सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Tgt Pgt Art question paper

टीजीटी पीजीटी आर्ट के प्रश्न 


1 प्रागैतिहासिक काल के  चित्रों का विषय क्या है? 
A-पशु
B-मानव
C-पक्षी
D-उपरोक्त सभी

2- यूरोपीय प्रागैतिहासिक  काल के चित्रों के प्रमुख केंद्र कहां पर स्थित है?
A यूनान एवं मेसोपोटामिया
B-उत्तरी फ्रांस एवं इंग्लैंड 
C-उत्तरी स्पेन एवं दक्षिणी फ्रांस 
D-इटली व फ्रांस

3-बांसरुी बजाता हुआ ओझा कहां अकिंत है?
A-त्राए फेयर्स 
B-लास्को
C-अल्तमीरा
D- पिंडाल

4-नील नदी का उपहार कहा जाता है?
A-मिश्र को 
B-मेसोपोटामिया को
C-सिन्धुको
D-उपरोक्त कोई नहीं

5-फोन्त द गाम क्या है?
A-दृश्य चित्र
B- गुफाएं
C- मूर्ति 
D-रेखांकन

6-"एक्सप्लोरिंग इंडियाज सीक्रेट आर्ट्स" के लेखक कौन है?
A-आनदं कुमार स्वामी
B-स्टेला क्रमारिश 
C- वी निगम
D-ए एल बासम

7-फोंट एंड फेसेज का सबंधं निम्न में से किस से है?
A-पोर्ट्रेट पेंटिगं
B-ब्रोंज कास्टिग
C-टाइपोग्राफी 
D-सिरामिक ग्लेजिग

8-असबधं शब्द बताइए?
A-रेखा
B-वर्ण
C- अनुपात 
D- मूर्ति 

9- हुमायूं का मकबरा किसने बनवाया था?
A-अकबर 
B-बाबर
C-जहांगीर
D-शाहजहा

 10-भारतीय प्रतीक स्वास्तिक रूप है?
A-सर्यू र
B-कमल
C-अग्नि
D-चक्र

11-जापानी वास चित्रों से कौन प्रभावित कलाकार है?
A-वी एस गायतोंडे
B-अवनींद्रनाथ टैगोर
C- रविद्रं नाथ टैगोर
D- सुनयना देवी

12-चित्रकला में किसका महत्व है?
ए- पोत
B-रंग
C-रेखा 
D- परिप्रेक्ष्य 

13-रूप का वर्गीकरण कितने भागों में हुआ है?
A-8
B-4
C-3
D-2

14- “क्राइज अनहर्ड” (1958) के मूर्तिकार कौन है?
A-पी वी जानकीराम
B-अमरनाथ सहगल 
C-धनराज भगत
D- सोमनाथ होर

15-भीमबेटका की खोज कब हुई?
A-1955
B-1958 
C-1959
D-1971

16-मानवतावाद किसकी कुंजी है?
A-स्वच्छंदवाद
B-यथार्थवर्थवाद
C-उत्तर प्रभाववाद
D-पनु रुत्थानवाद 

17- कला एक अभिव्यक्ति है, यह कथनकिसका है?
A-रविद्रं नाथ टैगोर
B-प्लेटो
C-रस्किन 
D-अरस्तु

18-ज्यामितीय चित्र प्रकृति के रचनाकार कौन थे?
A-एस एच रजा
B-जे स्वामीनाथन 
C-तयैब मेहता
D रजा 


