दीपावली

 

दीपावली

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Child Art (Diwali)
                     
                        दीपावली त्यौहार उत्साह उमंग अभिलाषा सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है ऐसी हमारी मान्यता है इस दिन घरों की सफाई करने के साथ ही दीपों से सजाया जाता है यह सारा दृश्य मन को प्रफुल्लित अवश्य करता है दीपावली मनाने के पीछे धर्म और विज्ञान के अपने-अपने तर्क हैं पर मैं यहां पर इनका उल्लेख करना नहीं चाहता यह तो हर व्यक्ति को पता है यहां पर सवाल दीपावली पर्व के महत्व का है हम इसे क्यों मनाते हैं यह हमारे लिए किस प्रकार उत्थान या आशा का उत्सव हो सकता है दीपावली का पर्व हर साल आता है और आएगा भी पर केवल किसी उत्सव को मना लेने से वह पूर्ण फल देगा ऐसी अभिलाषा करना स्वयं को ठगने जैसा है बल्कि मूल सवालों के उत्तर खोज कर उनको अपने जीवन में पूर्ण नहीं तो आंशिक रूप से जगह जरूर दें जिससे प्रकाश का त्यौहार सच्चे मायने में आशा अभिलाषा का उत्सव बन सके
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Diwali
                   अब मैं पुनः मूल सवालों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहूंगा और सम्यक दृष्टिकोण से विचार करते हुए अपनी यथा समझ के अनुसार जवाब खोजूंगा दीपावली के दिन दीप आखिर क्यों प्रज्वलित  करते हैं या अन्य दिनों के दीप जलाने से इस दिन का दीप क्यों भिन्न होता है यह प्रश्न महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ जरूरी भी है इसका उत्तर जानने के लिए धार्मिक विचारों का ज्ञाता होना जरूरी नहीं और ना ही इसके पीछे की कहानी जानने की आवश्यकता है आवश्यकता  बस मूल्यांकन की है बस आप इतना विचार करो अंधेरा किस व्यक्ति को अच्छा लगता है मुझे तो नहीं आपका उत्तर पता नहीं मेरा मानना है अधिकांश लोग भी अंधेरे से स्वयं को दूर रखने का प्रयास करते होंगे जब यही प्रयास बृहत स्तर पर होता है तो दीपावली जैसे उत्सव का जन्म होता है
                      दीपों का उत्सव आज हमसे कई सवाल भी पूछता है मेरा मानना है वह सामने भले ही कुछ ना कहता हो पर अकेले में हम सब पर हंसता जरूर होगा और बोलता होगा मानव भी कितना अजीब है जो मुझ दीपक को जलाकर अपना अंधेरा दूर करना चाहता है वास्तव में मानव अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी की भी बलि चढ़ा सकता है अब आप भला स्वयं कल्पना करें ऐसे माहौल में लक्ष्मी का वास कैसे होगा दिन रात तो प्रकृति के नियम का पालन करते हैं जो चिरकाल से इसी से बंधे हैं और आगे भी बंधे रहेंगे तो फिर किस का अंधेरा दूर किया जाए वह स्वयं से ऐसे सवाल भी करता होगा और इनका जवाब भी खोजता होगा जब उसे जवाब मिलता होगा तो बताने की कोशिश भी की होगी पर किसी के पास समय कहां है जो उसके हजारों सालों के अनुभव का लाभ उठा सके मानव तो उसे जलाकर मस्त हो जाता है पटाखों और ताश के पत्तों का आनंद उठाने में जलता हुआ दी पक अपने प्राण त्यागने से पहले अपने भाव किस के सम्मुख व्यक्त करें
                    कहते हैं मन की व्यथा कह देने से भार हल्का हो जाता है आज मेरी एक दीप से मुलाकात हो गई वह बड़े गुस्से में था बोला काफी देर से मेरे प्रकाश में बैठकर आप बड़ी बड़ी बातें लिख रहे हैं पर मैं अपनी पीड़ा किससे कहूं वह आगे बोला आप सब की समस्या एक जैसी है सभी आगे बढ़ना चाहते हैं इसे वैसे ही समझो जैसे आप बाजार से मुझे लेकर आए उसके बदले में एक निश्चित मूल्य चुकाया है उसी प्रकार आप अपने स्वयं के सपनों को साकार करने के लिए क्या मूल्य देना चाहते हैं इसका कोई उत्तर हो तो दो मैंने स्वयं को जलाकर आप को रोशन कर दिया और अपना मूल्य चुका दिया अब आपकी बारी थी तो चुप हो
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रंगोली दीपावली
                   कुछ देर की शांति के बाद वह स्वर को गम्भीर करते हुए बोला आप सभी अपने अंदर व्याप्त अंधेरे को क्यों नहीं दूर करते जब तक वह आपके अंदर व्याप्त रहेगा तब तक जलाते रहो दीप और करते रहो सौभाग्य की कामना जब तक एक या दो के अंदर नहीं बल्कि जगत के सारे व्यक्तियों के अंदर नैतिकता का दीपक नहीं जलेगा तब तक मानव सभ्यता दिवाली को सच्चे अर्थों में प्राप्त नहीं कर पाएगी जिस समृद्धि और धन की देवी लक्ष्मी और विघ्न हरण श्री गणेश की पूजा करते हुए धन-धान्य और मंगल की कामना करते हैं कुछ समय पश्चात ताश के पत्तों पर उसी धन को लगाते चले जाते हो फिर कोशना शुरू करते हो अपनी किस्मत और उस घड़ी को कहने का आशय यह है प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में व्याप्त अंधेरे को अगर दूर करना है तो ज्ञान का दीपक जलाना  ही होगा अगर पूजा के समय गणेश और लक्ष्मी से कुछ मांगना है तो ज्ञान का प्रसाद मांगना क्यों कि ज्ञान तो स्वयं सत्य का प्रकाश है जिसके प्रकाश में आत्मा प्रकाशित हो जाएगी और वह स्वयं जल उठेगी जिससे सारा अंधेरा दूर हो जाएगा जीवन आशा उमंग अभिलाषा से परिपूर्ण हो जाएगा समाज में शांति आएगी तो लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर धन की वर्षा स्वयं कर देंगी वैसे में जो धन आपको प्राप्त होगा उसकी महत्ता सदैव आपको ज्ञात रहेगी जिसका प्रयोग हमेशा अच्छे कार्यों के लिए करोगे तो वास्तव में रामराज्य स्थापित हो जाएगा नहीं तो मेरा काम है जलना आप चलाते रहोगे मैं जलता रहूंगा कुछ ऐसा कहते हुए वह शांत हो गया
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Child Art (Diwali)
                 वास्तव में मुझे भी लगता है दीप के तर्क में वर्तमान समय की कड़वी सच्चाई है हम सब इस दीपावली से क्या सीखे अपने जीवन को कैसे प्रकाशित करें जिससे संसार में सत्य और नैतिकता का प्रकाश फैले जो आज घोर अंधेरे में कहीं  खो सा गया है मेरा मस्तिष्क भी यही कहता है कि अपनी आत्मा को नैतिकता के प्रकाश की ज्वाला से प्रज्वलित करना ही दीपावली का वास्तविक दीप जलाना है जब आत्मा शुद्ध और निर्मल होगी तो सौभाग्य की देवी आपके लिए अपना द्वार खोल देगी लोकतंत्र में सब स्वतंत्र हैं सभी अपने अंधकार को दूर करने के उपाय खुद ही खोज लेंगे अपने को सही ठहराने के लिए एक नहीं अपने पक्ष में हजारों तर्क खड़े कर देंगे आप सब आगे समझदार हैं मार्ग का चुनाव आपको करना है लेकिन इसका चुनाव करते वक्त यह ध्यान रखना सत्य तर्क का मोहताज नहीं होता बस यही चुनाव दीपावली के महत्व की दिशा और दशा को निर्धारित करेगा


2 टिप्पणियाँ

  1. बहुत सही ,तथ्यपूर्ण और समाज में व्याप्त वास्तविक अंधकार को इंगित करता हुआ लेख

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