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The Bombay Art society Mumbai



बंबई कला समाज 1888

       मुंबई कलाकार सोसाइटी की स्थापना 1888 ई में हुई इस संस्था का मुख्य उद्देश्य कलाकारों को प्रोत्साहन देना और देश वासियों तक कला की पहुंच बढ़ाना था इसके लिए यहां पर वार्षिक कला प्रदर्शनों का आयोजन किया गया सेमिनार और संगोष्ठीयों का वृहद स्तर पर संगठित किया जा रहा है। यहां पर हर साल राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है जिसमें देश भर के कलाकार भाग लेते हैं अब तक अमृता सिंहगिल, महादेव बी धुरंधर के के हेब्बर और आरा के चित्र प्रदर्शनों में शामिल हो चुके हैं बॉम्बे आर्टिस्ट जे जे स्कूल ऑफ आर्ट मुंबई , नेशनल विंडोज आफ मॉडर्न आर्ट, जहांगीर आर्ट रूम मुंबई में होती है 1910 में बॉम्बे आर्टिस्ट ने ए ब्रीफ हिस्टिक्स स्केच ऑफ द बॉम्बे आर्टिस्ट, विद स्पेशल रेफरेंस टू द पीरियार 1906-1910शीर्षक से अंग्रेजी माध्यम में एक सामान्य प्रकाशित 1939 ईस्वी में सोसायटी के सैलून से यह सामान्य प्रकाशित हुआ यहां पर प्रदर्शनी या संभाषण और कला वार्ताओं का आयोजन होता है।

 बॉम्बे आर्ट सोसायटी का  इतिहास     

     Bombay Art society ने अभिव्यक्ति और कला को एक नया आयाम दिया अंग्रेजों के समय भारतीय कला मुख्य रूप से दिल्ली मुंबई मद्रास कोलकाता जैसे शहरों में सिमट कर रह गई थी इस सोसाइटी का गठन मुख्य रूप से अंग्रेज चित्रकारों को प्रोत्साहन देने के लिए किया गया था परंतु धीरे धीरे भारतीय कलाकारों की कलाकृतियां भी स्वीकार की जाने लगी राजा रवि वर्मा गणपति म्हात्रे जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों ने आर्ट सोसाइटी की वार्षिक प्रदर्शनी में भाग लेकर पुरस्कार जीते द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत आजाद हुआ तत्पश्चात सामाजिक आर्थिक परवेश बदला और वैज्ञानिक तकनीकों पर जोर दिया जाने लगा जिससे कलाकारों की सृजन शक्ति पर भी व्यापक असर डाला भारतीय कला के इतिहास में एक नवीन जागृति देखने को मिलती है इस समय का कलाकार अधिक प्रयोगवादी हो गया था वह अपने विचारों को एक नई चित्र भाषा के रूप में बढ़ता चला जा रहा था      

        मुलर ने सोसाइटी के उद्देश्यों को बताते हुए कहा था इस संस्था की स्थापना खासकर शौकीन तथा देसी कलाकारों को मुख्यधारा से जोड़ना है कार्यों की समालोचना पुरस्कार वितरण करना छोड़ दिया प्रदान करना आदि मुंबई आर्ट सोसाइटी ने पिछले 131 वर्षों में कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है स्वतंत्रता के पश्चात एक नए युग की शुरुआत हुई समकालीन कलाकारों ने पूर्व और पश्चिम के मध्य एक विश्लेषण परक रेखा खींचा जो भारतीय कला को लंबे समय तक प्रभावित करती रही अब भारतीय कलाकारों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनानी प्रारंभ कर दी थी फिर भी समकालीन कला अधिकांश देशवासियों के लिए रहस्य का विषय बनी रही

      समकालीन कला ने अपनी पहुंच भले ही बुलंदियों तक पहुंचा ली थी परंतु सामान्य वर्ग आज भी धरातल पर ही नजर आता है यह समस्या भारतीय कला के लिए निश्चित तौर पर एक गंभीर विषय है बॉम्बे आर्ट सोसायटी लगातार इसी समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत रही है इसके लिए सोसायटी द्वारा समय-समय पर वार्षिक प्रदर्शन कलाकारों को छात्रवृत्ति आ संगोष्ठी या तथा डॉक्यूमेंट्री और फिल्म मेकिंग से संबंधित कई प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं जिनसे कला की समाज लोगों में बड़ी है मुंबई और सोसाइटी लगातार अपने प्रयासों द्वारा देश के कला विद्यार्थियों तथा सामान्य जनों को जोड़ने के लिए प्रयासरत रही

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