गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

आज हम हैं, वो कल का जमाना था


आज हम हैं, वो कल का जमाना था
सोचा था ना खोएंगे, वो वक्त पुराना था
जाना था और चल भी दिए,
 जिन्हें दुर तक जाना था
आती हैं वो आवाजें क्यों,
जब उनको चले ही जाना था
बुलाती हैं ये खुशियां हमें क्यों, 
जब हमें ही छोड़ के जाना था
बीता बचपन और हम बड़े हो गए,
क्या इसको यू ही गुजर जाना था
याद आता है भईया वो आपका,
मक्खी पकड़ कर कानों में छिपाना।
वो हवा का झोंका अब सोने नहीं देता,
बुझा गया दीपक,अब रोने नहीं देता
मंजिल दूर थी कुछ दूर साथ जाना था
जाना था और चल भी दिए,
जिन्हें दूर तक जाना था
जिन्हें दूर तक जाना था......
                      By Kk3

मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

UGC net December 2019 visual arts Solve paper

ugc net visual arts

1. कलाकारों का सही क्रम
  मेसैचियो 1401, डोनातेलो 1386, बोत्तिसेली1445, 
  एंड्रिया डेल वेरोचियो 1435
उत्तर स्वयम  क्रम में लगायें
2. ऑफसेट प्रिंटिंग में किस प्रकार की छवि  निर्मिमित होती है
    1 पूर्णतः सामान       2 प्रतिलोम   3लघु कृत   4 विपर्यस्त
उत्तर - अपसेट प्रिंटिंग में इमेज सीधी छपती है इसलिए पहला विकल्प सही है
3. मिलान करें
उत्तर - प्रसून जोश-सेंसर बोर्ड , 
शाहिद कपूर- अभिनेता
प्रदीप सरकार- विज्ञापन करता,
 अविनाश पसरिचा -फोटोग्राफर
4. मिलान करें
उत्तर  रीलिस्ट मेनिफेस्टो -गुस्ताव कुर्बे 
फ्यूचरिस्ट मेनिफेस्टो- फिलिपो टोमैसो मेरिनोत्ति
 क्यूबिस्ट मेनिफेस्टो - अल्बर्ट ग्लेजेस और मेलजिजर
दादा मेनिफेस्टओ -हयुगो बाल और ट्रिस्टन तजारा
5. निम्नलिखित में से कौन सा तत्व छापा से संबंधित है
 1 मोल्डिंग  2 एक्वाटेंट 3 वीविंग 4 वास
उत्तर एक्वाटिंट छापा कला की एक विधा है
6. पुनर्जागरण कालीन चित्रकला निम्नलिखित में से किसके लिए प्रसिद्ध है 
1 रेखीय परिप्रेक्षया 2 प्रकाश योजना 
3 त्वरित गति 4 स्वाभाविक आकार
उत्तर रेखीय परिप्रेक्ष्य, प्रकाश योजना, स्वाभाविक आकार आदि पुनर्जागरण कालीन चित्रकला की प्रमुख विशेषताएं
7. अकबर कालीन मुगल लघु चित्रकला को किस रूप में संदर्भित किया जाता है  
1 जिल्द साजी, जिसे मुरक्का कहा जाता था
2 राज नामा और अकबरनामा जैसे चित्रण 
3 साहित्यिक कार्यशाला, जिसे किताबखाना कहा जाता था
 4 रागमाला चित्र
उत्तर अकबर के समय रागमाला को छोड़कर शेष शायरी विशेषताएं मिलती है
8. नीचे दी गई कृतियों में से राडिन की कृतियों को पहचानिए 
1 द एज ऑफ ब्राउन।      2 द थिंकर 
3 क्लाउडगेट       4 द बुर्घर्स  ऑफ  कैलेस
उत्तर cloud gate क्लाउडगेट अनीश कपूर द्वारा बनाया गया है बाकी शेष कलाकृतियां राडिन द्वारा निर्मित है
9. गुप्तकालीन सुल्तानगंज से प्राप्त बुध की प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा किस संग्रहालय में रखी है 
1 ब्रिटिश म्यूजियम लंदन, बरनिंघम 
2 बर्मिंघम म्यूजियम, बर्मिंघम
3 लूब्र म्यूजियम, पेरिस
4 राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली
उत्तर 2
10. कागज का सही आकार ज्ञात कीजिए
1 रॉयल 25"x20"          2 आईवरी 22"x28"
3 इम्पीरियल 22"x30"   4 A6  4.1"x5.8"
उत्तर उपरोक्त अपने सही आकार में लगे हैं
11. मूर्ति कारों के नाम लिखिए
 1 बेरेनिनी 1598   2 ब्रुनेलेशी 1377
३  हानसन 1925  3 मातिस 1869
उत्तर 2, 1, 3, 4
13. किस प्रकार के निरूपण में सब्जेक्ट के गुणों की अति रंजना की जाती है
 1 प्राकृतिक चित्र 2 छायाचित्र   3  व्यंग्य  चित्र     4 चिड़ा
उत्तर  3 व्यंग्य चित्र में सब्जेक्ट के यथार्थ गुणों को उसके चित्र में संयोजित किया जाता है
14. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान नैतिक और सामाजिक मूल्यों के चरण में उत्पन्न कल आंदोलन है
 1 घनवाद   2 अभिव्यंजनावाद  3 फाववाद 4 दादावाद
उत्तर 4 प्रथम विश्व युद्ध के समय उत्पन्न दादा वाद आंदोलन विद्रोह निराशा व भय फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था दादा वादी घोषणापत्र में कला विरोधी तत्वों का अंकन किया गया था
15. मिलान करें
  1 बटरफ्लाई फॉरमेशन -कृष्णा रेड्डी 
   2 वूमेन एंड गोट - के लक्ष्मण गौड़ 
   3 देवी - ज्योति भट्ट
   4 द एक्लीप्स -सोमनाथ होर
उत्तर उपरोक्त का मिलान सही है
16. समय के अनुसार व्यवस्थित करें
 1 डांसिंग गर्ल  2 यक्ष 3 सारनाथ बुद्ध  4 शिव नटराज
उत्तर उपरोक्त क्रम सही है
17. निम्नलिखित में से कौन संयुग्मन फ़ाइल प्रारूप से 
संबंधित है
1CMYK       2 PNG      3 GIF.   4 RGB
उत्तर 2और 3 दोनों विकल्प सहीी है (CMYK-RGB ये दोनों प्रिंटिंग कलर मॉडल है)
(PNG-GIF ये दोनों फाइल फॉर्मेट है )
18. सुमेलित करें
1  Abstract speed - जिकोमो बल्ला 
2 City square-अल्ब्रतो ज्योकोमेत्ति
3 रामायण- यामिनी राय
4 Head of Shiva- Nandlal BOS
19.विष्णु प्रतिमा विज्ञान में गदा को निम्नलिखित में से किस रूप में दर्शाया गया है 
1 संगिनी   2 शाश्वत प्राणी   3 पुरुष साथी   4 वाहन
उत्तर 1
20 मिलान कीजिए
1स्टैनली विलियम हैटर -ब्रिटिश प्रिंट मेकर
2 रेब्रंट -डच प्रिंट मेकर 
3 अल्बर्ट ड्यूरर  जर्मन प्रिंट मेकर
4 फ्रांसिस गया-स्पेनिश प्रिंट मेकर 
उत्तर उपरोक्त मिलान सही है
21. अभीकथन (A): wood cut  छपाई की तकनीक रही हैै जिसका अभिव्यक्ति और प्रचार के लिए किया जाता है 
तर्क  (R) : क्योंकि काष्ठ सुलभता पूर्वक  और आसानी सेे कटने वाली चीज है
उत्तर A और R दोनों सही है
22. 4 रंगों के बाद जब छपाई में दूसरे रंग का प्रयोग करते हैं तो इसे क्या कहते हैं
1 आपसेट में 4+1 रंग     2 पांच रंग की छपाई 
3 अतिरिक्त रन              4 विशेष रंग
उत्तर 4
23. प्लेनोग्राफी निंलिखित मे से किस छपाई प्रक्रिया से संबंधित है 
1 सरीग्राफी  2 इंटैग्लियो  3 लैटर प्रेस  4 रोटो ग्रव्योर
उत्तर 1
24. फड़ लोक कला किस का प्रारूप है
1 मधुबनी   2 कालीघाट  3 पुरलिया   4 भीलवाड़ा 
उत्तर 4   यह  एक राजस्थान की लोक चित्र शैली है जिसमें बापूजी एवं अन्य स्थानी लोक देवताओंं के के चित्र बनााए जाते हैं इनके प्रदर्शन के अवसर लोकगीतों का भी आयोजन किया जाता है
25. उत्कीर्णन के लिए निम्नलिखित में से किस प्रकार के काष्ठ को अधिक पसंद किया जाता है 
1 जिनमें तेल की मात्रा न्यूनतम हो 
2 जो तेलीय नहीं हो
3 जिनमें तेल की अधिक मात्रा हो 
4 जिनमें खनिज की मात्रा न्यून हो
उत्तर 3
26 रंग के नीचे की परतें और आरेखन का पता लगाने के लिए किसी चित्र की तकनीकी जांच को क्या कहा जाता है 
1  एक्स-रे विश्लेषण    2 पराबैंगनी विश्लेषण 
3  जेरॉक्स reflector graphy  4 इंफ्रारेड फोटोग्राफी
नीचे दिए गए कूट कूट में से सही विकल्प चुनिए
उत्तर 1 ,2,4 सही है 
27. निम्नलिखित स्मारकों को कालक्रम के अनुसार लगाओ
1 अलाई दरवाजा 1311      2 ताजमहल 1632-53
3 गोल गुम्बद 1626-57     4 हुमायूं का मकबरा 1547
उत्तर 1,4,2,4
28. अजंता की कौनसी गुफाएं अपने भीतर चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं
1  29 गुफाएं हैं।  2 सभी विहार हैं 
3   5 चैत्य          4  श्री फर्गुसन द्वारा संख्या दी गई
उत्तर 1,3,4 सही है
 29. 
उत्तर 2
30. पुस्तक प्रेजेंस आफ शिवा किसने लिखी
1 E H Gombrich     2 Stella kramrisch
3 R  Collingwood. 4 Rudolf arnheim
उत्तर 2 the the presence of Shiva, the Hindu temple, manifestation of Shiva, Exploring Indian sacred Art,  the Art of Nepal आदि पुस्तके हैं
31. मिलान करें
1 नागजी पटेल  -बेनियम गेटवे
2जी रविन्द्र रेड्डी - द गर्ल  विद फ्लावर
3पुष्पमाला  एन - एंड इन प्हाट  हेपेंड
4एन एन रिमजों -मैन इन द चाक एर्कल
उत्तर उपरोक्त का मिलन सही हे 
32. अमूल फॉन्ट को निम्नलिखित में से क्या संज्ञा दी जाती है 
1  लोगोटाइप   2 साइन   3 सिंबल   4 मार्क
उत्तर 1 किसी कंपनी, व्यक्ति या समूह के नाम को लोगोटाइप कहते हैं जो एक विशेष प्रकार से लिखा जाता है
33. किसी विज्ञापन अभिकर्ता की आवश्यकता तैयारी के सही क्रम की पहचान कीजिए
1  बाजार अनुसंधान       2 सृजनात्मक रणनीति
3 निर्माण                     4 उपभोक्ता की प्रतिपुष्टि
उत्तर 1,2,3,4 विज्ञापन कर्ता बाजार के बारे मेंं जानकारी जुटाकर अपनी  सृजन की रणनीति  बना कर उसके अनुसार ही वह अपने विज्ञापनों का निर्माण कर उपभोक्ताओं से फीडबैैक प्राप्त
34. के जी सुब्रमण्यम जाने जाते हैं 
1 चित्रकार  2 मूर्तिकार  3 छापाकार  4 फिल्मकार
उत्तर 1
35. फोल्डर विज्ञापन  की किस श्रेणी के अंतर्गत आता है 1 परागमन विज्ञापन।      2 बाह्य क्षेत्रीय विज्ञापन 
3 प्रत्यक्ष मेल                4 अंचल अभिकल्प
उत्तर 3 जिन विज्ञापनों को सीधे विज्ञापन कर्त्ता चुने हुए उपभोक्ताओं तक सीधे भेजता है वह डायरेक्ट मेल कहलाते हैं जैसे कैटलॉग, कैलेंडर ,फोल्डर आदि
36. संप्रेषण की प्रक्रिया के क्रम को लगाएं
1 संचरण  2 प्रेषक का संदेश  3 अर्थ स्पष्ट करना
4 कूट बद्ध करना
उत्तर 2,4,1,3
37. कागज का अंतरराष्ट्रीय आकार है
1 A1    2 A2    3 Demy size   4 Crow size
उत्तर  1 और  2 सही है
38. निम्नलिखित में से किसके दौरान चित्रकारी तकनीकी में टेक्स्ट और कोलाज को समावेशित किया गया 
1 अतियथार्थ   2 यथार्थवाद   3 फाव वाद   4 घन वाद
उत्तर 4 घनवादी कलाकारों ने अपने चित्रों में टेक्स्ट और कोलाज का सर्वप्रथम मिश्रित प्रयोग किया
