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ललित कला अकादमी

ललित कला अकादमी ललित कला अकादमी का उद्घाटन 15 अगस्त 1954 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम आजाद द्वारा नई दिल्ली में किया गया। 11 मार्च 1957 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत रजिस्टर्ड कराया गया। उद्घाटन में अकादमी के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए मौलाना अब्दुल कलाम ने कहा कि अकादमी को अतीत की गौरवशाली परंपराओं को संरक्षित करने और हमारे आदिवासी कलाकारों के काम से उन्हें समृद्ध करने के लिए काम करना चाहिए ललित अकादमी ने भारत में समकालीन आधुनिक लोक और आदिवासी कला की जीवंत जटिलताओं और सामने आने वाले पैटर्न को प्रतिबंधित करने वाले।  क्षेत्रीय कार्यालय  ललित कला अकैडमी के चेन्नई, कोलकाता, भुवनेश्वर, गढ़ी में क्षेत्रीय कार्यालय और शिमला, अहमदाबाद, अगरतला, पटना में उप केंदों  है। प्रकाशन समकालीन कला पत्रिका का प्रकाशन ललित कला अकादमी नई दिल्ली द्वारा किया जाता है कार्य

राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा नई दिल्ली

राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा भारतवर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर कलाओं को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की स्थापना जयपुर हाउस, नई दिल्ली में 29 मार्च 1954 में स्थापित की गई। इसका इसका अध्यक्ष हरमन गोएट्स को बनाया गया, कुछ समय पश्चात 1956 में मुकुल चंद्र डे को अध्यक्ष के पद पर प्रतिष्ठित किया गया। इस कला दीर्घा का संचालन भारत सरकार के पास है।  स्थापना   1954 बेबसाइट    https://sites.google.com/view/ngmaindia/ngma उद्देश्य राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की स्थापना का मुख्य उद्देश्य 18 वीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान तक की कलाकृतियों का संग्रह तथा उनका समय-समय पर प्रदर्शन भी रहा है यहां  पर पुस्तकालय और समकालीन पत्रिकाओं का एक कलेक्शन भी है यहां पर देश के जाने-माने कलाकारों की कृतियां संग्रहीत हैं इनमें चित्रकला, मूर्तिकला, छापाकला और फोटोग्राफ सम्मिलित हैं।  राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की शाखाएं राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा की सफलता को देखते हुए इसका विस्तार बेंगलुरु एवं मुंबई में शाखाएं खोलकर किया गयाहाल है।

के सी एस पणिकर

KCS PANNIKAN की कला यात्रा  कला में प्रयोगवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा देने वाले कलाकार के सी एस पणिकर  का जन्म कोयंबतूर में हुआ था इनका पूरा नाम कोवलेजी चिरामपुथुर शंकर पणिकर है। पिता की मृत्यु के बाद डाक विभाग में इन्होंने नौकरी कर ली परंतु कला के प्रति लगाव के कारण त्यागपत्र देकर मद्रास कॉलेज आफ स्कूल आर्ट में दाखिला लिया। वहां पर देश के प्रसिद्ध मूर्तिशिल्पकार देवी प्रसाद राय चौधरी का सानिध्य मिला उनकी देखरेख में इन्होंने अपनी कला शिक्षा पूरी की। आरंभिक कार्य मालाबार तट पर जल रंग माध्यम में झील, नाव, नावघाट, बाजार, नारियल के पेड़ आदि के चित्र बनाते हुए व्यतीत हुआ। इस काल के प्रमुख चित्र हैं कैनाल डी ग्रेव। केसीएस पणिकर ने परंपरागत शैली से प्रेरित होकर सौंदर्य के नए प्रतिमान स्थापित किया जो उनके चित्र न्यूड और स्लीपिंग न्यूड में दिखाई पड़ते हैं 1950 की कला शैलियों में यथार्थवादी प्रभाव भी चित्रों पर दिखाई पड़ता है। जो बच्चा, गार्डन श्रृंखला में देखा जा सकता है 1963 से लेकर 1975 तक का समय के सी एस पणिकर की कला यात्रा में स्वर्णिम काल रहा है। इस अवध में आदिवासी ज्यामितिय ...

group 1890

ग्रुप 1890 ग्रुप 1890 का गठन प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप एवं बंगाल शैली के प्रकृति एवं आदर्शवाद के विरोध में किया गया था। आधुनिक चित्रकला के विकास में इस ग्रुप ने निर्णायक भूमिका अदा की थी। 1962 सभी सदस्यों की बैठक महेंद्र पांड्या के घर पर हुई थी। इसी घर के नंबर के आधार पर इस ग्रुप का नाम करण करने का सुझाव जे स्वामीनाथन ने दिया जिसे सभी ने सहर्ष मंजूर कर लिया। इस ग्रुप के विषय में कॉन्ट्रा नामक पत्रिका में जे स्वामीनाथन ने प्रकाशित किया। ग्रुप का घोषणा पत्र Octavio paz (मैक्सिको के कवि) तथा जे स्वामीनाथन ने मिलकर तैयार किया। ग्रुप 1890 की प्रदर्शनी 1890 ग्रुप की प्रदर्शनी 7 जुलाई 1963 ई को जवाहर भवन नई दिल्ली में आयोजित की गई जिसका उद्घाटन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं डित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। इसके विषय में जी एम शेख एक दिलचस्प टिप्पणी करते हैं 1963 में चीन युद्ध के बाद भारत की हार से पंडित जवाहरलाल नेहरू टूट गए थे जिससे उद्घाटन के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के इच्छुक नहीं थे पर स्वामीनाथन ने उनसे कहा नेहरू जी हम आपको एक लेखक के रूप में आमंत्रित करना चाहते हैं जिसे नेहरू ज...

