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लम्हें

हमारी क्या खता है कोई हमको तो समझा दे
मैंने तो मांगा था साथ उसका
देना ना देना उसका फैसला होता
अगर कोई फैसले को बदल दे तो
इसमें मेरी क्या खता है
 कोई तो हमको बता दे.....

मुलाकातों का दौर शुरू ही हुआ था 
तुम जाने की बात करते हो 
अभी तो घर बनाया था 
तुम उजाड़ने की बात करते हो

चाहत उसे भी है पर हौसला नहीं है ।
ये उसकी बेबसी नहीं संस्कारों का सिला है                       
वो बिखर कर भी खुद को समेटे हुए हैं                            
उनके यहां दुनिया को दिखाने का सिलसिला नहीं है....

हम तो रंगों के पुजारी थे
शब्दों ने ना जाने कहां से अपना बना लिया
भरना चाहते थे रंगों से उसे
पर ना जाने क्यों जिंदगी ने बेगाना बना दिया ...

जब गिरोगे तो चलना आ ही जाएगा
कब तक हाथ पकड़ कर चलोगे किसी का
जब कोई छोड़ देगा हाथ तुम्हारा
तो दौड़ना आ ही जाएगा..

सपने भी आएंगे वो भी आएंगे
आंख बंद करके तो देख मेरे दोस्त
यह रात भी गुजर जाएगी दिन भी आएगा
उनकी याद भी आ जाएगी मुलाकात भी हो जाएगी....

रात को सुबह का पैगाम दिलाना होगा
रूठे हुए दोस्त को मनाना होगा
जिंदगी को जो भर दे रंगों से ऐसा विश्वास दिलाना होगा
जो लेकर चले सभी को साथ ऐसा माहौल बनाना होगा...

अभी तो मुलाकात हुई थी उनसे
न जाने यादों में कहा खो से गए हैं
बड़ी दूर से चल कर आया हूं मंजिल की चाह में
उसे पाने की चाहत कहीं खो सी गई है..

हंसते हुए को रुलाया नहीं करते
बीच सफर में किसी को आजमाया नहीं करते
जब लगे हो अपने ही घर में सीसे
तो दूसरे के मकानों पर पत्थर चलाया नहीं करते...

हम मिलेंगे किसी मोड़ पर ये वादा रहा
तुम ना चल सको तो बैठी रहना
कहते हैं दुनिया गोल है
घूम कर मिलेंगे ये वादा रहा है...

जिंदा हो तो जीने का एहसास होना चाहिए
फुल हो तो कलियों से भी प्यार होना चाहिए
तुम बारिश हो तो भीगने का ख्याल होना चाहिए
चेहरे पर मुस्कुराहट है तो उसमें प्यार होना चाहिए...

हम भरोसे की बात नहीं करते इसमें मेरी कोई खुदगर्जी नहीं 
हम तुमसे प्यार नहीं करते इसमें कोई बदतमीजी नहीं 
तुम्हारे एक इशारे पर दौड़कर चलने को तत्पर था
मगर तुम्हें ऐतबार नहीं इसमें कोई तुम्हारी अदा तो नहीं

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