39 मार्क आर्नेस्ट ने अपने कला कार्य में कौन सी तकनीक का उपयोग किया था 
1 मोंताज    2 फ्रोंताज   3 फेस्को 4 कोलाज
उत्तर 1,2,4 तकनीकों मेंं कििया है
40. सुमेलित करें
1आकृति - दि आयामी    3 रूप -3 आयामी
3 मान - वर्ण की तीव्रता का फीकापन  और गहरा पन
4 एकता- पूर्णता की प्रतीति और बोध
उत्तर उपरोक्त मिलान सही है
41.  हिक्की गजट को निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है 
1 ब्रिटिश गजट        2 इंडियन गजट
3 बंगाल गजट         4 कोलकाता गजट
उत्तर 3 जेम्स गस्ट हिक्कि द्वारा प्रकाशित अकबर को ही बंगाल गजट कहा जाता है
42. लेटर प्रेस किससे संबंधित है
1 हाट टाइप्स  2 कोल्ड टाइप्स 3 नेगेटिव प्लेट 4 सलिड टोन
उत्तर 1,4 दोनों विशेषताएं मिलती हैं
43. वह जापानी कलाकार जिसने स्वयं के बारे में लिखा था ओल्ड मैन मेड अबाउट पेंटिंग 
1 कोरीन  2 सोता त्स    3 उता मारो   4 होकू साई
उत्तर 4
44. वुंड्स श्रंखला किसकी है
1 अनुपम सूद  2 सोमनाथ  3 सनतकर 4 लक्षमा गौंड
उत्तर 2
45. इंटेगलियो प्रिंटिग के सही क्रम का चयन करें
1 प्लेट   2 फेल्ट   3 ग्राउंड  4 पेपर
उत्तर 1,3,2,4
46. दृश्य कला में किन कला रूपों का अन्वेषण किया जाता है
1  चित्रकला  2 मूर्तिकला   3 नृत्य   4 वास्तुकला
उत्तर 1,2,4 विकल्प सही है
47.वियतनाम के सैनिकों को समर्पित वी आकार के काले रंग के ग्रेनाइट की दीवारों वाले स्मारक का निर्माण किसने किया 
1 माया बिल  2 जीवेश बागची 3 राबर्ट  स्मिथसन  4 अल्फेड  लेस्ली
 उत्तर 1
48. रोदानिनी पियेटा नामक मूर्ति को किसने बनाया
1 फिलिप किंग  2 डैना तेलो  3 मैलोल    4 एंजेलो
उत्तर 4
49. छापा कार हैं 
1 सनत कर                 2 लक्ष्मा गौड़ 
3 जोगेन चौधरी          4 आर शिवकुमार
उत्तर 1,2 छापा कार हैं
50.
उत्तर 2
51. ग्रुप 8 के संस्थापक सदस्य कौन कौन थे
1लक्ष्मी दत्त 2जगदीश डे 3रतन परिमू 4जगमोहन चोपड़ा
उत्तर 1,2,4
52. सारनाथ स्तंभ के 4 शेरों की अभिव्यक्ति यों को निम्नलिखित में से किस की संज्ञा दी जाती है
1 नेशनल लोगो          2 नेशनल सिंबल 
3 नेशनल एल्बम        4 नेशनल साइन
उत्तर 3
53. सोमनाथ होर किस रूप में जाने जाते हैं 
1 कला समीक्षक और इतिहासकार 
2 चित्रकार     3  मूर्तिकार    4 छापा कार
उत्तर 2,3,4
54. निम्नलिखित में से किसने कलर विस्कोसिटी प्रिंटिंग को लोकप्रिय बनाया 
1 कैरोल समर्स       2 पाल लीग्रेन 
3 स्टैनली हेटर        4  विलियम ब्लेक
उत्तर 3
55. चैडविक क्या थे 
 1 अमरिकी मूर्तिकार।      2 ब्रिटेन के मूर्तिकार 
2  स्वीडन के मूर्तिकार      3 फ्रांस के मूर्तिकार
उत्तर 2
56. छापा कारों का सही क्रम लगाइए 
1 केजी सुब्रमण्यम1924    2 सोमनाथ होर 1921
2 कृष्णा रेड्डी 1925।          3 ज्योति भट्ट 1934
उत्तर 2,1,3,4
57. लेपन स्वरूप की मणि नक्काशी विधि निम्नलिखित में से किसे कहते हैं
1 वेल्डिंग   2 निर्देशन   3 ढालना   4 उत्कीर्ण
उत्तर 4
58. आर जी कॉलिंगवुड निम्नलिखित में से क्या थे
1 ब्रिटिश मूर्तिकार           2 ब्रिटिश दार्शनिक
3 कला इतिहासकार।      3  ब्रिटिश चित्रकार
उत्तर 2,3
59.कला दृश्यमान  का पुनर उत्पादन नहीं करती बल्कि यह दृश्यमान को बनाती है किसने कहा 
1 फ्रांसिस बेकन          2 पाल क्ली     
3 वेसिली कंडिस्की।    4 जार्ज रूओ
उत्तर2
60.
उत्तर 1
61 लेविगेटर का प्रयोग किस कार्य के लिए किया जाता है
उत्तर- लेविगेटर का प्रयोग लिथोग्राफ में पत्थर को किसने के लिए किया जाता है
62.निम्न में से उन कलाकारों की पहचान कीजिए जो मूर्तिकार के साथ-साथ चित्रकार भी है
1 चिंतामणि कर           2 भावेश सान्याल 
3  सुनील पाल              4 माधवा भट्टाचार्य
उत्तर 1,2,3
63. छापा कारों का सही क्रम है 
1 रेंब्रंट 1606                        2 गोया 1746
3 एडवर्ड हापर 1882           4 जेम्स ensor 1860
उत्तर 1,2,4,3
64. Night, death and the devil किसकी कृति है 
1  albrecht durer           2 फ्रांसिस्को गोया  
3     रेंब्रंट।                 4 तुलक लोत्रेक
उत् 1 डुरेर ने उपरोक्त दोनों कृतियां वुड कट माध्यम में बनाइ है
65. ब्रायर को निम्नलिखित में से किस रूप में जाना जाता है 
1 लकड़ी का ठप्पा       2 अरबिक गम 
3 रबर रोलर                4 स्कवीजी
उत्तर 3 इसका प्रयोग स्याही लगाने के लिए किया जाता है
66. दृश्य कला में निम्नलिखित में से किस में आकार की परिभाषा मिलती है
1 कंस्ट्रक्टिविज्म       2फॉर्मेलिज्म 
3  इंप्रेशनिज्म           4 एक्सप्रेशनिज्म
उत्तर2 फॉर्मेलिज्म सिद्धांत को क्लाइव ने प्रतिपादित किया जिसमें रूप की दृश्य कला की विस्तृत व्याख्या की गई
