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के के हेब्बार 1912 1996

के के हेब्बार 1912 1996(k k Hebbar)

The time has passed for artist to be patronised. They must now have a standing of their own.

   अर्थात्  कलाकारों को संरक्षण देने का समय बीत गया है उन्हें अब स्वयं के बूते खड़ा होना चाहिए

Rickshaw Puller.Oil on Canvas

                                             Rickshaw Puller.Oil on Canvas

        कर्नाटक के केट्टीगेरी  गांव में जन्मे (Kettingeri Krishna Hebbar )हैब्बर ने मुम्बई कला स्कूल तथा पेरिस की कला अकादमी से शिक्षा प्राप्त की तथा मुंबई कला विद्यालय में अध्यापन भी किया है ये  अमृता शेरगिल की चित्रकला से विशेष प्रभावित थे साथ ही यूरोपीय चित्रकार पाल गागिन के शैलीगत तत्वों से भी अत्यधिक प्रभावित हुए इनके आरंभिक चित्र केवल गतिपूर्ण रेखांकन के माध्यम से अंकित किए गए हैं जिसके लिए हुए वह विशेष प्रसिद्ध हुए  किंतु बाद में इन्होंने अमूर्त चित्रों का निर्माण प्रारंभ किया एक भित्ति  चित्रकार के रूप में भी काफी सफल रहे  भित्ति चित्रण में कम से कम रेखाओं का प्रयोग कर अत्यधिक लयात्मक प्रभाव उत्पन किया है जो इनके सृजनात्मक पक्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है 

       के के हेब्बार साहब की शैली में प्रभाववाद और अभिव्यंजनावाद का अनूठा संयोजन दिखाई देता है अपनी सशक्त अभिव्यक्ति शैली के माध्यम से सामाजिक पक्षों जैसे गरीबी भुखमरी परमाणु हथियारों से होने वाले विनाश के विषयों पर अपनी बात प्रमुखता के साथ रखी है जो दर्शक को होने वाले भयवाहा परिणामों के प्रति आगाह करती हुई स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है

  के के हेब्बार सदैव कला को राजनीतिकरण से दूर रखने के पक्ष में थे इसी कारणवस्  वह किसी कलाकार ग्रुप के सदस्य नहीं बने इनका मानना था कलाकार को हमेशा परिश्रम सील होना चाहिए जे जे स्कूल ऑफ आर्ट से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात भी भारतीयता इनके चित्रों में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है केरल का सामान्य जनजीवन को चित्रित किया है

https://historyoffineartdk.blogspot.com/2019/11/1912-1996.html
kala aur kalakar

   इनके पिता गणेश महोत्सव के समय मिट्टी की मूर्तियां बनाया करते थे जिन्हें देखकर इनके मन में कलाकार बनने की इच्छा जागृत हुई जीवन भर उनके चित्रों में लोक कला से संबंधित विषयों को देखा जा सकता है पश्चिमी परंपरा में प्रशिक्षण के बावजूद के के हेब्बार ने अपनी परंपराओं से कभी मुंह नहीं मोड़ा अपने सृजन को और अधिक प्रभावशाली एवं सशक्त बनाने के लिए देश की लगातार यात्राएं करते रहे महाराष्ट्र  की यात्रा पर आधारित एक चित्र संखला के लिए इन्हें मुंबई आर्ट  सोसाइटी ने स्वर्ण पदक प्रदान किया था

                                                                       चित्र

         श्रद्धा, धान कुटते हुए, सुनहरे गुलाब, बाढ़, होली, दिवाली, मयूर, मुर्गे की लड़ाई, विवाह उत्सव, भिखारी तथा नृत्य, ढोलक वादक, birth of poetry,  birth of Bangladesh, lord of the land ,Krishna and the panchajanya, fish haul, devotional dance.

शिक्षा-  J J SCHOOL OF ART

व्यवसाय-     चित्रकार 

पुरस्कार

                पदम श्री 1961, पद्म भूषण 1989, सोवियत लैंंड नेहरू।

नोट - के के हेब्बार 4 वर्ष तक ललित कला अकादमी कर्नाटक के अध्यक्ष पद पर रहे इसके अतिरिक्त तीन बार अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए

Dance

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