गुरु अनगढ़ आकार को गढ़कर प्रेम करुणा दया आदि मानवीय गुणों से पूर्ण करता है गुरु जीवन के कुछ हिस्से में ही संपूर्ण जीवन के लिए व्यक्ति को तैयार करता है गुरु ही मात्र वर्तमान में रहते हुए आने वाले भविष्य के लिए हमें तैयार करता है इसीलिए उसे भविष्यदृष्टा भी कहा जाता है दूसरे शब्दों में अगर हम कहें तो गुरु शरीर रूपी कंप्यूटर में गुणों का सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर उसे संचालन के योग्य बनाता है
मानव जीवन मैं केवल दो व्यक्ति ऐसे होते हैं जो अपने से आगे बढ़ता हुआ अपने शिष्य को देखना चाहते हैं पहला माता पिता दूसरा गुरु, गुरु निस्वार्थ होकर बालक के व्यक्तित्व के विकास में लगा रहता है वह भली भांति जानता है कि उसका प्रतिफल केवल उस व्यक्ति तक नहीं सीमित रहेगा जिसको वह शिक्षा प्रदान कर रहा है बल्कि वह तो भविष्य में समृद्ध समाज की नीव रखने वाली पौध को तैयार कर रहा है
जब हम अपने कैरियर के शिखर पर होते हैं तब समाज का प्रत्येक वर्ग आपको जानता और पहचानता है फिर भी जब कभी आप समस्या से स्वयं को घिरा हुआ पाते हैं तो उसका समाधान अनायास ही अतीत में अपने गुरुओं से प्राप्त की गई विद्या के आधार पर खोजने का प्रयास करते हैं जब समाधान मिल जाता है तो आप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने गुरु को याद कर उनका धन्यवाद ज्ञापित करते ही होंगे
आइए हम सब मिलकर आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने गुरुजनों को याद कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करें जो भी कुछ हमने जीवन में मुकाम हासिल किया है उसमें उनका प्रत्यक्ष रूप से योगदान है अतः अपने निर्माता को हमेशा स्मरण करते रहना चाहिए इसके दो लाभ हैं पहला आपके अंदर सदाचार का संचार होता है तथा अपने गुरु की कृपा से निरंकुश होने से भी बच जाते हैं कहा गया है कि व्यक्ति को धन दौलत जमीन जायदाद सारी चीजें मिल सकती हैं पर ज्ञान का मिलना बिना गुरु के असंभव है
दीपावली Child Art (Diwali) दीपावली त्यौहार उत्साह उमंग अभिलाषा सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है ऐसी हमारी मान्यता है इस दिन घरों की सफाई करने के साथ ही दीपों से सजाया जाता है यह सारा दृश्य मन को प्रफुल्लित अवश्य करता है दीपावली मनाने के पीछे धर्म और विज्ञान के अपने-अपने तर्क हैं पर मैं यहां पर इनका उल्लेख करना नहीं चाहता यह तो हर व्यक्ति को पता है यहां पर सवाल दीपावली पर्व के महत्व का है हम इसे क्यों मनाते हैं यह हमारे लिए किस प्रकार उत्थान या आशा का उत्सव हो सकता है दीपावली का पर्व हर साल आता है और आएगा भी पर केवल किसी उत्सव को मना लेने से वह पूर्ण फल देगा ऐसी अभिलाषा करना स्वयं को ठगने जैसा है बल्कि मूल सवालों के उत्तर खोज कर उनको अपने जीवन में पूर्ण नहीं तो आंशिक रूप से जगह जरूर दें जिससे प्रकाश का त्यौहार सच्चे मायने में आशा अभिलाषा का उत्सव बन सके Diwali ...
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