67. निम्नलिखित कला आंदोलनों की अवधि के अनुसार उनके सही क्रम का चयन करें 
1 संरचनावाद   2 यथार्थवाद   3 बोरोक।  4 मैनरिज्म
उत्तर 4,3,2,1
68. चीन की कला किसे कहा रूप से संबंधित रही है 
1 हिंदू धर्म बौद्ध धर्म, ताओ वाद
2 हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म,  कंफ्यूशियसी
3 पारसी, धर्म बौद्ध,ताओ वाद
4 बौद्ध धर्म, कंफ्यूशियसी, ताओ वाद
उत्तर 4
69. गांधार कला निम्नलिखित में से किससे संबंधित है 
1 यूनानी रोमन कला।         2 भारती फारसी कला 
3 भारती यूनानी कला      4 मध्य एशियाई कला
उत्तर 3
70. शेरशाह सूरी के मकबरे की भूतल योजना है
1 वर्गाकार  2षटकोण  3अष्टभुज 4 आयताकार
उत्तर 3 सासाराम में स्थिति मकबरा अष्टकोण  का है
71.
उत्तर 4
72.
उत्तर 3
73. कुतुब परिसर के प्रांगण में अवस्थित प्रसिद्ध इंडो इस्लामिक स्मारक हैं 
1 सुल्तान गढ़ी               2 अलाई दरवाजा  
3 अलाई मीनार।            4 कुतुब उल इस्लाम मस्जिद
उत्तर 2,3,4
74. राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली के प्रथम निर्देशक थे
 1 पुपुल जयकर           2डॉक्टर ग्रेस मोर्ले
3  कपिल वात्सायन      4 श्री शिवराम मूर्ति
उत्तर 2
75.  वुडकट प्रोसेस के सही क्रम का चयन करें
1 इंग्रेविंग   2 ड्राइंग    3 इकिंग     4 कास्टिंग
उत्तर 1,2,3 कास्टिंग का प्रयोग मूर्तिकला में किया जाता है
76. कुषाण काल के दौरान पल्लवित पुष्पित बौद्ध स्थल हैं 
1 कंकाली  टीला   2 भरहुत     3 संघोल     4 पेशावर
उत्तर 1,3,4 भरहुत का स्तूप शुंग कालीन है
77. बाह्य विज्ञापन बनाते समय निम्नलिखित में से किन बातों को आवश्यक रूप से ध्यान रखना चाहिए 
2 सुस्पष्ट चित्र         2 विज्ञापन की लोकेशन 
3 पैकेजिंग।            4 वितरण
उत्तर 1,2 वह विज्ञापन के लिए स्थान और उसका स्पष्ट होना अत्यधिक आवश्यक है
78. उड़ीसा के मंदिर स्थापत्य के निम्नलिखित में से किन घटकों को कॉलिंग शैली के रूप में माना जाता है 
1 जगमोहन      2  अमलापुरी    3 खपूरी    4 अनु श्रंग
उत्तर 1,2,3 अनु श्रंग को बाद में जोड़ा गया
79.रिट्विक घटक ने निम्नलिखित में से किसके बारे में संवाद और चर्चा के रूप में एक वृत्तचित्र बनाया
1 चिंतामणि कर       2 सोमनाथ होर
3 रामकिंकर बैज      4 मीरा मुखर्जी
उत्तर 3
80. स्टोरीबोर्ड किससे संबंधित है
1 विषय चित्र।  2 संपादन    3 एनिमेशन   4 प्रलेखन
उत्तर 1,4 स्टोरी बोर्ड का प्रयोग कार्टून मूवी में किया जाता है
81. यंत्र प्रमापी (गोउज) निम्नलिखित में से क्या है 
1 समतल छेनी    
2 लकड़ी के उत्कीर्ण के लिए अर्ध गोलाकार छेनी 
3 पत्थर के उत्कीर्ण के लिए निमीत्त नुकीली छेनी
4 मिट्टी निर्देशी यंत्र
उत्तर2 छापा कला में लकड़ी पर उत्कीर्ण कार्य करते समय इसका प्रयोग करते हैं
82. जसरोटा के राजा बलवंत सिंह की छवि चित्र किसने बनाया
1 निहालचंद   2 मूलाराम     3 मनकू।   4 नैनसुख
उत्तर 4
83. मेजोटिंट और ड्राइप्वाइंट में साझा घटक है 
1 कठोरता    2 मृदुता।    3 समतल     4 शुष्कता
उत्तर 2 दोनों ही माध्यमों में  मृदुता विद्यमान रहती है
84. सामान्य व्यवहार में उनके प्रयोग के अनुसार रंगों के सही क्रम में चयन करें
1  मैजेंटा    2 येलो    3 सियान     4 ब्लैक
उत्तर 3,1,2,4 वर्तमान में प्रिंटर इसी नियम पर कार्य करते हैं
85. सन 1941 में अमेरिकी मूर्तिकार लुईस नेवेल्सन ने निम्नलिखित में से किस में प्रयोग किया था
1 पारंपरिक कला           2 जनजाति कला
3 गतिमान कला।           4 प्रकाश और ध्वनि
उत्तर 3,4  clown tight rope Walker मूर्ति शिल्प में इस प्रकार की विशेषताएं दिखाई देती है
86. रेजिन प्रक्रिया निम्नलिखित में से किस प्रयोजना अर्थ धातु मिश्रण के लिए प्रयुक्त होती है
1 अतिरिक्त मजबूती और कठोरता प्राप्त करने के उद्देश्य
2 रंग अथवा प्रकटन के बदलाव के लिए 
3 क्षरण का प्रतिरोध बढ़ाने के लिए
4 परिवहन को सुलभ बनाने के लिए
उत्तर 1,2,3 
87. चोल कालीन नटराज प्रतिमा के पैरों तले किसे बनाया गया है
1 अपस्मार पुरुष   2 अंधकासुर   3 बाणासुर।   4 शव
उत्तर 1
 88. सेरी ग्राफी शब्द निम्नलिखित में से किस प्रकार की छपाई के लिए प्रयुक्त होता है 
1 लेटरप्रेस  2 ग्रेव्योर प्रिंटिंग 3सिल्कस्क्रीन  4लिथोग्राफी
उत्तर 3
89. सुमेलित करें 
1ऋषभ नाथ -सांड      2 पार्श्वनाथ -सांप 
3 महावीर - सिंह          4 नेमिनाथ - शंख
उत्तर  उपरोक्त का मिलान सही है
90. आरोहक अवरोहक निम्नलिखित में से किससे संबंधित है 
1 अभिन्यास निर्माण    2 छपाई प्रक्रिया 
3 फोटोग्राफी               4 मुद्रण कला
उत्तर 4














Experiences In My life

जो गिर के संभलता है, उसके ज्ञान को शिशु ज्ञान कहते हैं।
लेकिन जो गिर-गिर के संभले, उसे इंसान कहते हैं//1

जिंदगी एक मौसम की तरह होती है।
कभी पतझड़ तो कभी बाहर  लाती है ।
कभी हम लोगों को रुलाती है, तो कभी हंसाती है 
लेकिन जो इस जिंदगी से लड़ जाए, 
जिंदगी उसकी सेवक बन जाती है। //2

जो अच्छा सोंचे उसके विचार को सुविचार कहते हैं ।               जो अच्छा व्यवहार करे उसके गुण को सदाचार कहते हैं।//3         
जो महकाए इस चमन को ,उसे  गुलबहार कहते हैं । 
और जो सजाए इस संसार को,  उसे श्रृंगारकार कहते हैं//4

जो पिता थे बुद्ध के उन्हें शुद्धोधन कहते हैं ।
जो मन को मोह ले उसे मनमोहन कहते हैं ।
जो थे सम्राट संगीत के उन्हें तानसेन कहते हैं।
 और जो इनके बारे में पढ़ ले उसे विद्वान कहते हैं।//5

सोमवार, 16 दिसंबर 2019

शब्द और चित्र संवाद के माध्यम

     शब्द और चित्र दोनों अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम है दोनों के द्वारा हम अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं दोनों ही प्राचीन काल से संप्रेषण के प्रमुख स्वरूप रहे हैं पर शब्द और चित्र दोनों की अपनी-अपनी सीमाएं और संभावनाएं हैं दोनों का कार्य एक जैसा है पर दोनों एक जैसे दिखते हुए भी बहुत अलग अलग नजर आते हैं
     शब्दों के मेल को या धाराप्रवाह को भाषा का नाम देते हैं  प्रत्येक भाषा शब्दों  के योग का ही परिणाम होती है यहीं पर शाब्दिक संचार का स्वरूप या संप्रेषण की सीमाएं दम तोड़ने लगती हैं भाषा किसी क्षेत्र तक ही स्वीकार होती है बल्कि उससे जाने जानने वालों तक ही को जोड़ती है उदाहरण के लिए हिंदी भाषा के जानने वाले लोग अगर अन्य भाषा को नहीं जानते तो दूसरी भाषा का साहित्यक संवाद अथवा व्याख्यान जितना भी सशक्त हो वह उनके लिए स्वीकार्य नहीं होगा अर्थात उनकी समझ के बाहर की बात होगी भाषा की भिन्नता भले ही संचार में बाधक बनती है पर भाषाओं का सहयोग भी एक दूसरे के लिए वरदान सिद्ध होता है उन्हें नए शब्दों का उपहार प्रदान करती हैं
     शब्द की अपनी शक्ति होती है जो किसी अन्य माध्यम में नहीं पाई जाती शब्द ध्वनि के माध्यम से हमारे तक पहुंचते हैं जहां पर हमारी कर्ण इंद्रियों का कार्य महत्वपूर्ण हो जाता है जब शब्द ध्वनि का रूप धारण कर मुख से निकलती है तो वह सभी के लिए ग्रह्य होता है बस शर्त इतनी है कि वह सभी के कानों तक पहुंच सके
    चित्र और शब्द में यहीं पर एक आधारभूत अंतर दिखाई पड़ता है चित्र शांत होकर संवाद करता है जबकि शब्द में ध्वनि रहती वह अपने आसपास के सभी व्यक्तियों को समान रूप से प्रभावित करती है जबकि चित्र उन्हीं व्यक्तियों को प्रभावित करता है जो उसे देखते हैं
    चित्र भाव की भाषा है जो सभी के लिए ग्रह्य होती है चाहे वह किसी आयु वर्ग का व्यक्ति क्यों ना हो भाषा की सभी सीमाएं यहां पर समाप्त हो जाती हैं धार्मिक प्रचारकों ने संवाद के इस सहज माध्यम को प्रमुखता के साथ प्रयोग किया है बौद्ध धर्मावलंबियों ने अपने साथ चित्रों को ले जाते थे जिसमें महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का संकलन किया जाता था जिसे देखकर सामान्य जन उसमें निहित संदेश को ग्रहण कर लेते थे इस प्रकार तत्कालीन प्रचारकों ने भाषा की जटिलता को सरलीकरण की तरफ ले गए और एक मिले-जुले संवाद को आगे बढ़ाया
     जब भाषा का विकास नहीं हुआ था तब आदिमानव ने संचार के लिए विभिन्न प्रकार के चित्रों के माध्यम से अपने भावों को व्यक्त करता था जिसके साक्ष्य हमें मेसोपोटामिया मिस्र आदि समकालीन सभ्यताओं से प्राप्त होते हैं चित्र संवाद का एक सशक्त माध्यम रहा है समय के साथ कई परिवर्तन भी अयें है पर आधुनिक समय में एक बार फिर चित्रों के माध्यम से शाब्दिक जटिलता को सरल करने का प्रयास किया जा रहा है बालकों की पुस्तकों में छोटे छोटे शब्दों के साथ चित्रों का प्रचुरता के साथ प्रयोग किया जाता है जो संवाद करने के कौशल को अधिक प्रखर बनाते हैं
     चित्र और शब्द दोनों ही संवाद के प्राचीन माध्यम रहे हैं दोनों ने मानव को अपने विचारों के संप्रेषण में सहायता प्रदान की है दोनों की अपनी सीमाएं हैं प्राचीन समय से लेकर अब तक हमारे लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं भविष्य में भी संवाद के सशक्त माध्यम बने रहेंगे।
      
      
   
   

सोमवार, 9 दिसंबर 2019

तुम मिले तो हम बस सोचते ही रहे

तुम मिले तो हम बस सोचते ही रहे
लफ्ज़ कुछ कह ना सके हम देखते ही रहे
शायद प्रेम की है यही परिभाषा
नजरों ही नजरों में बात करते रहे....1

प्यार तो ही था अधूरे मिलन में सनम
तुम मिले तो ये पूरा हुआ हुआ
खुद में ही देखते हैं तुमको सनम
तुम मिले तो जिंदगी का सफर पूरा हुआ....2

देखते ही चले हम तेरे रास्ते
जिंदगी का सफर कट जाए तेरे वास्ते 
अब न टूटेंगे प्यार के रास्ते
मिलकर चलेंगे इस सफर में मंजिल के वास्ते....3

दिलों का मेल है कितना अनूठा सनम
देखते ही रहे हम कह गई दूरियां सब
खोजने से जो न मिला अब तक मुझे 
तेरे आने की आहट ने सब दे दिया ओ सनम....4

मिलते मिलते हमें एहसास हो गया 
हम हैं तेरे लिए तुम हो मेरे लिए
देखते ही देखते यूं लगा प्यार हो गया
हम हैं एक दूजे के लिए.....5

तुम मिले तो हम बस सोचते ही रहे
लफ्ज़ कुछ कह ना सके हम देखते ही रहे.....


शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

वर्तमान कला की दशा एवं दिशा (ललित कला विभाग कानपुर विश्वविद्यालय के कैम्प के संदर्भ में )

               आयोजन शब्द कितना सार्थक सन्दर्भ प्रस्तुत करता है जो अपने साथ नई अभिलाषा आशा और उमंग लेकर आता है उमंग ही मानव जीवन को गतिशील और विकास के पथ पर आगे बढ़ाती है तथा आने वाले समय में उसके सम्मुख आने वाली चुनौतियों को सरल करने में प्रेरणा का भी कार्य करती है पर हमें इसके दूसरे पक्ष को भी ध्यान रखना आवश्यक है जो केवल आवश्यक ही नहीं अपितु विकास के लिए महत्वपूर्ण भी है किसी समारोह की सफलता उसके उद्देश्यों में निहित होती है आयोजन के समाप्त होने के बाद एक शैल्य चिकित्सक की भांति उसमें से अच्छे बिंदुओं को गिनना बहुत आवश्यक है पर जो चीजें स्वयं निर्धारित प्रारूप के अनुसार नहीं हो पाई या कुछ कमी रह गई है उन कारणों पर गौर करके भविष्य में सुधार करने का प्रयत्न करें जिससे आप रोग मुक्त हो पाएंगे
               इस पृष्ठभूमि भूमि के पश्चात मैं विषय की ओर लौटता हूं कानपुर विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग और राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश की ओर से एक कलाकार कैंप और सेमिनार का आयोजन 14 से 20 नवम्बर के मध्य किया गया जिसमें देश-विदेश के कई जाने-माने कलाकारों ने भाग लिया इस कार्यशाला में देश के कुछ उभरते हुए कलाकारों ने भी अपने कला कौशल के द्वारा अपने मनोभावों को मूर्त रूप प्रदान किया
                इस प्रकार के आयोजन निश्चित रूप से विषय के लिए महत्वपूर्ण होते हैं साथ ही यह बात भी गौर करने वाली है यह आयोजन  महेज किसी विषय पर विद्वानों के विचारों तक नहीं सीमित रहते वरन इनका एक छिपा हुआ पहलू भी है जिस के महत्व को हम कमतर करके नहीं आंक सकते हैं प्रतिभाग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति अलग-अलग परिवेश के होते हैं उनकी आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक धार्मिक और भौगोलिक परिस्थितियां भिन्न भिन्न होती हैं जब इन सभी व्यक्तियों का मेल होता है तो वह महेज दो व्यक्तियों का मेल नहीं होता उनके साथ उनका समाज देश तथा उनके आसपास का वातावरण मिलता है जो सभी व्यक्तियों के लिए प्रेरक हो सकता है यह एक प्रकार का सांस्कृतिक आदान-प्रदान है इसका प्रभाव खासतौर पर विद्यार्थियों पर सबसे अधिक पड़ता है सफल लोगों के अनुभवों एवं जीवन संघर्षों से काफी प्रेरणा ग्रहण करते हैं इसके साथ ही ऐसे आयोजन छात्रों की अंतर्मुखी प्रतिभा को काफी हद तक प्रगट स्वरूप प्रदान करने का अवसर प्रदान करते हैं जो उनके विकास में महत्वपूर्ण कारक सिद्ध होगा यह सब बिना प्रमाण के नहीं कह रहा हूं अगर आप इसका अनुभव करना चाहते हैं तो दृश्य कला विभाग कानपुर विश्वविद्यालय में जाकर विभाग की प्रथम दृष्टया निरीक्षण से ही पहचान लेंगे इसके पश्चात छात्रों से बातचीत कर आपकी सारी जिज्ञासा शांत हो जाएगी उनका सृजन  दैहिक भाषा आत्म विश्वास सोचने विचारने की शक्ति आदि पर पड़े प्रभाव को स्वयं अनुभव कर पाएंगे मैंने भी जो देखा और वार्ता से समझ सका उसी के आधार पर लिख रहा हूं
               प्रत्येक कलाकृति अपने में महत्वपूर्ण होती है इतना जरूर है सभी कलाकृति श्रेष्ठ नहीं हो सकती क्योंकि श्रेष्ठता का अंतिम पैमाना तो स्वीकार एकता पर निर्भर करता है कला तो भाव की भाषा है भाव चाहे जो हो उसकी सफलता असफलता उसकी स्वीकार्यता पर निर्भर करती है यह बात पूर्ण रूप से चित्रकला पर भी लागू होती है प्रदर्शनी में कलाकारों ने कैनवास पर अंतर्मन को विस्तार प्रदान किया है कहीं पर प्रतीकों का प्रभुत्व है तो कहीं पर प्रतीक और स्थूल रूप दोनों ने समान जगह पाई है कहीं पर खाली स्पेस में कलाकार स्वतंत्र होकर विचरण कर रहा है कहीं पर विषाद है तो कहीं उल्लास
                प्रत्येक कलाकार की अपनी कार्य पद्धति है जो उसको समूह से अलग करती है यह विशेषता सारे कलाकारों के काम में दिखाई देती है सारे कलाकारों से मेरा आशय कैंप में भाग लेने वाले वरिष्ठ और कनिष्ठ कलाकारों से है अक्सर जूनियर कलाकार इस अवस्था में फैशन के शिकार होकर अनुकरण की तरफ अपना रुख कर लेते हैं हालांकि धीरे-धीरे यह प्रवृत्ति कम होती जाती है यहां पर मुझे देखकर काफी अच्छा लगा अनुकरण की प्रवृत्ति ना होकर अपने अंतःकरण की पुकार सुनी गई है तथा सामाजिक स्वरूपों पर अपनी प्रतिक्रिया निजी दृष्टिकोण से की गई है जो कैंप के उद्देश्यों को हासिल करने में और अधिक बल देती है
               इस आयोजन को कलाकार के दृष्टिकोण से ना देख कर एक सामान्य दर्शक के दृष्टिकोण से देखना और विचार करना आवश्यक है क्योंकि वही हमारी कला की उपयोगिता को निर्धारित करता है हम उसकी रुचि की अवहेलना नहीं कर सकते हैं जब कोई दर्शक प्रदर्शनी में प्रवेश करता है तो अक्सर वह कैंप में मौजूद किसी भी कलाकार से मिलता है उसका यही उत्तर होता है यह मेरी कृति है यह मेरी कृति है  इस प्रकार के उत्तरों से वह पक सा जाता है यह स्थिति और भी खतरनाक तब हो जाती है जब वरिष्ठ कलाकार भी ऐसा करते पाए जाते हैं अब प्रश्न यह उठता है कि कलाकार का व्यक्तिगत कार्य ही श्रेष्ठ है बाकी की पेंटिंग उनके लिए प्रभावहीन है क्या इनके उत्तर खासतौर पर श्रेष्ठ कलाकारों को ही देना होगा ऐसा नहीं है पर विषय को अच्छे भविष्य की ओर ले जाने की जिम्मेदारी आपकी सबसे ज्यादा है आप तो आने वाले कलाकारों के लिए कहीं ना कहीं प्रेरणा का स्रोत भी बनते जा रहे हैं जो आगे चलकर आपके ही कार्यों से प्रेरित होकर कार्य करेंगे
                दूसरी सबसे बड़ी कमी अक्सर कलाकारों द्वारा कई ऐसे कैंपों में खासतौर पर सीनियर कलाकार कम समय होने की दुहाई देकर जल्दबाजी में कार्य करके चले जाते हैं हो सकता है उनके सामने समय की मजबूरी भी हो पर अधिकांश कलाकारों के सम्मुख अगर एक जैसी समस्या है तो आयोजक कमेटी ने कलाकारों के चुनाव में अवश्य इस विषय पर गहन विचार-विमर्श नहीं किया होगा वरिष्ट कलाकारों का कैंप में कार्य करने की अपेक्षा विद्यार्थियों और युवा कलाकारों से संवाद स्थापित करना मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगता है ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इस आधुनिक दौर में हम किसी न किसी माध्यम से उनकी कृतियों तक पहुंच ही जाते हैं पर उनका सृजन पक्ष पर व्यवहारिक दृष्टिकोण और रचनात्मक प्रक्रिया के उतार-चढ़ाव को साझा करना ऐसे कैंपों को और अधिक सार्थक बना सकता है इसका मतलब यह नहीं है कि वर्तमान पद्धति से लाभ नहीं हो सकता है पर इसको और अधिक प्रभावशाली कैसे बनाया जाए सवाल तो यह था
