सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

फ़रवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भूख और अकाल का कलाकार जैनुअल आबेदीन

भूख और अकाल का कलाकार जैनुअल आबेदीन जैनुअल आबेदीन का जन्म 1917 ईस्वी में बांग्लादेश में हुआ था इन्होंने कला शिक्षा बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट से प्राप्त की इन्होंने भारतीय आधुनिक कला के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई अपने लंबे सृजन मे एक ऐसे वातावरण का निर्माण किया जो सुंदरता और नैतिकता के मूल्यों पर खरा उतरता हो इनके चित्रों में गरीबी और दुख की एक विषद श्रंखला दिखाई पड़ती है अधिकतर चित्र स्याही और तूलिका के माध्यम से बनाए गए हैं banglaesh liberation war 1971, 1943 में बंगाल में पड़े अकाल में zainul abedin  को अत्यधिक प्रभावित किया लोगों की दशा को देखने के लिए वह स्वयं निकल पड़े अंग्रेज सरकार द्वारा अपनी उपनिवेश की वृद्धि और अंग्रेज़ी शासन से उत्पन्न भयावह स्थिति देखा तथा भारतीय साहूकारों और पूंजीपतियों ने किस प्रकार से इस स्थिति में भी जमाखोरी जारी रखी अंग्रेज सरकार इन विनाशकारी प्रवृत्तियों के बावजूद भी ना तो खाद्यान्न उपलब्ध कराया और ना ही आयात को रोकने का कोई प्रयास किया कोलकाता के गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट में अपनी नौकरी को छोड़कर बंगाल के दुर्भिक्ष को अपने चित्रों ...

India art fair

स्रोत The Hinu हम कला की परिवर्तनकारी शक्तियों में विश्वास करते हैं इससे मानसिक स्वास्थ्य लिंग यौन अभिविन्यास जाति पारिस्थिकीय से प्रभावित करने वाले मुद्दों के आसपास महत्वपूर्ण बातचीत को पोषित करने के लिए एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं इस क्षेत्र में एकमात्र व्यवसायिक मेले के रूप में हम बाजार में गतिशीलता लाने संग्रह आधार का विस्तार करने भारतीया और दक्षिणी एशियाई कला एवं संस्कृति पर अंतरराष्ट्रीय बातचीत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी रखते हैं   जया अशोककन  इंडियन आर्ट फेयर डायरेक्टर आधुनिक एवं समकालीन कलाओं का संगम इंडियन आर्ट फेयर में देखने को मिलता है इस साल 9 फरवरी 2023 से लगाकर 12 फरवरी 2023 के मध्य इंडियन फेयर का आयोजन नई दिल्ली में किया जा रहा है इंडिया आर्ट फेयर (IAF) का यह 14 संस्करण कई मायनों में खास है इसमें 71 कला दीर्घा और 14 संस्थान भाग ले रहे हैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कलाओं का संगम देखा जा सकता है इंडियन आर्ट फेयर के विषय में बात करते हुए निर्देशक जया अशोकन कहती हैं हम कला और शिल्प के बीच के भेद को समाप्त करना चाहते हैं मेले में समकालीन कलाकारों क...

chamba chitra shaili

चंबा चित्र शैली  चंबा घाटी को विद्वानों ने कला की घाटी कहा है क्योंकि यहां बने मंदिर और अन्य स्थापति में भित्ति चित्र कला का निर्माण विशेष रूप से किया गया है या क्षेत्र वर्तमान में हिमाचल प्रदेश का एक जिला है उमेश सिंह चंबा शैली का सबसे बड़ा संरक्षक राजा हुआ इसके पश्चात उसका अधिकारी राज सिंह शासक बनाए इसी समय गुलेश से नयनसुख का पुत्र निक्का आकर यहां पर बस गया चंबा शैली का उदय 17वीं शताब्दी के मध्य में माना जाता है इस शैली के प्रमुख चित्र में कलीक अवतार और परशुराम का चित्र काफी लोकप्रिय रहा है लोक कला से प्रभावित होने के कारण चंबा को बसौली शैली के अधिक निकट माना जाता है चंबा शैली के विषय पौराणिक ग्रंथों रामायण दुर्गा पाठ भगवत पुराण तथा व्यक्त चित्रों का यहां पर चित्रण देखने को मिलता है चंबा शैली की विशेषताएं अधिकांश विशेषताएं बसौली शैली के समान है चित्रों की हासिए चौड़े एवं फूल पत्तियों तथा पक्षियों से अलंकृत किए गए हैं चंबा शैली अपने रूमाल   के लिए विशेष तौर पर जानी जाती है चंबा रूमाल  हिमाचल प्रदेश में चम्बा लघु चित्रों की पहाड़ी और कांगड़ा शैली के लिए प्...