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Up Tgt Pgt Kala

Up Tgt Pgt Art Practice set  1   1 विष्णुधर्मोत्तर पुराण में चित्र के कितने भेद बताए गए 4 3 5 2 2 साधारण नर कितने ताल का होता है 10 11 9 8 3 राधा कृष्ण किस भंग में आते हैं सम भंग अभंग त्रिभंग अतिभंग 4 नीले रंग का विपरीत रंग है नारंगी पीला लाल नारंगी 5 अजन्ता के भित्त चित्रो में निम्नलिखित में से किस गुण की कमी है  रेखीय परिदृश्य  परिप्रेक्ष्य के बहुतायत की  गतिशीलता की   समुखीयता नियम  6 अजन्ता किस नदी के तट पर है  बघोरा  कृष्णा  नर्मदा  गंगा 7 अजन्ता के भित्ति चित्रों से पहले किस गुफा मे भित्त चित्रण हुआ  बाघ  जोगीमारा  सिंघनपुर  एलिफेंटा 8 अजन्ता के चित्रों का विषय आधारित है  हिंदू धर्म  बौद्ध धर्म  जैन धर्म  इस्लाम 9 1844 ई में सर्वप्रथम किस कलाकार ने अजन्ता के चित्रों की प्रतिलिपियाँ तैयार की  रॉबर्ट गिल  अवनीन्द्रनाथ  मुकुल डे  पर्सी ब्राउन 10 अजन्ता की वो कौन सी गुफाये है जिनमें आज भी चित्र मिलते है  1,3,8,5,6,2  7,8,11,6,19,20  1,2,9,10,16,17,6 ...

Vaidik kal ki Kala

वैदिक युग की कला     वेद भारतीय संस्कृत की प्राचीन धरोहर है जो भारत को ज्ञान और विज्ञान का दृष्टिकोण प्रदान करते हैं आज भी विश्व के बहुत से देशों में वेदों पर आए दिन नए नए शोध होते रहते हैं वैदिक संस्कृत के निर्माता आर्य थे जो ग्रामीण जीवन व्यतीत करते थे पशुओं को चलाना खेती करना आर्य जन का प्रमुख व्यवसाय था ये लोग घोड़े का प्रयोग करने में अत्यधिक निपुण थे     वैदिक काल में देवी देवताओं की पूजा होती थी परंतु प्रतिमा बनती थी या नहीं इस विषय में स्पष्ट रूप से कोई साक्षी प्राप्त नहीं होता है बिहार के लोरिया नंदन नामक स्थान से एक सोने की पत्री पर स्त्री आकृति बनाई गई है जिसका आकार 2x1 है आकृति में स्त्रीत्व के चिन्ह को बड़ा करके दर्शाया गया है जो संभवत उर्वरा के प्रतीक के रूप में कल्पित की गई होगी विद्वान इसे पृथ्वी माता या श्री लक्ष्मी की आकृति मानते हैं

Industrial art society

            इंडस्ट्रियल आर्ट सोसाइटी            इंडस्ट्रियल आर्ट सोसाइटी की स्थापना 16 अगस्त 1854 ईसवी को हुई थी राजेंद्र लाल मित्र जितेंद्र मोहन टैगोर तथा न्यायाधीश प्राप्त द्वारा स्थापित की गई थी कुछ समय उपरांत ज्योति नाथ टैगोर ने इस संस्था को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया प्रारंभ में इस सोसाइटी का उद्देश्य औद्योगिक कलाओं को प्रोत्साहन करना था 16 अगस्त 1864 को ब्रिटिश सरकार ने इसका अधिग्रहण कर अपने स्वामित्व में ले लिया तथा यह अब सोसायटी आफ गवर्नमेंट कॉलेज आफ आर्ट एंड क्राफ्ट कोलकाता के नाम से जाने जाने लगी        स्कूल ऑफ आर्ट की क्विनक्वेनियल नाम से मुकुल चंदन है एक रिपोर्ट 1933 ईस्वी में बंगाल के सरकारी अखबार में छपी जिसमें ग्राफिक कला किस प्रकार विद्यालय में अपना स्थान बनाया है इसका दिलचस्प वर्णन है         1916 में संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रिंट मेकिंग का अभ्यास कर रहे थे बर्था ई, जैक्स तथा एट्रेचर शिकागो आर्ट सोसायटी आफ एचर्स का सदस्य चुना गया इन्हीं से प्रेरित ह...

The Bombay Art society Mumbai

बंबई कला समाज 1888         मुंबई कलाकार सोसाइटी की स्थापना 1888 ई में हुई इस संस्था का मुख्य उद्देश्य कलाकारों को प्रोत्साहन देना और देश वासियों तक कला की पहुंच बढ़ाना था इसके लिए यहां पर वार्षिक कला प्रदर्शनों का आयोजन किया गया सेमिनार और संगोष्ठीयों का वृहद स्तर पर संगठित किया जा रहा है। यहां पर हर साल राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है जिसमें देश भर के कलाकार भाग लेते हैं अब तक अमृता सिंहगिल, महादेव बी धुरंधर के के हेब्बर और आरा के चित्र प्रदर्शनों में शामिल हो चुके हैं बॉम्बे आर्टिस्ट  जे जे स्कूल ऑफ आर्ट मुंबई , नेशनल विंडोज आफ मॉडर्न आर्ट, जहांगीर आर्ट रूम मुंबई में होती है 1910 में बॉम्बे आर्टिस्ट ने ए ब्रीफ हिस्टिक्स स्केच ऑफ द बॉम्बे आर्टिस्ट, विद स्पेशल रेफरेंस टू द पीरियार 1906-1910 शीर्षक से अंग्रेजी माध्यम में एक सामान्य प्रकाशित 1939 ईस्वी में सोसायटी के सैलून से यह सामान्य प्रकाशित हुआ यहां पर प्रदर्शनी या संभाषण और कला वार्ताओं का आयोजन होता है।  बॉम्बे आर्ट सोसायटी का  इतिहास            ...

