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khilaune banana

भारत में खिलौने बनाना 


ऐसे कलात्मक कार्य को कहते है जो उपयोगी होने के साथ साथ घर सजाने के काम में आता है जिसे मुख्यत हाथ से या सुलभ औजारों की सहायता से बनाया जाता है ऐसी कलाओं का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व होता है हस्तशिल्प किसी भी देश की अभिव्यक्ति होने के साथ साथ उस देश की संस्कृति परम्परा और विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। भारत की भव्य सांस्कृतिक विरासत और सदियों से क्रमिक रूप से विकास कर रही इस परंपस की झलक देश की हस्तशिल्प वस्तुओं में दिखाई पड़ती है हस्तकला अलग-अवन माध्यम एव अलग-अलग क्षेत्र होने के बाद भी इसके विषयवस्तु परंपरा पर आधारित होती है।

हस्त शिल्प निम्न प्राकर के होते है 
  •  बांस हस्तशिल्प
  • जूट हस्तशिल्प
  • धातु हस्तशिल्प
  • काष्ट हस्तशिल्प
  • मिट्टी हस्तशिल्प


 खिलौने

बच्चे और खिलौने का संबंध जन्म से ही रहा है हम यह भी कह सकते हैं की खिलौनों के बिना हम बच्चों की दुनियां कल्पना भी नहीं कर सकते हैं  बच्चों को  खिलोनें विशेष रूप से आकति एवं मोहित करता है खिलौने में बच्चों के भावात्मक और शारीरिक विकास में सहायक होते है सरल एवं परंपरागत खिलौनों के द्वारा बच्चे अपनी कल्पना शक्ति का प्रयोग करके वास्तविक जीवन में परित्र एवं काल्पनिक संसार का निर्माण करते हैं।

खिलौने के बनाने सामग्री


 खिलौने के बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के अनुसार इसे वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • मिट्टी के खिलौने
  • लकड़ी के  खितौने 
  • कपड़े के  खिलौने 
  • धातु के  खिलौने 
  • पेपर मेशी के  खिलौने 


मिट्टी के  खिलौने बनाना 


 मिट्टी के खिलौनों का प्रचलन बहुत ही प्राचीन है इसका सबसे सुंदर उदाहरण 4000 ईसा पूर्व सिन्धु  घाटी सभ्यता में देखने को मिलता है मिट्टी के खिलौनों को बनाने के बाद इसे आग में पकाया जाता है जिसे टेराकोटा कहा जाता है बच्चों को मिट्टी से खिलौने बनाने एवं खेलने में बहुत अधिक आनंद महसूस होता है बच्चे मिट्टी के कोमल स्वरूप के माध्यम से बचपन के सुंदर एवं कोमल स्वभाव को खिलौनों के माध्यम में व्यक्त करते हैं जो बच्चों की कल्पना काल्पनिक एवं रचनात्मक विकास में सहायक होता है यहां पर मिट्टी एवं बच्चों में बहुत ही समानता देखने को मिलती है जैसे मिट्टी का स्वभाव बहुत ही कोमल और मुलायम होता है वैसे ही आप जैसे भी रूप देना चाहे वैसा दे सकते हैं ठीक उसी तरह बच्चे का स्वभाव बहुत ही कोमल होता है बचपन में आप उसे जैसा सिखाना चाहो वह वैसा ही सीखेगा इसीलिए मिट्टी के खिलौने हमेशा बच्चों के स्वभाव को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए मिट्टी के खिलौनों में बच्चे को खेलने के साथ ही घर में सजावट के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है मिट्टी के विषय ज्यादातर पारंपरिक होते हैं साथ ही हाथी घोड़े मछली फूल तथा फल आदि बनाए जाते हैं मिट्टी के खिलौने बनाने के लिए  मिट्टी बनाने की विधि सर्वप्रथम जननी आवश्यक है

मिट्टी बनाने की विधि

हर जगह अलग-अलग किस्म की मिट्टी मिलती है कहीं चिकनी कहीं रेतीली तो कहीं लाल तो कहीं काली मिट्टी पाई जाती है मिट्टी के खिलौने के लिए चिकनी मिट्टी सबसे ज्यादा उपयुक्त रहती है मिट्टी को साफ कर के धूप में अच्छी तरह से सुखा लेते हैं उसके बाद मिट्टी को एक टब  में पानी के साथ फूलने के लिए 1 से 2 दिन तक छोड़ देते हैं तब मिट्टी पानी में अच्छी तरह से घुल जाती है तो उसे जाली की सहायता से छान लेते हैं उसके बाद मिट्टी को जुट के ऊपर फैलाकर कुछ समय के लिए छोड़ देते हैं जब मिट्टी थोड़ी हार्ड हो जाए तो उसको प्लास्टिक के टब में रख देते हैं और आवश्यकतानुसार प्रयोग में लाते हैं




