दीपावली
![]() |
| Child Art (Diwali) |
दीपावली त्यौहार उत्साह उमंग अभिलाषा सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है ऐसी हमारी मान्यता है इस दिन घरों की सफाई करने के साथ ही दीपों से सजाया जाता है यह सारा दृश्य मन को प्रफुल्लित अवश्य करता है दीपावली मनाने के पीछे धर्म और विज्ञान के अपने-अपने तर्क हैं पर मैं यहां पर इनका उल्लेख करना नहीं चाहता यह तो हर व्यक्ति को पता है यहां पर सवाल दीपावली पर्व के महत्व का है हम इसे क्यों मनाते हैं यह हमारे लिए किस प्रकार उत्थान या आशा का उत्सव हो सकता है दीपावली का पर्व हर साल आता है और आएगा भी पर केवल किसी उत्सव को मना लेने से वह पूर्ण फल देगा ऐसी अभिलाषा करना स्वयं को ठगने जैसा है बल्कि मूल सवालों के उत्तर खोज कर उनको अपने जीवन में पूर्ण नहीं तो आंशिक रूप से जगह जरूर दें जिससे प्रकाश का त्यौहार सच्चे मायने में आशा अभिलाषा का उत्सव बन सके
![]() |
| Diwali |
दीपों का उत्सव आज हमसे कई सवाल भी पूछता है मेरा मानना है वह सामने भले ही कुछ ना कहता हो पर अकेले में हम सब पर हंसता जरूर होगा और बोलता होगा मानव भी कितना अजीब है जो मुझ दीपक को जलाकर अपना अंधेरा दूर करना चाहता है वास्तव में मानव अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी की भी बलि चढ़ा सकता है अब आप भला स्वयं कल्पना करें ऐसे माहौल में लक्ष्मी का वास कैसे होगा दिन रात तो प्रकृति के नियम का पालन करते हैं जो चिरकाल से इसी से बंधे हैं और आगे भी बंधे रहेंगे तो फिर किस का अंधेरा दूर किया जाए वह स्वयं से ऐसे सवाल भी करता होगा और इनका जवाब भी खोजता होगा जब उसे जवाब मिलता होगा तो बताने की कोशिश भी की होगी पर किसी के पास समय कहां है जो उसके हजारों सालों के अनुभव का लाभ उठा सके मानव तो उसे जलाकर मस्त हो जाता है पटाखों और ताश के पत्तों का आनंद उठाने में जलता हुआ दी पक अपने प्राण त्यागने से पहले अपने भाव किस के सम्मुख व्यक्त करें
कहते हैं मन की व्यथा कह देने से भार हल्का हो जाता है आज मेरी एक दीप से मुलाकात हो गई वह बड़े गुस्से में था बोला काफी देर से मेरे प्रकाश में बैठकर आप बड़ी बड़ी बातें लिख रहे हैं पर मैं अपनी पीड़ा किससे कहूं वह आगे बोला आप सब की समस्या एक जैसी है सभी आगे बढ़ना चाहते हैं इसे वैसे ही समझो जैसे आप बाजार से मुझे लेकर आए उसके बदले में एक निश्चित मूल्य चुकाया है उसी प्रकार आप अपने स्वयं के सपनों को साकार करने के लिए क्या मूल्य देना चाहते हैं इसका कोई उत्तर हो तो दो मैंने स्वयं को जलाकर आप को रोशन कर दिया और अपना मूल्य चुका दिया अब आपकी बारी थी तो चुप हो
![]() |
| रंगोली दीपावली |
![]() |
| Child Art (Diwali) |




बहुत सही ,तथ्यपूर्ण और समाज में व्याप्त वास्तविक अंधकार को इंगित करता हुआ लेख
जवाब देंहटाएंजबरदस्त
जवाब देंहटाएं