Jain Chitra shaili

जैन शैली बालगोपाल स्तुति 16 ई - जैन शैली           जैन चित्रकला के प्रथम साक्ष्य साइतनवासल की गुफाओं से मिलते हैं हैं किंतु जैन धर्म से संबंधित अधिकांश चित्र मध्यकाल की पोथी चित्र शैलियों में प्राप्त करते हैं और नवीनतम चित्रों में सबसे उन्नत जैन शैली के चित्र ही माने जाते हैं भारतीय चित्रकला के इतिहास: कला कला जीवित रखने के लिए जैन शैली विशेष रूप से याद किया जाता है जैन शैली अजंता की महान शैली और लघु चित्र शैली को जोड़ने की एकमात्र कड़ी है जैन चित्र शैली का नामकरण   जैन शैली के नामकरण के संबंध में विद्वानों में काफी मतभेद रहा है इस शैली के चित्रों को जैन गुजरात पश्चिमी भारतीय शैली और अपभ्रंश शैली के नाम से भी पुकारा जाता है जो पाटन खंभात अहमदाबाद जैसलमेर बीकानेर जैसलमेर के जैन भंडारों में सुरक्षित हैं यहां से श्वेतांबर जैन हैं। संप्रदाय से संबंधित चित्र मिले हैं साथ ही दिगंबर ग्रंथों में शटखडगम ताडपत्री ग्रंथ है जो 1913 से 1920 के मध्य चित्रों हुआ दिगंबर संप्रदाय से संबंधित अन्य ग्रंथों में 1927 में नेमीनाथ मंदिर भीलडवाड़ा में लिखा गया जैन शैली से संबंधित...

N S Bendre

  एन.एस. बेंद्रे 1910-1992 चित्रकार एन एस बेंद्रे कला यात्रा और जीवन परिचय             इंदौर में जन्मे एनएस बेंद्रे ने मुंबई कला विद्यालय कलाकार को इंदौर और इंदौर में देवलालीकर से कला की शिक्षा प्राप्त की बेंद्रे साहब देश के प्रसिद्ध कलाकार होने के साथ-साथ देश के प्रतिष्ठित बड़ौदा विश्वविद्यालय में चित्रकला के प्रोफेसर भी रहे हैं साकी शैली में। ब्रिटिश अकादमी परंपराओं भारतीय लघु चित्र बंगाल शैली की स्वच्छंदता और सेज़न व गोगान जैसे उत्तर प्रभाववादी आदि कलाकार का प्रभाव दिखाई पड़ता है              एनएस बेंद्रे का पूरा नाम नारायण श्रीधर बेंद्रे है जीवन चरम गरीबी व एकताकीपन और दुख से बिता लेकिन कला आराधना कभी भी नहीं छोड़ी जो उनके जीवन का ध्येय बन गया था। ज्योति भट्ट, शांति दवे, जी आर संतोष, गुलाम मोहम्मद शेख, रतन परिमू , त्रिलोक कॉल आदि बेंद्रे साहब के प्रमुख शिष्य थे              बेंद्रे साहब की संपूर्ण कला यात्रा को तीन भागों में विभक्त कर सकते हैं पूर्व काल के चित्रों में वाश ...

करवा चौथ और लोक कलाओं का अद्भुत संसार

करवा चौथ और लोक कलाओं का अद्भुत संसार करवा चौथ की पूजा में प्रयोग होने वाली सींके            भारत उत्सवधर्मी देश है जहां पर प्रत्येक मास में कोई न कोई तीज त्यौहार अवश्य होता है इन अवसरों पर घरों को विशेष रुप से अलंकृत और सुसज्जित किया जाता है आस्था एवं विश्वास को मूर्त रूप देने के लिए कुछ चित्रों का निर्माण किया जाता है जो हमारी लोककला का प्रतिनिधित्व करते हैं जो परंपरा मुख्य रूप से परिवार की स्त्रियों द्वारा ही आगे बढ़ाई जा रही है जो किसी संस्थान में जाकर कलाकारी नहीं सीखाती हैं फिर भी उन्हें अपनी विरासत से चित्रण का अद्भुत कौशल प्राप्त होता है वैसे तो यह चित्र प्रतीक या किसी कहानी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो उस त्यौहार की मूल आत्मा होती है सभी लोग इन्हीं को उस शक्ति का स्वरूप मानकर पूजा अर्चना करती हैं जो उनके कुल समाज परिवार की रक्षा और समृद्धि प्रदान करती है       करवा चौथ हमारे देश का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाता है इस अवसर पर सुहागन स्त्रियां व्रत रखती है यह त्यौहार उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश...