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कलाकार जॉर्ज कीट

प्रसिद्ध कलाकार जॉर्ज कीट का जन्म 17 अप्रैल 1901 ईसवी को श्रीलंका के कैंडी नामक स्थान पर हुआ था इनके पिता भारतीय मूल के तथा माता डच परिवार की थी बाल्यकाल से ही जॉर्ज कीट को चित्र बनाने तथा नए नए अविष्कारों का शौक था अंग्रेजी साहित्य के अनुशीलन से इनमे राष्ट्रीयता की भावना का उदय हुआ तथा चित्रांकन में भी रुचि लेने लगे उच्च शिक्षा के लिए इन्हें कैंडी के ट्रिनिटी कालेज में प्रवेश दिलाया गया परंतु कला में विशेष रूचि के कारण 1918 में पढ़ाई छोड़ दी 1918 से 1927 तक हिंदू तथा बौद्ध कला और साहित्य का गंभीर अध्ययन किया रवींद्रनाथ ठाकुर की श्रीलंका यात्रा के समय उनके विचारों से अत्यधिक प्रभावित हुए 

1928 ईस्वी में इन्हें सिलोन आर्ट क्लब का सदस्य बनाया गया साथ ही भारतीय कला परंपराओं तथा सिंघल लोक कलाओं का अध्ययन भी किया 1928 में इन्होंने गोविंदअम्मा नामक नृत्यकी को मॉडल बना कर चित्र अंकित किए 1928 में ही इनकी नव भविष्य वादी कलाकार कहा गया

1933 के पश्चात जॉर्ज कीट की कला में एक ऐसा समय आया जब अमूर्त रूपों तथा रेखाओं की अधिकता होने लगी इस समय संश्लेषणत्मक धनबाद के प्रभाव इनकी शैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे भारतीय अद्वैत दर्शन के संदर्भ में अपने इन चित्रों को बनाया जयदेव कृति गीत गोविंद पर आधारित राधा कृष्ण की प्रेम लीला इनके प्रमुख विषय रहे हैं 1937 में वर्षा बिहार इसी क्रम में चित्रित इनकी सर्वश्रेष्ठ श्रृखला रही है

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और द्वितीय विश्व युद्ध की आशंकाओं से उनके चित्रों में विशेष विकृत और तनाव भी आ गया इसके पश्चात चित्रों में तनाव कम हो गया उन्होंने कोलंबो के गौतमी बिहार में गौतम बुद्ध का जीवन चित्र किया 1939 में इन्होंने दक्षिण भारत के मदुरई श्रीरंगम चिदंबरम नामक स्थानों की यात्राएं की तथा भारत के विभिन्न क्षेत्रों के कार्यक्रम से भी प्रभावित हुए भारतीय और पश्चात शैलियों का सुंदर समन्वय जॉर्ज कीट के चित्रों में दिखाई पड़ता है

 भील और जरासंध चित्र संसार की फासिस्ट शक्तियों के प्रतीक को दर्शाता ऐसा एक चित्र है 1946 के पश्चात पुनः श्रृगार विषयक नायिका का चित्रों का चित्रण प्रारंभ किया 1943 में श्रीलंका में ग्रुप 43 की स्थापना हो चुकी थी जिसका संस्थापक सदस्य जॉर्ज कीट को बनाया गया 1946 के अंत में हुए पुनः भारत आए और यहां पर अपने चित्रों की प्रदर्शनी कि यहीं पर इनका परिचय कुसुम नामक युवती से हुई जो टेंपल विधि सीखना चाहती थी बाद में दोनों ने विवाह कर लिया कुसुम के संसर्ग के आनंद से ही जॉर्ज कीट की नायिकाओं का वर्ण गुलाबी और मांसल सौंदर्य दिखाई पड़ता है

जॉर्ज कीट अपने चित्रों का विषय श्रीलंकाई प्रकृति एवं जीवन हिंदू ग्रंथों बोध कथाएं ही रही हैं जिनमें जातक कथाएं नायिका भेद राग रागिनी श्री कृष्ण लीला आदि प्रमुख हैं इन इन्होंने चोल कालीन प्रतिमाओं और कैंडी की लोक कला का प्रभाव भी इनकी शैली पर देखा जा सकता है

जॉर्ज गीत पाल गोंगा के रंगों की इन्द्रिय अभिव्यक्ति से प्रभावित थे अजंता सिगरिया की लयात्मक रेखा का मधुरता इनकी शैली में दिखाई पड़ता है तो दक्षिण भारत की कांस्य प्रतिमा उसे लय तथा गति गति अनुभव प्राप्त होता है लोक कला से स्पष्ट अभिव्यक्ति कि पद्धति अपनाई गई है  जॉर्ज कीट के संयोजन की शक्ति मुख्यतः रेखाओं पर ही अधिकतर निर्भर रही है जो आवश्यकतानुसार दृढ़ मोटी  बारीक हैं किंतु दुर्बल और अनिश्चित नहीं है

प्रमुख चित्र

भगवान बुध भगवान बुद्ध गीत गोविंद अनावृत हों तथा नायकों का के चित्र वर्षा बिहार

नोट 

गीत गोविंद चित्र इनके प्रसिद्ध का प्रमुख कारण रहे हैं इसके अतिरिक्त आइडियल ऑफ द किंग पुस्तक में रेखा चित्रों का एक विशाल संग्रह भी मिलता है
जन्म 1901 कैंडी
मृत्यु  1993

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