सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

अगस्त, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रथीन मित्रा

कलाकार रथीन मित्रा और कोलकाता ग्रुप प्रसिद्ध चित्रकार रथीन मित्रा का जन्म 26 जुलाई 1926 को हावड़ा पश्चिम बंगाल में हुआ था इनकी कला की शिक्षा कोलकाता स्कूल ऑफ आर्ट से हुई कुछ समय पश्चात इन्होंने 1955 से 1981 तक दून स्कूल के कला विभाग में अध्यापक के रूप में कार्य किया  रथीन मित्रा  ने अपने जीवन में साधारण और दैनिक जीवन में दिखाई देने वाली वस्तुओं का ही चित्रण किया है इनके चित्रों में कलात्मकता एवं नैतिक रूपों को प्रस्तुत किया गया है रेखा का कुशल प्रयोग इनकी प्रमुख विशेषता रही है   रथीन मित्रा   कोलकाता ग्रुप के आरंभिक सदस्यों में से रहे हैं दून आर्ट सोसाइटी  तथा ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश के सदस्य भी नामित किए गए मित्रा ने कोलकाता शहर के बहू से रेखा चित्रों का निर्माण किया जो कोलकाता द सिटी आई लव नाम से प्रकाशित हुए

मूर्तिकार प्रदोष दासगुप्ता की कला यात्रा

Pradosh Dasgupta Sculptures 1912-1991 transcending time समकालीन भारतीय कला क्या है इसका कोई निश्चित चरित्र है या अपने स्वयं में परिपूर्ण है अन्य राष्ट्रों से अलग होकर इसने दुनिया में अपनी पहचान कैसे बनाएं इस प्रश्न का उत्तर जितना स्पष्ट है उससे अधिक आस्थान विश्वासों में स्वयं के चरित्र को देखना जो धार्मिक प्रथाओं और सदियों पुरानी रीति-रिवाजों परंपराओं तौर-तरीकों आदतो से बंधा हुआ है से बंधा हुआ है लोग दूसरे शब्दों में कहें दो लोगों के जीवन जीने का तरीका स्पष्ट रूप से दिखता है समकालीन दुनिया में कुछ इस तरह से फैला हुआ है जो लोगों के जीवन को काफी हद तक नियंत्रित या ढलता भी है इस को नापने का कोई निश्चित तरीका नहीं है निसंदेह गोली की स्थिति जलवायु और परिस्थितियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं या वनस्पति और जैविक जीवन से मिलता जुलता है चाहे दुनिया का कोई कोना हो बुनियादी अवधारणा है वैसी ही रहती हैं भारतीय मूर्तिकला के माध्यम से भारतीय मूर्तिकला के दृश्य अगर समकालीन भारतीय कला को देखा जाए तो इसमें नई सहेलियों के विकास के कई चरण आपको दिखाई पढ़ेंगे इनके संरक्षण के लिए समय-समय पर विभिन्न राजा और धार...

tgt pgt kala

tgt pgt art paper set 34 by Papu gupta ( Art Teacher) टीजीटी पीजीटी कला से संबंधित तैयारी के लिए कोचिंग एवं नोट्स के लिए संपर्क करें +919936946224 Q1. लघु चित्रण की परंपरा कब दि खा ई देती हैं 1. सिंधु घाटी की सभ्यता  2. प्रागैतिहासिक काल  3. मध्यकाल  4. आधुनिक काल   Q2. लघु चित्रण शैली का जनक किस शैली को मानते है  1. जैन शैली  2. अजंता शैली  3. पाल शैली  4. मुगल शैली   Q3. पाल शैली को किस नाम से संबोधित किया जाता है  1. पूर्वी शैली  2. पोथी शैली  3. नाग शैली  4. इनमे से सभी Q4. पाल शैली का इनमे से कौन सा केंद्र रहा है  1. बंगाल  2. बंगाल , बिहार  3. बंगाल , बिहार , उड़ीसा  4. बंगाल , बिहार , उड़ीसा , नेपाल   Q5. लघु चित्रण की परंपरा शुरू करने का श्रेय किस वंश को जाता है  1. पाल वंश  2. गुप्त वंश  3. मौर्य वंश  4. इनमे से सभी  Q6. पाल शैली के चित्रण का वेस ( धरातल ) इनमे से क्या है  1. ताड़ पत्र / राजताल  2. कपड़ा  3. कागज  4. इनमे से सभी...

sudhir patwardhan

कलाकार सुधीर पटवर्धन   भारतीय कला जगत में कंपनी शैली के बाद कुछ ऐसे इनेगिने ही कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी विषय वस्तु में सामान्य लोगों को जगह दी हो खासतौर पर निचले वर्ग के लोग जिन्हें अभी तक कोई जगह नहीं मिली थी कंपनी शैली में साधारण लोगों के चित्र अवश्य बनाए गए थे परंतु उनका इनके दुख दर्द से कोई लेना-देना नहीं था 1949 में पुणे जन्मे  Sudheer patvardhan   ने अपने चित्रों में जनसाधारण को जगह दी सु धीर पटवर्धन वामपंथी विचारधारा के आधुनिक कलाकार हैं जिनके विषय वस्तु जनसाधारण लोगों को आधुनिक कला के मंच पर खड़ा कर देना था उन्होंने एक जगह कहा था मेरा कलाकार होने का औचित्य इसी में है कि मैं साधारण लोगों का कलाकार रहूं हो सकता है यह कहने में ऐसा लगे कि मैं अपने आप को अत्यधिक सदाचारी बना रहा हूं परंतु कला के ऐसे लक्ष्य जो आसपास के असाधारण लोगों के जीवन और जरूरतों से सरोकार नहीं रखते मुझे नहीं पसंद आते  1972 ईस्वी में सुधीर पटनायक ने सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज पुणे से चिकित्सा में स्नातक की उपाधि प्राप्त की पटवर्धन एक रेडियोलॉजिस्ट के रूप में प्रसिद्ध है सुधीर पटवर्धन को ब...