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नवंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

group 1890

ग्रुप 1890 ग्रुप 1890 का गठन प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप एवं बंगाल शैली के प्रकृति एवं आदर्शवाद के विरोध में किया गया था। आधुनिक चित्रकला के विकास में इस ग्रुप ने निर्णायक भूमिका अदा की थी। 1962 सभी सदस्यों की बैठक महेंद्र पांड्या के घर पर हुई थी। इसी घर के नंबर के आधार पर इस ग्रुप का नाम करण करने का सुझाव जे स्वामीनाथन ने दिया जिसे सभी ने सहर्ष मंजूर कर लिया। इस ग्रुप के विषय में कॉन्ट्रा नामक पत्रिका में जे स्वामीनाथन ने प्रकाशित किया। ग्रुप का घोषणा पत्र Octavio paz (मैक्सिको के कवि) तथा जे स्वामीनाथन ने मिलकर तैयार किया। ग्रुप 1890 की प्रदर्शनी 1890 ग्रुप की प्रदर्शनी 7 जुलाई 1963 ई को जवाहर भवन नई दिल्ली में आयोजित की गई जिसका उद्घाटन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं डित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। इसके विषय में जी एम शेख एक दिलचस्प टिप्पणी करते हैं 1963 में चीन युद्ध के बाद भारत की हार से पंडित जवाहरलाल नेहरू टूट गए थे जिससे उद्घाटन के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के इच्छुक नहीं थे पर स्वामीनाथन ने उनसे कहा नेहरू जी हम आपको एक लेखक के रूप में आमंत्रित करना चाहते हैं जिसे नेहरू ज...

बीएन गोस्वामी

भारतीय लघु चित्रकला इतिहास के शिल्पकार बी एन गोस्वामी चित्रतल का अवलोकन करते समय आंख चमकदार रंगों को ग्रहण कर विवरण की बारीकी एवं संदर्भ को पकड़ सके B N गोस्वामी, 2016 इंडियन एक्सप्रेस बी एन गोस्वामी की शिक्षा एवं कला अभिरुचि देश के प्रतिष्ठ प्रतिष्ठित कला समीक्षक और आर्ट हिस्टोरियन बी एन गोस्वामी का जन्म का जन्म 15 अगस्त 1933 को पंजाब प्रांत (पाकिस्तान) में हुआ था। आरंभिक शिक्षा के बाद अमृतसर के हिंदू कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से 1954 में मास्टर के डिग्री हासिल की। 1956 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चुने गए तथा बिहार कैडर में काम करने के दौरान कला शिक्षा की पढ़ाई जारी रखी और 1958 ईस्वी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पंजाब विश्वविद्यालय में ललित कला संग्रहालय का निर्देशन किया इनका विवाह इतिहासकार एवं शिक्षाविद करुणा से हुआ बीएन गोस्वामी ने कला एवं संस्कृति पर 25 से अधिक पुस्तकों को लिखा। इन्होंने मुख्य रूप से लघु चित्रों के ऊपर अपना शोध परक कार्य किया। इसी के लिए यह कला जगत में विशेष तौर पर जाने जाते हैं   बीएन गोस...

सचिन तेंदुलकर की मूर्ति

Sachin Tendulkar ki Murti I feel as if I met God Pramod Kamble सचिन तेंदुलकर की लाइफ साइज (आदम कद)की मूर्ति वानखेडे क्रिकेट स्टेडियम मुंबई में स्थापित की गई सचिन तेंदुलकर का स्टैचू ब्रॉन्ज माध्यम में बनाया गया है इस मूर्ति का उद्घाटन विश्व कप 2023 के भारत और श्रीलंका के मध्य खेले गए वनडे मैच में किया गया इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि, शरद पवार, राजीव शुक्ला आदि मौजूद थे अहमदनगर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रमोद कामले ने सचिन तेंदुलकर को जीवंत प्रतिमा का निर्माण किया जो ट्रेडमार्क  मुद्रा में बनी है बाया पैर फैलाए हुए लिफ्टेड ड्राइव के लिए तैयार शरीर थोड़ा झुका हुआ सर ऊंचा तथा बाला आसमान की तरह उठा हुआ है यह मुद्रा दर्शकों को सदैव लुभाती रहती है यह त्रिभंग मुद्रा में बनाई गई है यह प्रतिमा मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा स्थापित की गई है