सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

TGT art practice set 66

1- काले रंग का चितेरा किसे कहा जाता है 
A- कनु देसाई 
B- जोगेन चौधरी 
C- गणेश पाइन 
D- एन एस बेंद्रे 

2- कुन्तो का चितेरा किसे कहा जाता है 
A- सतीश गुजराल 
B- जोगेन चौधरी 
C- जगन मोहन मथोडिया 
D- गोवर्धन लाल जोशी 

3- घोड़ो का चितेरा किसे कहते है 
A- द्धारिका प्रसाद शर्मा 
B- भूरि सिंह शेखावत 
C- परमानन्द चोयल 
D- वीरेन डे 

4- मुगल कालीन किस कलाकार को ग्राम चित्र कार कहा जाता है 
A- अब्दुल समद 
B- मीर शैय्यद अली 
C- बसावन 
D- बीरबल 

5- जरी कलम किसे कहा जाता है 
A- नान्हा 
B- मो हुसैन कश्मीरी 
C- बिशन दास 
D- अकारिजा 

6 - अनवृन्ताओ का चितेरा किसे कहा जाता है 
A- के एच आरा 
B- पीयूष पाण्डेय 
C- एम एफ हुसैन 
D- रविंद्र नाथ 

7- प्रतीकात्मक चित्रण करने वाला चित्रकार कौन था 
A- मो नादिर 
B- मनोहर 
C- उस्ताद मंसूर 
D- अबुल हसन 

8- प्रथम विशेषज्ञ चित्र कार किसे कहा गया है 
A- दशवंत 
B- बसावन 
C- मिस्किन 
D- ये सभी 

9 - मानव की सभ्यता का चित्र कार किसे कहा गया है 
A- राम चंद्र शुक्ल 
B- रामकुमार 
C- ए राम चंदन 
D- एन एस बेंद्रे 

10- किस कलाकार को भाई साहब के नाम से जाना जाता है 
A- मदन लाल नागर 
B- इश्वरी प्रसाद 
C- रवि शंकर रावल 
D- असित कुमार हल्दार

11-नवप्रभाववाद का संस्थापक कौन था?
A-जॉर्ज सोरा
B-पॉल सिग्नक
C-सेजा
D-रेनवार
12-बिन्दुवाद का कलाकार कौन था ?
A-गोगा
B-सोरा
C-रेनवार
D-लौत्रेक 
13-सनफ्लावर किसकी प्रसिद्ध कृति है ?
A-सोरा 
B-मातिस 
C-मोने 
D-वान गोग 
14-वान गॉग का पूरा नाम क्या था?
A-विंसेंट वान गॉग 
B-पॉल वान गॉग 
C-जॉर्ज वान गॉग 
D-अल्ब्रेट वान गॉग 
15 -रंगो का प्रकाशीय मिश्रण संबंधित है?
A-प्रभाववाद से
B-उत्तर प्रभाववाद से 
C-नव प्रभाव से 
D-इनमें से कोई नहीं 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रागैतिहासिक काल की कला

       प्रागैतिहासिक काल के चित्र ग्राम जीवन, भीमबेटका   नोट  पूर्व इतिहास शब्द का पहला प्रयोग डैनियल विल्सन ने 1851 ई0 में किया था जान लुबाक ने अपनी अपनी पुस्तक प्रागैतिहासिक टाइम्स में  सर्वप्रथम पाषाण काल ​​को विभाजित किया भारत में 1963 ईस्वी में पुरापाषाण कालीन औज़ारों की खोज हुई रॉबर्ट ब्रूस फ़ुट पहले व्यक्ति थी       कला की उत्पत्ति कब और कैसे हुई, निश्चित रूप से इस विषय में हमारे पास कोई साक्ष्य नहीं है, फिर भी हम यह कह सकते हैं कि मानव जीवन के साथ ही कलाओं का जन्म हुआ होगा। प्रागैतिहासिक मानव की सभी खोज अचानक से हुई, उदाहरण के लिए आग जलाने की खोज, दो पत्थरों को रगड़ते  हुए हुई। ऐसी ही कला का ज्ञान हुआ। जहां पर हम रहते हैं उन स्थानों पर पैरों एवं क्रिया कलापों के चिन्ह छोड़ते हैं तथा छाया से भी आकृतियां बनती हुई दिखाई पड़ती है,  छाया को देखकर हम उत्सुक हो जाते हैं।   प्रागैतिहासिक काल की कला को तीन भागों में बाँट दिया गया है। 1 पूर्ण पाषाण काल 2 मध्य पाषाण काल 3 उत्तर पाषाण काल   पूर्ण पाषाण काल ...

दीपावली

  दीपावली Child Art (Diwali)                                                दीपावली त्यौहार उत्साह उमंग अभिलाषा सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है ऐसी हमारी मान्यता है इस दिन घरों की सफाई करने के साथ ही दीपों से सजाया जाता है यह सारा दृश्य मन को प्रफुल्लित अवश्य करता है दीपावली मनाने के पीछे धर्म और विज्ञान के अपने-अपने तर्क हैं पर मैं यहां पर इनका उल्लेख करना नहीं चाहता यह तो हर व्यक्ति को पता है यहां पर सवाल दीपावली पर्व के महत्व का है हम इसे क्यों मनाते हैं यह हमारे लिए किस प्रकार उत्थान या आशा का उत्सव हो सकता है दीपावली का पर्व हर साल आता है और आएगा भी पर केवल किसी उत्सव को मना लेने से वह पूर्ण फल देगा ऐसी अभिलाषा करना स्वयं को ठगने जैसा है बल्कि मूल सवालों के उत्तर खोज कर उनको अपने जीवन में पूर्ण नहीं तो आंशिक रूप से जगह जरूर दें जिससे प्रकाश का त्यौहार सच्चे मायने में आशा अभिलाषा का उत्सव बन सके Diwali        ...

पाल चित्र शैली

             पाल शैली Pal Shaili         Pal Shaili  आठवीं सती में प्रारंभ हुई बौद्ध धर्म के अनुसार गोपाल नाम के एक सेनानायक ने 730 ईसवी में एक राजवंश की स्थापना की जो पाल राजवंश के नाम से जाना गया इसके पश्चात इस राजवंश में क्रमशः धर्मपाल देवपाल नारायणपाल महिपाल जैसे महत्वपूर्ण शासक हुए और पाल काल में  कला की भारी उन्नत हुई रामपाल पाल राजवंश का अंतिम शासक था इसको सामंत सेन ने परजित कर इस राज्य पर अधिकार कर लिया         पाल शैली के चित्रों में अजंता शैली की विशेषताएं मिलती हैं या यूं कहें यह जनता शैली की एक विकृति शैली का ही रूप है यहां पर चित्र 22.25 × 2.25 इंच के ताड़पत्र पर बने हैं पोथी में चित्र आयताकार या वर्गाकार अंतराल में अंकित किए गए थे चित्रों का विषय महायान और ब्रजायन बौद्ध ग्रंथों की विषयवस्तु रही है पाल शैली के अधिकांश पोथियां बंगाल बिहार नेपाल आदि केंद्रों पर चित्र की गई ताल पत्रों के मध्य में बने चित्रों का विषय महायान के देवी-देवताओं से संबंधित रहा है जबकि समन्वय पत्रों के दोनो...