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समकालीन भारतीय कलाकार: तैयब मेहता (Tyeb Mehta)

समकालीन भारतीय कलाकार: तैयब मेहता (Tyeb Mehta)

भारतीय कला जगत में भारतीय आधुनिक समकालीन कला में तैयब मेहता का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इन्होंने भारतीय चित्रकला को अपनी शैलीगत एवं विषयगत माध्यम से नए आयाम दिए तथा भारतीय चित्रकला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दी।

Tyeb Mehta Mahishasura Painting
तैयब मेहता  'महिषासुर' (1994) | स्रोत: विकिपीडिया


​1. सामान्य परिचय एवं जन्म (Basic Information & Birth)

  • जन्म तिथि: 26 जुलाई 1925
  • जन्म स्थान: कपड़वंज (खेड़ा जिला), गुजरात
  • मृत्यु: 2 जुलाई 2009 (मुंबई)
  • कला समूह सम्बद्धता: वे बॉम्बे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप (PAG) की विचारधारा से गहराई से जुड़े रहे।

2. कला शिक्षा (Art Education)

  • ​उन्होंने सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई से 1952 में चित्रकला में डिप्लोमा (G. D. Art) प्राप्त किया।
  • ​1959 से 1964 के दौरान वे लंदन रहे, जहाँ उन्होंने यूरोपीय आधुनिक कला (विशेषकर फ्रांसिस बेकन की शैली) का गहराई से अध्ययन किया।
  • ​1968 में उन्हें रॉकफेलर फाउंडेशन फैलोशिप (Rockefeller Fellowship) मिली, जिसके तहत वे अमेरिका (न्यूयॉर्क) गए और वहाँ न्यूनतम कला (Minimalism) व रंग-क्षेत्र चित्रकला (Color Field Painting) से प्रभावित हुए।

3. कला शैली एवं शैलीगत विशेषताएं (Artistic Style & Characteristics)

  • प्रमुख शैली: आधुनिक अति-यथार्थवाद (Modern Surrealism), अभिव्यंजनावाद (Expressionism) और 'कलर-फील्ड' (Color Field) का अनूठा मिश्रण।
  • शैलीगत पहचान (Diagonal Concept): 1969 में उन्होंने अपने कैनवास को एक तिरछी/विकर्ण रेखा (Diagonal Line) से काटना शुरू किया। इसे कला जगत में 'डायगोनल सीरीज़' (Diagonal Series) कहा गया।
  • विशेषताएँ:
    • ​सपाट और विशुद्ध रंगों (Flat Colors) का सशक्त प्रयोग।
    • ​मानव आकृतियों में विभाजन, खिंचाव और शारीरिक संत्रास का चित्रण।
    • ​चित्रों में रंगों का संतुलन और रेखाओं का तीव्र खिंचाव।

​4.  चित्रण के मुख्य विषय (Key Themes)

  • मानवीय पीड़ा और संत्रास: विभाजन (1947) के समय हुए दंगों की हिंसा ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला, जो उनकी आकृतियों के दर्द में दिखता है।
  • अस्तित्ववादी संकट: आधुनिक मानव का अलगाव, निराशा और आंतरिक संघर्ष।
  • पौराणिक विषय: भारतीय पौराणिक कथाओं की आकृतियों (जैसे काली और महिषासुर) को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करना।

 5. प्रमुख चित्र एवं चित्र-श्रृंखला (Major Artworks & Series)

  1. डायगोनल सीरीज़ (Diagonal Series): उनकी सबसे ऐतिहासिक और पहचान बनाने वाली श्रृंखला।
  2. महिषासुर (Mahishasura): पौराणिक कथा पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित कृति।
  3. काली (Kali): विनाश और शक्ति के भाव को दर्शाती पेंटिंग।
  4. गिरता हुआ शरीर (Falling Figure): मानवीय लाचारी और संत्रास को दर्शाती कृति।
  5. रिक्शावाला (Rickshaw Puller): श्रम और सामाजिक पीड़ा पर आधारित चित्र।
  6. बैल (Bull / गिरता हुआ बैल): शक्ति और लाचारी का प्रतीक।
  7. कुदाल (Koodal): यह उनकी बनाई गई एक लघु फिल्म (Short Film) थी, जिसने 1970 में फिल्म फेयर क्रिटिक्स अवार्ड जीता था।

6. प्रमुख सम्मान एवं पुरस्कार (Awards & Honors)

  • 1968: प्रथम अंतर्राष्ट्रीय त्रिनाले (नई दिल्ली) में स्वर्ण पदक (Gold Medal) (चित्र: 'फॉलिंग फिगर' के लिए)।
  • 1970: फिल्म 'कुदाल' के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड
  • 1988: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'कालिदास सम्मान'
  • 2007: भारत सरकार द्वारा देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से सम्मानित।

रेखाएँ और प्रतीक विधान (Lines and Symbolism):

  • सशक्त एवं पैनी रेखाएँ (Sharp Lines): तैयब मेहता के चित्रों में रेखाएँ केवल आकृतियों को सीमाबद्ध नहीं करतीं, बल्कि वे तनाव और संत्रास का सीधा माध्यम बनती हैं। उनकी रेखाओं में एक विशेष प्रकार का खिंचाव, गति और पैनापन देखने को मिलता है।
  • ​प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति (Symbolic Representation): उन्होंने अपने चित्रों में प्रतीकों का गहरा प्रयोग किया है:
    • ​बैल (Bull): शक्ति, लाचारी और उत्पीड़न का प्रतीक।
    • ​गिरती हुई आकृति (Falling Figure): मानवीय पतन, असहायता और अस्तित्ववादी संकट का प्रतीक।
    • ​तिरछी रेखा (Diagonal Line): समाज और मन के भीतर के विभाजन और तनाव का प्रतीक।
    • ​काली और महिषासुर: अच्छाई-बुराई के संघर्ष और आंतरिक शक्ति का आधुनिक प्रतीकात्मक रूप।

प्रामाणिक संदर्भ (Reference):

  • पुस्तक: भारतीय चित्रकला एवं मूर्तिकला का इतिहास (लेखिका: डॉ. रीता प्रताप)
  • अध्याय: समकालीन भारतीय चित्रकार (तैयब मेहता)

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