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भावेश सान्याल 1901-2003

mountainscape by B C सान्याल

   Bhavesh Chandra Sanyal

B C sanyal

  असम में जन्मे भावेश सान्याल ने कोलकाता स्कूल ऑफ आर्ट से कला शिक्षा प्राप्त की तथा लाहौर को अपना सृजन केंद्र बनाया चित्रकार के साथ-साथ वह मूर्तिकार भी थे किंतु चित्रकार के लिए अधिक ख्याति प्राप्त हुई वह गांधी जी से जुड़कर असहयोग आंदोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया तथा 1929 में लाहौर अधिवेशन में लाला लाजपत राय की एक मूर्ति का भी निर्माण किया वह लाहौर के स्कूल ऑफ आर्ट के प्राचार्य भी रहे तथा वहीं पर स्वयं का कला स्टूडियो बनाया जो सान्याल स्टूडियों के नाम से जाना गया

  • जन्म - 22 अप्रैल 1901, धुबरी, असम
  • मृत्यु - 22 अगस्त 2003, दिल्ली
  • शिक्षा- गवर्नमेंट कॉलेज आर्ट ऑफ क्राफ्ट, कोलकाता 
  • प्रसिद्धि - चित्रकार, मूर्तिकार, कला अध्यापक
  • पुरा नाम - भावेश चंद्र सान्याल

    स्वतंत्रता के पश्चात सान्याल जी दिल्ली आकर बस गए उन्होंने दिल्ली के पॉलिटेक्निक स्कूल के अध्यक्ष पद पर कार्य किया कुछ समय के लिए नेपाल के शिक्षा सलाहकार भी रहे राज्य ललित कला अकादमी के सचिव पद पर भी कार्य किया इनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से नवाजा इसके अतिरिक्त अवनी गगन ललित कला अकादमी द्वारा लाईफ टाईम अचीवमेंट एवं  असम सरकार द्वारा संकरदेव आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया

     भावेश सान्याल ने अपने चित्रों में अधिकांश  नारी आकृतियों का अंकन किया है जो निराशा एवं व्यथा के विविध पक्षों को दर्शाती हैं भारत विभाजन की विभीषिका का प्रभाव इनके चित्रों पर स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है इन्होंने चित्रकला जगत के लिए अपने जीवन का सर्वस्व न्यौछावर करते हुए अपने आवास तथा निजी स्टूडियो को गैलरी 26 के नाम से परिवर्तित कर दिया भावेश सान्याल ने अपने चित्रों पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म द डांस ऑफ विंड 1997 में निर्मित की तथा 2000 में भारत सरकार द्वारा इनके ऊपर डाक टिकट जारी किया गया

      बीसी सान्याल ने एक साक्षात्कार में अपने सृजन के विषय में प्रकाश डालते हुए कहा "जब मैं सृजन के लिए बैठता हूं तो पूर्व निश्चित कोई योजना नहीं होती परंतु जैसे ही कार्य करने लगता हूं वैसे ही पहाड़ियों पर्वतों बादलों वृक्षों खेतों और पगडंडियों के आकार जन्म लेने लगते हैं और जल्दी ही तूलिका के तीव्र आग हाथों से वास्तविक दृश्य चित्र फलक पर उभर आते हैं" सान्याल साहब ने उम्र के अंतिम समय में अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया की "मैंने आखिरकार 95 साल की उम्र में तूलिका पकड़ना सीख लिया मैं अब इसे तलवार की तरह इस्तेमाल कर सकता हूं"

            भावेश सान्याल  के  प्रमुख चित्र

  गोल मार्केट के भिखारी, आश्रय हीन लड़की, कोलकाता की एक सड़क, पूर्वाभास, शांति मर्म,  तिब्बत की यात्रा पर आधारित धौलापर्वत श्रंखला, स्नान , संगीतज्ञ,  जाति बहिष्कृत, बाल वधू, नारी और पक्षी, निजामुद्दीन के मेले में, हेड आफ शिवा , mountainscape 

  नोट -

 हेड ऑफ शिवा को नंदलाल और सान्याल दोनों ने बनाया 

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