टीजीटी पीजीटी परीक्षा अन्य सेट हल करने के लिए लिंक पर क्लिक करें

हमसे संपर्क करने के लिए kalalekhan@gmail.com ईमेल करें

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रागैतिहासिक काल की कला

       प्रागैतिहासिक काल के चित्र ग्राम जीवन, भीमबेटका   नोट  पूर्व इतिहास शब्द का पहला प्रयोग डैनियल विल्सन ने 1851 ई0 में किया था जान लुबाक ने अपनी अपनी पुस्तक प्रागैतिहासिक टाइम्स में  सर्वप्रथम पाषाण काल ​​को विभाजित किया भारत में 1963 ईस्वी में पुरापाषाण कालीन औज़ारों की खोज हुई रॉबर्ट ब्रूस फ़ुट पहले व्यक्ति थी       कला की उत्पत्ति कब और कैसे हुई, निश्चित रूप से इस विषय में हमारे पास कोई साक्ष्य नहीं है, फिर भी हम यह कह सकते हैं कि मानव जीवन के साथ ही कलाओं का जन्म हुआ होगा। प्रागैतिहासिक मानव की सभी खोज अचानक से हुई, उदाहरण के लिए आग जलाने की खोज, दो पत्थरों को रगड़ते  हुए हुई। ऐसी ही कला का ज्ञान हुआ। जहां पर हम रहते हैं उन स्थानों पर पैरों एवं क्रिया कलापों के चिन्ह छोड़ते हैं तथा छाया से भी आकृतियां बनती हुई दिखाई पड़ती है,  छाया को देखकर हम उत्सुक हो जाते हैं।   प्रागैतिहासिक काल की कला को तीन भागों में बाँट दिया गया है। 1 पूर्ण पाषाण काल 2 मध्य पाषाण काल 3 उत्तर पाषाण काल   पूर्ण पाषाण काल ...

दीपावली

  दीपावली Child Art (Diwali)                                                दीपावली त्यौहार उत्साह उमंग अभिलाषा सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है ऐसी हमारी मान्यता है इस दिन घरों की सफाई करने के साथ ही दीपों से सजाया जाता है यह सारा दृश्य मन को प्रफुल्लित अवश्य करता है दीपावली मनाने के पीछे धर्म और विज्ञान के अपने-अपने तर्क हैं पर मैं यहां पर इनका उल्लेख करना नहीं चाहता यह तो हर व्यक्ति को पता है यहां पर सवाल दीपावली पर्व के महत्व का है हम इसे क्यों मनाते हैं यह हमारे लिए किस प्रकार उत्थान या आशा का उत्सव हो सकता है दीपावली का पर्व हर साल आता है और आएगा भी पर केवल किसी उत्सव को मना लेने से वह पूर्ण फल देगा ऐसी अभिलाषा करना स्वयं को ठगने जैसा है बल्कि मूल सवालों के उत्तर खोज कर उनको अपने जीवन में पूर्ण नहीं तो आंशिक रूप से जगह जरूर दें जिससे प्रकाश का त्यौहार सच्चे मायने में आशा अभिलाषा का उत्सव बन सके Diwali        ...

पाल चित्र शैली

             पाल शैली Pal Shaili         Pal Shaili  आठवीं सती में प्रारंभ हुई बौद्ध धर्म के अनुसार गोपाल नाम के एक सेनानायक ने 730 ईसवी में एक राजवंश की स्थापना की जो पाल राजवंश के नाम से जाना गया इसके पश्चात इस राजवंश में क्रमशः धर्मपाल देवपाल नारायणपाल महिपाल जैसे महत्वपूर्ण शासक हुए और पाल काल में  कला की भारी उन्नत हुई रामपाल पाल राजवंश का अंतिम शासक था इसको सामंत सेन ने परजित कर इस राज्य पर अधिकार कर लिया         पाल शैली के चित्रों में अजंता शैली की विशेषताएं मिलती हैं या यूं कहें यह जनता शैली की एक विकृति शैली का ही रूप है यहां पर चित्र 22.25 × 2.25 इंच के ताड़पत्र पर बने हैं पोथी में चित्र आयताकार या वर्गाकार अंतराल में अंकित किए गए थे चित्रों का विषय महायान और ब्रजायन बौद्ध ग्रंथों की विषयवस्तु रही है पाल शैली के अधिकांश पोथियां बंगाल बिहार नेपाल आदि केंद्रों पर चित्र की गई ताल पत्रों के मध्य में बने चित्रों का विषय महायान के देवी-देवताओं से संबंधित रहा है जबकि समन्वय पत्रों के दोनो...