सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

important term of art


कला से सबंधित महत्वपूर्ण परिभाषाएं 



Academic Style of Painting : एकैडमिक स्टाइटल प्राफ पेन्टिंग स्थापित परम्परा के अनुसार अथवा मान्य सिद्धान्तों के अनुसार चित्रण करना। इसमें मौलिकता का कोई स्थान नहीं होता ।

Action Painting : एक्सन पेन्टिंग

अमेरिकन चित्रकार जंक्सन पोलक द्वारा प्रतिपादित वह चित्रण शैली जिसमें रंगों का पूर्णतया वस्तु-आकृति विहीन (Abstract) प्रभाव उत्पन्न होता है। इसका विधान सपाट चित्र भूमि पर रंग छिड़कने, फेंकने अथवा टपकाने की तीव्र प्रक्रिया है, जिसके प्रभाव आकस्मिक होते हैं और उन्हें अन्ततः इच्छित संयोजन का रूप दे दिया जाता है।

Alla Prima : अल्ला प्राइमा

सीधे चित्रण - एक बार के रंग प्रयोग द्वारा चित्र को पूर्ण करना। यह विधि उस विधि के विपरीत है जिसमें रंग की कई सतह लगाकर चित्र पूर्ण किया जाता है है

Advancing Colours :

अग्रगामी रंगत-पुष्ट अमिश्रित रंग जो चित्र भूमि से आगे बढ़ते अनुभव हों। गर्म रंग (जैसे लाल) आगे बढ़ते तथा ठण्डे (जैसा नीला) पीछे हटते प्रतीत होते हैं।

Asymmetry :

अनुसम्मित – नन्दतिक अनियमितता से उत्पन्न सौन्दर्य किसी विषय-वस्तु के आकृति निरूपण में नन्दतिक अनुपात हीनता जिसमें सौन्द अनुभूति हो

Atmospheric Colour: 

वातावरण (प्रकाश, वायु तथा दूरी) से प्रभावित वर्ण ।

WAutomatism:

हाथ की स्वतन्त्र, असंयत गतिमानता द्वारा पेंसिल बुत इत्यादि से चित्रण करना ।
बाइन्डर


Binder : वह पदार्थ जो रंग-पदार्थ (Pigment) के कणों की बधि रखता दीद

अण्डा, अलसी का तेल, वारनिश इत्यादि ।

Body Colours:

रंग-पदार्थ (Pigments) जिससे अपारदर्शिता उत्पन्न होती है यह पारदर्शक रंग का विरोधाभासी है। Broken Colours : ब्रोकेन कलर्स

"जब कोई रंग दूसरे रंग के मिश्रण से परिवर्तित कर दिया जाये तो वह भंग वर्ण ( Broken Colour) होता है

Buoño Fresco : बोनो फ्रेस्को

दीवार की गीली सतह (Plaster) पर पानी में मिश्रित रंगों के प्रयोग से चित्रण करना जिनसे रंग दीवार में बैठ जाये और चूने के मिश्रण से पक्का हो जाये ।

Chiaroscuro
चित्र में छाया प्रकाश का प्रभाव

Chroma : क्रोमा

किसी रंग को चमक अथवा घनत्व जैसे चमकदार लाल व धूमिल लाल रंग |

Colour:
वर्ण के तीन गुण होते हैं

(१) रंगत - वास्तविक रंग जैसे लाल, पीला, नीला, इत्यादि । 
(२) सघनता-रंगत की चमक अथवा धूमिल आभा ।
(३) मान-रंगत पर प्रकाश, वायु, वातावरण एवं दूरी के कारण होने वाला परिवर्तन ।

Colour Circle
इन्द्र धनुष के रंगों को एक वृत्त में इस प्रकार संजोना कि वृत्त के आधे भाग में गर्म तथा आधे भाग में ठण्डे रंग । इस वृत्त के आमने-सामने के रंग पूरक (Complementary) रंग कहलाते हैं। इनमें अधिकतम विरोधाभास होता है।

Colour Unity : कलर पुनिटी वर्ण-चक्र के साथ-साथ के रंग प्रयोग करने पर वर्ण सहयोग प्राप्त होता
है जैसे पीला, नारंगी, लाल अथवा बैंगनी नीला व हरा ।

Composite Colour: कम्पोजिट कलर उन्हें कहते हैं कि जो रंगों को मिलाने से बनते हैं, जैसे-हरा, नारंगी,
बैगनी इत्यादि ।
Cool-Colours : 
ठंडक का प्रभाव उत्पन्न करने वाले रंग जैसे तीला व हरा । Warm Colours : वार्म कलर्स गर्म प्रभाव उत्पन्न करने वाले रंग जैसे लाल व पीला । 

Earth Colours :
वे रंग जो मिट्टी से प्राप्त होते हैं, जैसे Yellow ochre, Terre verte,

Umber.