बीएन गोस्वामी

भारतीय लघु चित्रकला इतिहास के शिल्पकार बी एन गोस्वामी चित्रतल का अवलोकन करते समय आंख चमकदार रंगों को ग्रहण कर विवरण की बारीकी एवं संदर्भ को पकड़ सके B N गोस्वामी, 2016 इंडियन एक्सप्रेस बी एन गोस्वामी की शिक्षा एवं कला अभिरुचि देश के प्रतिष्ठ प्रतिष्ठित कला समीक्षक और आर्ट हिस्टोरियन बी एन गोस्वामी का जन्म का जन्म 15 अगस्त 1933 को पंजाब प्रांत (पाकिस्तान) में हुआ था। आरंभिक शिक्षा के बाद अमृतसर के हिंदू कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से 1954 में मास्टर के डिग्री हासिल की। 1956 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चुने गए तथा बिहार कैडर में काम करने के दौरान कला शिक्षा की पढ़ाई जारी रखी और 1958 ईस्वी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पंजाब विश्वविद्यालय में ललित कला संग्रहालय का निर्देशन किया इनका विवाह इतिहासकार एवं शिक्षाविद करुणा से हुआ बीएन गोस्वामी ने कला एवं संस्कृति पर 25 से अधिक पुस्तकों को लिखा। इन्होंने मुख्य रूप से लघु चित्रों के ऊपर अपना शोध परक कार्य किया। इसी के लिए यह कला जगत में विशेष तौर पर जाने जाते हैं   बीएन गोस...

सचिन तेंदुलकर की मूर्ति

Sachin Tendulkar ki Murti I feel as if I met God Pramod Kamble सचिन तेंदुलकर की लाइफ साइज (आदम कद)की मूर्ति वानखेडे क्रिकेट स्टेडियम मुंबई में स्थापित की गई सचिन तेंदुलकर का स्टैचू ब्रॉन्ज माध्यम में बनाया गया है इस मूर्ति का उद्घाटन विश्व कप 2023 के भारत और श्रीलंका के मध्य खेले गए वनडे मैच में किया गया इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि, शरद पवार, राजीव शुक्ला आदि मौजूद थे अहमदनगर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रमोद कामले ने सचिन तेंदुलकर को जीवंत प्रतिमा का निर्माण किया जो ट्रेडमार्क  मुद्रा में बनी है बाया पैर फैलाए हुए लिफ्टेड ड्राइव के लिए तैयार शरीर थोड़ा झुका हुआ सर ऊंचा तथा बाला आसमान की तरह उठा हुआ है यह मुद्रा दर्शकों को सदैव लुभाती रहती है यह त्रिभंग मुद्रा में बनाई गई है यह प्रतिमा मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा स्थापित की गई है

A H Muller

  A H Muller आर्ची बाल्ड मुलर की कला यात्रा  credit by DAG ए एल मुलर  का जन्म  11 मार्च 1878 को कोच्चि केरल में हुआ था इनका पूरा नाम Archibald Herman Miller है मद्रास स्कूल आफ आर्ट से कला की शिक्षा प्राप्त की मूलर को राजा रवि वर्मा की अकादमिक शैली अत्यधिक प्रीति इन्होंने हिंदू पौराणिक विषयों पर आधारित कई प्रसिद्ध रचनाएं की  मूलर के चित्रों में रोमन ग्रीक शास्त्री शैली के तत्व स्पष्ट तौर पर देखे जा सकते हैं 1922 ईस्वी में दरबारी चित्रकार के रूप में बीकानेर के शाही परिवार शिकार के दृश्य एवं ऐतिहासिक विशेष से संबंधित चित्र बनाएं 1928 ईस्वी में जोधपुर के दरबार के लिए पौराणिक विषयों से संबंधित चित्रों की एक श्रृंखला बनाई अल मूलर के चित्र बकिंघम पैलेस , लंदन व विक्टोरिया अल्बर्ट संग्रहालय तथा भारत के चुनिंदा संग्रहालय में चित्र संग्रहीत हैं 1911 में मुंबई आर्ट सोसाइटी का गोल्डन पुरस्कार प्रिंसेस गिवेन टू ए ब्राह्मण बॉय गिफ्ट चित्र पर मिल ए एल मुलर की मृत्यु 24 सितंबर 1960 को जोधपुर राजस्थान में हुई थी ए एल मुलर के चित्र  Princess giving giving to a...