्राचीन भारतीय एवं मध्यकालीन यूरोप के कलाकारों जैसे माइकल एंजेलो रूबैंस आदि ने इस पद्धति में काम किया है सम विभक्ति का प्रयोग संतुलन एकता शक्ति व समता आदि भवाओं को प्रदर्शित करता है

2 विषम विभक्ति informal division

     इस पद्धति में कलाकार स्वतंत्र होकर कार्य करता है वह चित्र भूमि पर कहीं भी अपनी आकृति का निर्माण कर सकता है यह पद्धति कलाकार को कार्य करने के लिए अधिक स्वतंत्रता प्रदान करती है तथा मनोवांछित प्रभाव पाने में भी सहायक रही है इस विभाजन में उत्तेजना प्रगति सृजन क्रियाशीलता का भाव उत्पन्न किया जा सकता है
             समय-समय पर कई कलाकारों ने अपनी समझ के अनुसार सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं जो इस प्रकार हैं

1 स्वर्णिम विभाजन का सिद्धांत principle of golden section

     इस सिद्धांत का प्रतिपादन यूक्लिड ने किया था प्राचीन यूनानी कलाकारों ने इस सिद्धांत के आधार पर ही अपनी कृतियों का निर्माण किया है यह सिद्धांत विभिन्न संभावनाओं से भरा हुआ है इसमें चित्रभूमि को विभाजित करने के कितने ही स्वरुप दिखाई देते हैं अता अतः कलाकार को स्वयं प्रयोग के द्वारा उपयुक्त विभाजन को चुनना काफी लाभप्रद होगा

2 कर्ण विभाजन Diagonal method

इस पद्धति का भी चित्र भूमि के विभाजन के लिए प्रयोग कर रहें है इसमें लंबवत रेखा पर कर्णवत रेखा खींचकर उसे होती हुई समांतर रेखाएं खींच का चित्र उनको चोथाई आधा तिहाई में विभक्त करते है

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