             कार्यक्रम के अंतिम 2 दिनों में सेमिनार का आयोजन किया गया सेमिनार में उपस्थित कई विद्वानों ने अपने अपने वक्तव्य दिए जिन्हें सुनकर कला की समझ बढ़ी पर दिल्ली से आए वरिष्ठ कला विद्वान के उठाए प्रश्नों ने हम सब को सोचने पर विवश अवश्य कर दिया है उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कला के टूटे हुए सूत्रों को जोड़ने का कार्य वर्तमान पीढ़ी को ही करना होगा शोध छात्रों शिक्षकों तथा स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य करने वाले लेखकों एवं कला समीक्षकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा यहां पर सवाल यह उठता है जब कला जगत से जुड़ी संस्थाएं एवं विश्वविद्यालयों के ललित कला विभाग में लगातार लेखन कार्य होता रहा है पर समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है उसका समाधान नहीं मिल पा रहा है आखिर क्या कारण है जो समस्या के समाधान खोज पाने में असफल रहे हैं निश्चित तौर पर इन पर विचार होना चाहिए मेरा कार्य किसी की आलोचना करना नहीं वरन जो यथार्थ में दिखाई पड़ता है उसे व्यक्त करना है अगर कोई विद्वान किसी समस्या को सबके सम्मुख सार्वजनिक रूप से रखता है तो निश्चित रूप से उसके अध्ययन और समझ की प्रशंसा होनी चाहिए तथा जो उसके विषय के प्रति समर्पण के साथ साथ वर्तमान लेखन में आ रही विषमता को भी दर्शाती हैं यह समस्या अगर लगातार काम करने के बाद उसके अनुभव और अध्ययन के बाद उसके प्रकाश में आई है तो निश्चित रूप से अति महत्वपूर्ण होगी इसका समाधान निश्चित तौर पर कला जगत से जुड़े हुए हर व्यक्ति को खोजने का प्रयास करना चाहिए पर यहां मैं इतना अवश्य कहना चाहूंगा वरिष्ठ अध्यापकों व समीक्षकों की जिम्मेदारी ज्यादा होगी क्योंकि इन्हीं लोगों के सानिध्य पर आने वाली पीढ़ियों की दशा दिशा निर्भर करेगी उनकी कला के प्रति समझ कैसे होगी यह भी वर्तमान शिक्षा पद्धति और लेखन पर निर्भर करेगा अगर सभी लोग अपना योगदान ईमानदारी पूर्वक विद्यार्थियों को सिखाने में देंगे तो समस्या का समाधान किया जा सकता है पर हम जब आज के परिप्रेक्ष्य में इन समस्याओं को देखते हैं तो इनका समाधान दूर-दूर तक नजर नहीं आता देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों द्वारा ललित कला में पीएचडी की उपाधि दी जाती है पर सोचनीय स्थिति यह है कि इनका विषय के प्रति नवीन दृष्टिकोण होने के बजाय पूर्णावृत्ति अधिक है इसके पीछे केवल छात्र स्तर पर लापरवाही नहीं है अपितु निर्देशक और विश्वविद्यालय तथा यूजीसी के स्तर पर भी खामियां हैं
                कला जगत से जुड़े संस्थान भी खोज परख लेखों की ओर विशेष रुचि नहीं ले रहे हैं उन्हें भी बस अपना कोरम पूरा करने भर तक स्वयं को सीमित कर रखा है तो ऐसी परिस्थितियों में कला की अनवरत धारा की छोटी-छोटी टूटी हुई धाराओं के बारे में कौन बात करें इन्हें प्रकाश में कौन लाए जो लोग कार्य भी करना चाहते हैं उनके सम्मुख आर्थिक संकट है और उन्हें यह संस्थाएं कोई विशेष आर्थिक सहायता प्रदान नहीं करती है संस्थाओं द्वारा अपवाद मात्र ही ऐसा कार्य किया गया है जो आज के समय में छात्र अध्यापक कला समीक्षक तथा कला जगत से जुड़ी संस्थाओं को अपनी कार्य पद्धति में बदलाव के साथ-साथ नवीन दृष्टिकोण अपनाना होगा केवल कलाकृतियों का निर्माण करना उनका प्रदर्शन करने तक सीमित रखने से बात नहीं बनेगी विषय का क्रमबद्ध और तटस्थ एवं सारी विधाओं पर उचित लेखन कार्य किया जा सके जिससे आने वाली पीढ़ियों को उचित मार्गदर्शन तथा समय के साथ आने वाली चुनौतियों के लिए उनको तैयार किया जा सके
                 कैंप और सेमिनार के समापन में विद्वानों ने कई महत्वपूर्ण पक्षों पर अपना अपना वक्तव्य रखा है यहां पर मैं राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के संबोधन का उल्लेख करना चाहूंगा जिन्होंने बताया कि क्षेत्रीय प्रदर्शनों के माध्यम से कला जगत के उन अध्यापकों को जोड़ा गया है जो अब तक अपनी कृतियों के प्रदर्शन से स्वयं को दूर रखते थे निश्चित तौर पर यह कदम प्रशंसनीय है जो आने वाले वक्त में अपना प्रभाव भी डालेगा अभी तक राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश से लगभग में इंटर कॉलेज के अध्यापक कटे ही रहते थे इस प्रयास से उनके अंदर का कलाकार फिर से जागृत हो उठेगा जो कला जगत के साथ-साथ उसके अध्अयापन को भी और अधिक प्रभावशाली बनाएगा ऐसा मेरा मानना है
               ललित कला विभाग कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किए गए कैंप और सेमिनार ने निश्चित रूप से वर्तमान कला की दशा और दिशा को दर्शाया है और आने वाली चुनौतियों को भी उजागर किया है सबसे महत्वपूर्ण घटना यह भी है कि लंबे समय के बाद विश्वविद्यालय तथा राज्य ललित कला अकादमी के संयुक्त प्रयास से एक सफल कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसकी सार्वजनिक स्तर पर प्रशंसा होनी चाहिए यहां पर मैं बस इतना कहना चाहूंगा किसी भी आयोजन या संस्था की कमियों को जानना ही महत्वपूर्ण नहीं बल्कि समय रहते उनको सुधारा जाना भी आवश्यक है यह दृष्टिकोण जिस संस्था में होगा वह निश्चित तौर पर भविष्य में प्रगति करेगी पर कमियों के साथ-साथ आयोजनों की अच्छाइयों पर भी बात होनी चाहिए अच्छे कार्यों के लिए उनकी सराहना के साथ-साथ प्रोत्साहन भी आवश्यक है क्योंकि प्रोत्साहन वह प्रेरणा है जो उसे भविष्य में और अधिक परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है अतः मुझे लगता है इन दोनों संस्थाओं के प्रधान और आयोजन समिति के सभी  सदस्यों का सम्मान होना चाहिए तथा संस्था जिस व्यक्ति के विशेष योगदान को देखती हो या पूरी कमेटी को सामूहिक रूप से प्रोत्साहित करना चाहिए
           अंत में मैं विश्वविद्यालय तथा राज्य ललित कला अकादमी के संयुक्त रूप से सफल आयोजन के लिए धन्यवाद करना चाहूंगा और यह आशा करता हूं आगे भी ऐसे आयोजन कानपुर विश्वविद्यालय के साथ-साथ प्रदेश के सारे विश्वविद्यालय में होंगे जो कला जगत के प्रति सामान्य लोगों की समझ को बदलेगी जिससे कला और दर्शक के बीच बढ़ती दूरी कम हो सकेगी ऐसा मुझे लगता है पर प्रयास के पीछे ईमानदारी का दृष्टिकोण होना आवश्यक है

मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

संस्थापन कला instalation art

   

संस्थापन कला

संस्थापन कला अभिव्यक्ति की एक नई विधा है जो कलाकार को अपने कार्य को करने की और अधिक स्वतंत्रता प्रदान करती है इसमें कलाकृति और दर्शक दोनों का पृथक अस्तित्व ना होकर एक पूर्ण कृति का दोनों को मिलाकर निर्माण होता है इसके विपरीत चित्र और मूर्तियों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व होता है जबकि संस्थापन कला  दर्शक के आने पर अपनी सक्रिय अवस्था में आती है यहां पर यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या संस्थापन कला स्वयं कभी सक्रिय नहीं होती बल्कि निष्क्रिय अवस्था में रहती है लेकिन ऐसा सोचना भी गलत होगा संस्थापन कला और मूर्तिकला तथा चित्रकला में एक आधारभूत अंतर है अंतिम दोनों को दर्शक आलोकित कर सकता है पर उसका वह स्वयं हिस्सा नहीं बन पाता है इससे मेरा आशय कृति का स्वयं को अंग मान लेना है कला दीर्घा में जाकर चित्र मूर्तियों को देखने का आनंद तथा कृतियों में निहित संदर्भों और सौंदर्य का रसपान किया जा सकता है पर  चित्र या मूर्ति में दर्शक को कोई स्थान नहीं मिलता क्योंकि यह दोनों माध्यम दर्शकों के लिए स्थान नहीं छोड़ते इसीलिए मैं कह रहा हूं यह दोनों माध्यम स्वयं में पूर्ण या सक्रिय रहते हैं तथा इन दोनों को छूकर या देखकर ही महसूस किया जा सकता है इनके स्पेस में जाकर इनका अंग बनाना अभी तक संभव नहीं हो पाया है

   संस्थापन कला उपरोक्त दोनों से भिन्न है यह भी कह सकते हैं कि यह विधा सभी कलाओं का संगम स्थल है इस माध्यम  में जो  भी कलाकृति बनती है वह अपने आप में दर्शकों को समाहित करने के लिए स्पेस प्रदान करती है दर्शक जब इस स्थान पर आकर उसे भर जाता है तो वह  पूर्ण हो जाती हैं इसीलिए मैं इस विधा में दर्शक को कलाकृति का अंग मानने का पक्षधर हूं यह मेरे दिमाग की पूरी कल्पना मात्र नहीं है वरन एक दर्शक के स्तर से स्वयं लिया गया अनुभव है कला दीर्घा नई दिल्ली के बाहर सुबोध गुप्ता के द्वारा निर्मित संस्थापन कला का उत्कृष्ट उदाहरण उपलब्ध है आप स्वयं जाकर अनुभव कर सकते हैं तथा वही डी पी राय चौधरी की श्रम पर विजय की मूर्ति शिल्प भी है उसका अवलोकन कर इन दोनों के अन्तर को  और अधिक स्पष्ट तौर  पर आत्मसात कर पाएंगे

    अब मैं संस्थापन कला के इतिहास पर बात करूंगा आज यह विधा हमारे सम्मुख अपने नवीन कलेवर के रूप में उपलब्ध है पर जो हम संस्थापन कला  का आज स्वरूप देख रहे हैं वह हमारी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अवसर पर निर्मित होने वाली विविध प्रकार की आकृतियों का ही विकसित स्वरूप है शादी विवाह के अवसरों पर बनाए जाने वाले मंडप होली के अवसर पर होलिका की स्थापना नवरात्र में दुर्गा की मूर्तियां पंडालों की साज-सज्जा राम नवमी के अवसर रावण के पुतलों का निर्माण  मंचन सांझी कला मुहर्रम पर ताजियों का उत्सव आदि कुछ इसी कला के उदाहरण हैं परंतु तत्कालीन समय में इनका आयोजन सामूहिक भावनाओं को प्रकट करने के लिए किया जाता था परंतु आज संस्थापन कला या इस नवीन विधा के द्वारा व्यक्तिगत भावनाओं एवं  विचारों को प्रकट रूप देने का माध्यम बनी हुई है

       बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दौर में यूरोप में कला का स्वरूप लगातार बदलता जा रहा था और अभिव्यक्ति के नए-नए माध्यम खोजे जा रहे थे इन्हीं माध्यमों के सामंजस्य से एक नवीन कला प्रकाश में आई जो संस्थापन कला या प्रतिष्ठान कला के नाम से जानी गई इस माध्यम में चित्र मूर्ति फोटोग्राफी थिएटर प्रिंट मेकिंग प्रदर्शन आदि सभी कलाओं का मिलाजुला स्वरूप दिखाई पड़ता है जहां पर अभिव्यक्ति की अपार संभावनाएं हैं एवं इसका क्षेत्र भी काफी व्यापक है इस विधा में वैचारिक कला अर्थ कला तथा मिनिमल कला का उचित मेल रहता है इस कला का निर्माण मुख्य रूप से अनुपयोगी पदार्थों से किया जाता है

    चंडीगढ़ में बेल्जियम व्यर्थ एवं अनुपयोगी वस्तुओं से नेक चंद सैनी ने 1990 में राग गार्डन का निर्माण किया जो संस्थापन कलाकार एक महत्वपूर्ण उदाहरण है एम एफ हुसैन ने दिल्ली में थिएटर आदि एब्सर्ड नाम से इंस्टॉलेशन बनाया जो भारत की समकालीन कला में महत्वपूर्ण परिवर्तनों का गवाह है विवान सुंदरम ने 1991 ईस्वी में मेमोरियल नामक संस्थापन में राजनीतिक एवं वैश्वीकरण परिदृश्य को चुना है भारत में अमरनाथ सहगल वेदना सतीश गुजराल गोगी सरोज पाल शमशाद हुसैन रत्नावली कांत राजेंद्र टिंकू एन पुष्पमाला हेमा उपाध्याय शीला गौड़ अर्पणा कौर राजीव सेठी निहाल सा दर्शना बोरा अरुण कुमार आदि संस्थापन कला को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रयासरत रहें इस माध्यम ने अभिव्यक्ति को परंपरागत रूप से निकाल कर एक असीमित संभावनाओं वाली दुनिया में लाकर खड़ा कर दिया है