Easel-Picture : इजेल पिक्चर चित्र जो इधर-उधर ले जाये जा सकें। लेकिन ये लघु चित्रों (miniatures) से बड़े होते हैं ।

Foreshortening :

दृष्टि के कोण के कारण आकृति में जो लघुता उत्पन्न होती है उसे स्थिति जन्य लघुता (Foreshortening) कहते हैं। दृष्टि एवं आकृति की मध्य रेखा में जितना हो छोटा कोण बनेगा, दूरीगत लघुता उतनी ही अधिक होगी।

Fixative :

फिक्सेटिब वह पदार्थ जो चाक, चारकोल, पेंसिल अथवा पेस्टिल रंगों में स्थिरता लाने के लिए छिड़का (Spray) जाता है । 
Fresco Secco फ्रेस्को-सिस्को

भित्ति चित्रण की एक विधि जिसमें प्लास्टर के सूख जाने के उपरांत चित्रण किया जाता है। इस विधि से बनाये गये चित्र Fresco Buono चित्रों से कम स्थायी होते हैं ।

Genre Painting
ऐसे चित्र जिसमें साधारण जीवन से सम्बन्धित दृश्य दिखाये गये हैं। 

Glaze : ग्लेज
एक सूखे रंग पर दूसरे रंग की पतली तह लगाना जिससे नीचे का रंग भी दिखाई देता रहे गोल्डेन सेक्सेन

Golden Section :
अनुपात निश्चित करने का एक ढंग जिसका चित्रण में अत्यन्त उपयोग हुआ है। यदि एक रेखा को इस प्रकार काटा जाये कि छोटे भाग और बड़े भाग में वही अनुपात रहे जो कि बड़े भाग का पूर्ण रेखा से है तो Golden Section का अनुपात प्राप्त होता है। यह लगभग २ : ३ रखता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रागैतिहासिक काल की कला

       प्रागैतिहासिक काल के चित्र ग्राम जीवन, भीमबेटका   नोट  पूर्व इतिहास शब्द का पहला प्रयोग डैनियल विल्सन ने 1851 ई0 में किया था जान लुबाक ने अपनी अपनी पुस्तक प्रागैतिहासिक टाइम्स में  सर्वप्रथम पाषाण काल ​​को विभाजित किया भारत में 1963 ईस्वी में पुरापाषाण कालीन औज़ारों की खोज हुई रॉबर्ट ब्रूस फ़ुट पहले व्यक्ति थी       कला की उत्पत्ति कब और कैसे हुई, निश्चित रूप से इस विषय में हमारे पास कोई साक्ष्य नहीं है, फिर भी हम यह कह सकते हैं कि मानव जीवन के साथ ही कलाओं का जन्म हुआ होगा। प्रागैतिहासिक मानव की सभी खोज अचानक से हुई, उदाहरण के लिए आग जलाने की खोज, दो पत्थरों को रगड़ते  हुए हुई। ऐसी ही कला का ज्ञान हुआ। जहां पर हम रहते हैं उन स्थानों पर पैरों एवं क्रिया कलापों के चिन्ह छोड़ते हैं तथा छाया से भी आकृतियां बनती हुई दिखाई पड़ती है,  छाया को देखकर हम उत्सुक हो जाते हैं।   प्रागैतिहासिक काल की कला को तीन भागों में बाँट दिया गया है। 1 पूर्ण पाषाण काल 2 मध्य पाषाण काल 3 उत्तर पाषाण काल   पूर्ण पाषाण काल ...

दीपावली

  दीपावली Child Art (Diwali)                                                दीपावली त्यौहार उत्साह उमंग अभिलाषा सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है ऐसी हमारी मान्यता है इस दिन घरों की सफाई करने के साथ ही दीपों से सजाया जाता है यह सारा दृश्य मन को प्रफुल्लित अवश्य करता है दीपावली मनाने के पीछे धर्म और विज्ञान के अपने-अपने तर्क हैं पर मैं यहां पर इनका उल्लेख करना नहीं चाहता यह तो हर व्यक्ति को पता है यहां पर सवाल दीपावली पर्व के महत्व का है हम इसे क्यों मनाते हैं यह हमारे लिए किस प्रकार उत्थान या आशा का उत्सव हो सकता है दीपावली का पर्व हर साल आता है और आएगा भी पर केवल किसी उत्सव को मना लेने से वह पूर्ण फल देगा ऐसी अभिलाषा करना स्वयं को ठगने जैसा है बल्कि मूल सवालों के उत्तर खोज कर उनको अपने जीवन में पूर्ण नहीं तो आंशिक रूप से जगह जरूर दें जिससे प्रकाश का त्यौहार सच्चे मायने में आशा अभिलाषा का उत्सव बन सके Diwali        ...

पाल चित्र शैली

             पाल शैली Pal Shaili         Pal Shaili  आठवीं सती में प्रारंभ हुई बौद्ध धर्म के अनुसार गोपाल नाम के एक सेनानायक ने 730 ईसवी में एक राजवंश की स्थापना की जो पाल राजवंश के नाम से जाना गया इसके पश्चात इस राजवंश में क्रमशः धर्मपाल देवपाल नारायणपाल महिपाल जैसे महत्वपूर्ण शासक हुए और पाल काल में  कला की भारी उन्नत हुई रामपाल पाल राजवंश का अंतिम शासक था इसको सामंत सेन ने परजित कर इस राज्य पर अधिकार कर लिया         पाल शैली के चित्रों में अजंता शैली की विशेषताएं मिलती हैं या यूं कहें यह जनता शैली की एक विकृति शैली का ही रूप है यहां पर चित्र 22.25 × 2.25 इंच के ताड़पत्र पर बने हैं पोथी में चित्र आयताकार या वर्गाकार अंतराल में अंकित किए गए थे चित्रों का विषय महायान और ब्रजायन बौद्ध ग्रंथों की विषयवस्तु रही है पाल शैली के अधिकांश पोथियां बंगाल बिहार नेपाल आदि केंद्रों पर चित्र की गई ताल पत्रों के मध्य में बने चित्रों का विषय महायान के देवी-देवताओं से संबंधित रहा है जबकि समन्वय पत्रों के दोनो...