मिट्टी के खिलोने के प्रकार 


मिट्टी की खिलौने दो प्रकार की होती है
  • त्रि आयामी  (Three Dimensional)
  • रिलीफ    ( Relief)

मिट्टी के खिलोने की विधि 


मिट्टी के खिलौने बनाने की विधि निम्नलिखित है

  1. क्वाइल विधि (Coiling Process)
  2. डायरेक्ट मॉडलिंग  (Direct Modeling)
  3. सांचे के द्वारा (Mold Process) 
  4. चाक के द्वारा 

क्वाइल विधि (Coiling Process)

किसने मिट्टी की पतली पतली क्वाइल बनाकर क्रमबद्ध तरीके से एक दूसरे को जोड़ते हुए खिलौने का रूप दिया जाता है इस प्रोसेस में मिट्टी के क्वाइल बराबर मोटाई के बनाए जाते हैं खिलौने बनाते समय क्वाइल को अंदर से उंगली की सहायता से दबाकर जॉइंट बनाते हैं इस पद्धति में ज्यादातर डिजाइन ज्यामितीय आकार के होते हैं साथ ही इसमें क्वाइल के माध्यम से छोटे छोटे डिजाइन बनाकर भी आपस में जोड़े जा सकते हैं इसमें खिलौने देखने में अधिक सुंदर लगते हैं बच्चे को खिलौने बनाने के क्रम में विशेष रूप से आनंद महसूस करते हैं इस विधा में ज्यादातर खिलौने का आकार बेलनाकार  अर्ध गोलाकार तथा वर्गाकार होता है

डायरेक्ट मॉडलिंग  (Direct Modeling)

इस प्रोसेस में मिट्टी के माध्यम से डायरेक्ट मॉडलिंग के द्वारा खिलौने बनाए जाते हैं खिलौने बनाने के लिए मिट्टी के छोटे-छोटे टुकड़ों से गोल बेलनाकर वर्गाकार आकार में  बनाए जाते हैं फिर एक दूसरे से जोड़कर आवश्यकतानुसार डिजाइन तैयार की जाती है डायरेक्ट मॉडलिंग में ज्यादातर छोटे साइज के खिलौने बनाए जाते हैं तथा इसमें आर्मेचर का प्रयोग नहीं किया जाता है इस विधि में हम विभिन्न प्रकार के फूल हाथी घोड़े पक्षी तितली तथा फल आदि के खिलौने बनाते हैं खिलौने बनाते समय बच्चे मिट्टी के साथ आनंदित होकर खेलते रहते हैं और खेल खेल में बच्चे कुछ नए डिजाइन की रचना करते हैं इस बीच में बच्चे मिट्टी के कोमल स्वभाव के साथ अपनी रचनात्मक कार्य शैली को भी प्रस्तुत करते हैं

सांचे के द्वारा (Mold Process) 

इसमें खिलौने सांचे के द्वारा बनाए जाते हैं खिलौने बनाने के लिए चिकनी मिट्टी को बेलन की सहायता से रोटी की तरह बोलते हैं उसके बाद सांचे के ऊपर टेलकम पाउडर छिड़कते हैं ताकि मिट्टी सांचे को आसानी से छोड़ दें इसके बाद मिट्टी के सांचे के आधे भाग पर रखकर उंगली से अच्छी तरह से दबाते हैं फिर चाकू की सहायता से सांचे के बाहर निकले एस्ट्रा मिट्टी के भाग को काटकर हटा देते हैं इसके बाद पुनः यही विधि से  दूसरे भाग पर बारी-बारी से करते हैं फिर किनारों में मिट्टी के घोल लगाकर दोनों सांचे को अच्छी तरह से जोड़ देते हैं थोड़ी देर बाद जब मिट्टी हार्ड हो जाए तो दोनों साथियों को सावधानीपूर्वक एक दूसरे से अलग कर देते हैं इसके बाद खिलौना बन कर तैयार हो जाता है इस खिलौने को धूप में अच्छी तरीके से सुखाकर आग में पका देते हैं फिर इसके ऊपर आवश्यकता अनुसार रंग चढ़ाए जाते हैं

चाक के द्वारा बने खिलौने

इस विधि में खिलौने चौक पर थ्रोइंग करके बनाया जाता है इसे डिजाइन के अनुसार अलग-अलग से पर थ्रो कर सकते हैं इसके बाद थोड़ा हार्ड होने के लिए थोड़ी देर के लिए छोड़ देते हैं फिर इन्हें मिट्टी का घोल लगाकर अच्छी तरीके से एक दूसरे में जोड़कर खिलौने बनाते हैं इस खिलौने को धूप में अच्छी तरह से सुखाकर आग में पका देते हैं फिर इसके ऊपर आवश्यकता अनुसार रंग चढ़ाते हैं


स्रोत 
UP SCERT

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