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दिसंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Ravindra nath Tagore

रविंद्र नाथ टैगोर अब तक मैं अपनी भावनाओं को साहित्य संगीत में व्यक्त कर रहा हूं पर मेरी आत्मा व्यक्त के तरीके अपूर्ण रहे अता भाव प्रकटीकरण के लिए चित्रित रेखाओं का सहारा ले रहा हूं शरीर के लिए प्याज के अलावा एक और भी प्यास मनुष्य को लगती है  रविंद्र नाथ टैगोर रविंद्र नाथ टैगोर का जन्म 7 मार्च 1861 ईसवी को जोड़ासाँको पश्चिम बंगाल में हुआ था इनके पिता देवेंद्र ठाकुर थे रविंद्र नाथ उच्च कोटि के साहित्यकार के साथ ही नाटककार, उपन्यासकार, संगीतज्ञ, दार्शनिक, अभिनेता, चित्रकार आदि विधाओं में पारंगत है 1901 में उन्होंने कोलकाता में शांतिनिकेतन की स्थापना की 1913 में इन्होंने अपनी कृति गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया 1919 में शांति निकेतन में कला भवन की स्थापना की जिसका प्रथम अध्यक्ष नंदलाल बोस को नियुक्त किया गया इनका चित्रकला की ओर झुकाव 1926 में यूरोप यात्रा के दौरान हुआ उन्होंने यूरोप में चित्रकला को देखा और समझा लगभग 67 वर्ष की अवस्था में रविंद्र नाथ टैगोर ने लेखन बंद कर चित्रण प्रारंभ किया गुरुदेव की कला शैली को समन्वयात्मक शैली कहा जाता है गुरुदेव रवींद्रनाथ ट...

gaganendranath Tagore

Gaganendranath Tagore     भारतीय कला जगत में कभी-कभी ऐसी प्रतिभाएं भी जन्म लेती हैं जो अपने स्वभाविक सृजन को ही अपने जीवन का आधार बनाती हैं गगनेंद्रनाथ टैगोर भी इन्हीं में से एक प्रतिभावान कलाकार थे जिन्होंने तत्कालीन प्रचलित बंगाल शैली से इधर अपना एक स्वतंत्र मार्ग खोजा जो देखने में भले ही यूरोपीय शैली से प्रभावित हो पर यह उनका अपना स्वयं का चुना हुआ मार्ग था जिसे कलाकार ने अपने हाथों से गढ़ा था यह दुनिया इनकी अपनी थी जिनके सारे आकार और कल्पनाएं गगनेंद्रनाथ की स्वयं की थी वह देखने में घनवादी प्रतीत अवश्य होती हैं पर वह घन वादियों के न तो साहित्य को पढ़ा और ना ही उनके कभी चित्र देखें फिर भी कुछ समानताएं तो दिखाई पड़ती हैं लेकिन हम इतना कह सकते हैं इन समानताओं के बावजूद गगनेंद्रनाथ टैगोर अपने सृजन में भारतीयता को बरकरार रखने वालों रखने में सफल रहे हैं  जन्म   1867 जोरोसांको मृत्यु    1938 प्रसिद्धि  चित्रकार, कार्टूनिस्ट गगनेंद्रनाथ टैगोर का जन्म 1867 ईस्वी में जोड़ासाँको पश्चिम बंगाल कोलकाता में हुआ था इनका पालन-पोषण चाचा रविंद्रनाथ टैगोर के स...

samrendra nath gupta

कलाकार समरेंद्र नाथ गुप्त समरेंद्र नाथ गुप्त उन कलाकारों की श्रेणी में आते है जिन्होने बंगाल शैली के प्रचार प्रसार में अपना जीवन लगा दिया तथा अपनी व्यक्तिगत शैली का भी विकास कर सके इन्होंने अपने लंदन प्रवास में ग्राफिक्स कला में भी विशेष अध्ययन किया तत्पश्चात भारत आकर अपना श्रेष्ठ कार्य भी किया जन्म 1887 कोलकाता मृत्यु  प्रसिद्ध चित्रकार समरेंद्र नाथ गुप्त का जन्म कोलकाता में 1887 ईस्वी में हुआ था बाल्य काल में ही इन्हें कलात्मक वातावरण मिला उनके परिवार ने समरेंद्र नाथ गुप्त की कलात्मक अभिरुचियों को देखते हुए विशेष शिक्षा के लिए कोलकाता कला विद्यालय में प्रवेश दिलाया यहां पर कला गुरु अविंद्रनाथ ठाकुर का सानिध्य प्राप्त हुआ 1907 से 1911 तक अध्ययन करने के पश्चात निरंतर अभ्यास के द्वारा कला में पारंगत हो गए 1910 में लेडी हरिघम के अंतरण पर अजंता गुफा और 1911 में असित कुमार हलदर के साथ बाघ  गुफा प्रतिकृतियां तैयार की लगातार कार्य करते हुए 30 मार्च 1964 को समय नाथ गुप्त का कोलकाता में निधन हो गया कला जगत में सदैव अपने उल्लेखनीय कार्यों के लिए याद किए जाते रहेंगे समरेंद्र नाथ गु...

paper art

1 असित कुमार हालदार के चित्रों की क्या प्रमुख विशेषता थी?  (A) सुगम आकार (B) सरल एवं प्रवाह पूर्ण रेखायें (C) रंगों की विविधता (D) भावपूर्ण चित्रण 2 क्षितिंद्र नाथ मजूमदार के चित्रों को किसने सराहा एवं खरीदा ? (A) E.B. Havell (B) Henry Moore. (C) Lady Hardinge (D) Jobin Berger उत्तर (C) Lady Hardinge 3 क्षितिंद्र नाथ मजूमदार के चित्रों का संग्रह किस नाम से प्रकाशित है ? (A) गीत गोविन्द (B) भागवत (C) श्री कृष्ण लीला (D) रास लीला उत्तर (A) गीत गोविन्द 4 क्षितिंद्र नाथ मजूमदार को किस दिया में दक्षता प्राप्त थी ? (A) प्रकृति चित्रण में (B) व्यक्ति चित्रण में (C) चित्रों की अनुवृति करने में (D) सूक्ष्म चित्रण में उत्तर 5. आधुनिक काल में लोककला पर आधारित चित्रण करने वाले प्रथम कलाकार कौन थे ? (A) सुधीर रंजन खास्तगिर (B) देवी प्रसाद राय चौधरी (C) असित कुमार हालदार (D) यामिनी राय उत्तर (D) यामिनी राय 2 4 [PT.O.] What was the characteristics of Amrita Sher's patings? (A) Simple m Brightcalbus and group depiction (C) Rhythmic ners. (D) Geometrical forms Who is called the Picasso of mode...

Yamini Rai

लोक कलाकार यामिनी राय यामिनी राय ने अपनी कला के विषय में कहा था बच्चों जैसी सीधी साधी मेरी कला है जिसे हर कोई अपनी गोद में लेना चाहता है मैं पढ़ना लिखना नहीं जानता बच्चे मेरे गुरु हैं जब मुझे कोई रास्ता अपने सृजन को लेकर नहीं मिला तब मैंने बाल स्वभाव और सहज रुचियां से युक्त इस कला की तरफ देखा और यही रास्ता पकड़ लिया सबके जो भीतर असली आत्मा है वह बालक की है जन्म 1887 बांकुरा, बेलिया तोरे गांव मृत्यु 1972  प्रसिद्ध लोक कलाकार  पुरस्कार पद्म विभूषण बंगाल के बांकुरा जिले में बेलिया तोरे गांव में जन्मे यामिनी राय ने कला की प्रारंभिक शिक्षा के लिए कोलकाता कला विद्यालय में प्रवेश लिया किंतु शीघ्र ही कोलकाता से निकलकर बंगाल शैली से विरक्त होकर यूरोपीय कला के आधार पर पोर्ट्रेट तथा प्रभाववादी प्रभाव वाले दृश्य चित्र तथा पेंटिंग आर्ट के माध्यम से चित्र सर्जन करना आरंभ किया  कुछ समय पश्चात् यामिनी राय ने सारी प्रवृत्तियों को त्याग दिया तथा बंगाल की लोक कला शैली को आधार बनाकर अपना चित्र सृजन करने लगे यह बंगाल की अपेक्षित लोक कलाओं जैसे कुंडली चित्र कालीघाट लोककला खिलौना पूजा की मूर्त...

tgt pgt art test paper 26

Up tgt pgt practice set 26 1 एक रंग से बने चित्र को क्या कहते है ? 1 काला और सफेद     2 रंग विहीन 3 मोनोक्रोम                4 मल्टीक्रोम 2 "सोलह ताल" की आकृति किसकी होती हैं ? 1 मानव  2 हंस  3 असुर  4 देव 3 असित कुमार हल्दार ने अपनी पुस्तक "ललित कला की धारा में बाघ की किस गुफा का वर्णन किया है ? 1 गृह  2 हस्ति खाना  3 रंग महल  4 पाठशाला 4 "ब्लैक प्रिंसेस" नामक चित्र अजंता की किस गुफा में स्थित है ? 1 गुफा 1          2 गुफा 16 2 गुफा 2          4 गुफा 9 5 "कला विलास" किसकी पुस्तक है ? 1 क्षेमेन्द्र  2 आर एस अग्रवाल  3. 1 व 2 दोनो  4कोई नहीं 6 कार्बो रेंडम क्या है ? 1 तकनीक                        2 रेत और लोहे का चूर्ण 3 धातु ढलाई की प्रक्रिया     4 मूर्ति बनाने औजार 7 सेरीग्राफी का आरंभ हुआ था ? 1. 1980              2. 1960 3. 1930...

A A Almelkar

Abdulrahiman Appabhai Almelkar      ए ए  अलमेलकर का जन्म 10 अक्टूबर 1920 को अहमदाबाद गुजरात में हुआ था बचपन से ही इनकी कला में विशेष रुचि थी आरंभिक शिक्षा के पश्चात उन्होंने विशेष शिक्षा सर जेजे स्कूल आफ आर्ट मुंबई से प्राप्त की शुरुआती दौर में इनके ऊपर एन एस बेंद्रे और लैंग हैमर का प्रभाव परिलक्षित होता है ए ए  अलमेलकर की कला में लोक कला, आदिवासी कला और परंपरागत भारतीय कला से प्रेरित चित्र भाषा है तथा इन्होंने हमेशा आम आदमी के जीवन की मार्मिक छवियां ही बनाई है       ए ए  अलमेलकर अक्सर महाराष्ट्र के विदर्भ में जंगलों में जाया करते थे जहां के जंगल, आदिवासी, पेड़ पौधे, एवं रंगीन वातावरण इनको काफी लुभाता था अलमेलकर के चित्रों में यह विषय बार-बार उभरा है आदिवासियों को प्र मुखता के साथ उन्होंने अपने चित्रों में जगह दी है ए ए  अलमेलकर ने एक जगह कहा था उन्हें चित्रकला की शिक्षा अपनी मां के गर्भ से ही प्राप्त हुई उसी प्रकार जिस प्रकार से अभिमन्यु ने अपने मां के गर्भ में धनुष बाण चलाने की शिक्षा ली थी उसी प्रकार मैंने भी अपनी मां के गर्भ में, ...

DSSSB TGT ART paper

DSSSB TGT ART solve paper  2021 Not उत्तर तैयार करते समय पूर्ण सावधानी रखी गई है फिर भी अगर कोई त्रुटि दिखे तो या किसी सुझाव के लिए कृपया  kalalekhan@gmail.com  पर ईमेल में करे  या फेसबुक पेज  history of fine art  पर प्रतिक्रिया दे हमारे  youtube channel  पर जुड़ें।  Q.1 सिगिरिया गुफा में निम्नलिखित में से कौन सा रंग प्रयोग नहीं किया गया है? 1. पीला 2 हरा  3. लाल 4. नीला उत्तर 4. नीला Q.2 अजंता की किस गुफा में बुद्ध, यशोधरा और राहुल से संबंधित चित्रकारी की गई थी? 1. गुफा सं. 16 2. गुफा सं. 17 3. गुफा सं. 1 4. गुफा सं. 10 उत्तर 2. गुफा सं. 17 Q.3 यूनेस्को (UNESCO) का विश्व धरोहर स्थल 'वेरुल' कहाँ स्थित है? 1. उदयगिरि  2. औरंगाबाद 3. ओडिशा 4. मध्य प्रदेश उत्तर 2. औरंगाबाद Q.4 आनंद कुमार स्वामी द्वारा किस शैली को पश्चिम भारतीय शैली कहा गया 1. गुजरात शैली          2 कंपनी शैली 3. बंगाली शैली           4. पाल शैली उत्तर 1. गुजरात शैली    Q.5 निम्नलिखित में से...

proportion in Indian painting

 भारतीय चित्रकला में प्रमाण    प्रमाण का महत्व         एक सफल कलाकार के लिए प्रमाण का ज्ञान होना अत्यधिक आवश्यक है बिना इसके सार्थक चित्र का निर्माण करना संभव प्रतीत नहीं होता इसके द्वारा कलाकार चित्रभूमि को इस प्रकार से विभाजित करता है कि वह देखने में रुचिकर प्रतीत हो तथा नीरसता को दूर किया जा सके परिभाषा         प्रमाण को संबद्धता का सिद्धांत भी कहा जाता है आकृतियों का अपना प्रमाण तथा सभी आकृतियों का एक दूसरे से संबंध और सभी आकृतियों तान तथा वर्ण इत्यादि का चित्र भूमि से संबंध निश्चित करता है      प्रमाण का कोई निश्चित सिद्धांत नहीं बनाया जा सकता फिर भी ऐसी सीमाएं जानी जा सकती हैं जिनका अतिक्रमण करने पर अरुचिकर प्रमाण की उत्पत्ति होती है अतः प्रमाण का सर्वप्रथम दायित्व चित्र में रुचि उत्पन्न करना है कुछ लोगों में स्वतः ही अच्छे प्रमाण के प्रति रुचि होती है परंतु कुछ लोगों को अच्छे प्रमाण का ज्ञान प्राप्त करना होता है इसीलिए प्रारंभ में एक आधार की आवश्यकता होती है शेष अनुभव से प्राप्त हो जाता है यूक्लिड गोल्डन...