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हिम्मत शाह

हिम्मत शाह एक प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार और बहु-विषयक कलाकार थे, जिनका जन्म 1933 में गुजरात के लोथल में हुआ था और निधन 2025 में हुआ। उन्हें भारतीय समकालीन कला के सबसे महत्वपूर्ण कलाकारों में से एक माना जाता है। उनकी कलाकृतियाँ उनके अभिनव प्रयोग और मिट्टी के बर्तनों (टेराकोटा) और कांस्य में मानव सिर जैसी अमूर्त मूर्तियों के लिए जानी जाती हैं। 
कलात्मक यात्रा
प्रारंभिक शिक्षा: उनका जन्म गुजरात के लोथल में हुआ था, जो हड़प्पा सभ्यता का एक महत्वपूर्ण स्थल था। उन्होंने बचपन में मिट्टी के बर्तनों के काम को करीब से देखा, जिसने उनकी कला को गहरा प्रभावित किया।
प्रशिक्षण: उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में ड्राइंग शिक्षक का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने 1956 से 1960 तक बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय में चित्रकला का अध्ययन किया।
ग्रुप 1890: वह 'ग्रुप 1890' के संस्थापक सदस्यों में से एक थे, जिसे 1962 में जे. स्वामीनाथन ने शुरू किया था।
पेरिस: 1967 में, उन्हें फ्रांसीसी सरकार की छात्रवृत्ति पर पेरिस में प्रिंटमेकिंग का अध्ययन करने का अवसर मिला।
दिल्ली: उन्होंने अपने जीवन का एक लंबा समय दिल्ली में बिताया, जहाँ उन्होंने गढ़ी ललित कला आर्टिस्ट स्टूडियो में काम किया। बाद में वे जयपुर चले गए, जहाँ उन्होंने अपना स्टूडियो स्थापित किया। 
प्रमुख विशेषताएँ
मूर्तियाँ: वे अपनी अमूर्त टेराकोटा और कांस्य मूर्तियों के लिए सबसे अधिक जाने जाते हैं, जिनमें मानव सिर की आकृतियाँ शामिल हैं।
विविध माध्यम: एक मूर्तिकार के रूप में अपनी पहचान के अलावा, उन्होंने जले हुए कागज के कोलाज, वास्तुशिल्पीय भित्ति चित्र और चित्र भी बनाए।
आधुनिकतावाद: उन्होंने आधुनिकतावाद और आदिमवाद के साथ प्रयोग किया, और उनकी कृतियाँ अक्सर रूप और बेजान, समय और कालातीतता जैसे विरोधाभासों को दर्शाती हैं।
आत्म-निर्मित उपकरण: वे अपनी कलाकृतियों को तराशने के लिए अक्सर अपने खुद के बनाए हुए उपकरणों का इस्तेमाल करते थे। 
पुरस्कार और सम्मान
कालिदास सम्मान: 2003 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दिया गया।
साहित्य कला परिषद पुरस्कार: 1988 में नई दिल्ली में प्राप्त हुआ।
राष्ट्रीय पुरस्कार: ललित कला अकादमी द्वारा 1956 और 1962 में प्रदान किया गया।
ललित कला अकादमी फेलोशिप: यह सम्मान भी उन्हें मिला। 
प्रदर्शित कार्य
उनके काम का प्रदर्शन दुनिया भर की कई प्रसिद्ध दीर्घाओं में किया गया है, जिसमें राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (दिल्ली), लौवर संग्रहालय (पेरिस) और रॉयल एकेडमी ऑफ आर्ट्स (लंदन) शामिल हैं।
किरण नादर म्यूजियम ऑफ आर्ट में 2016 में उनके काम पर आधारित एक रेट्रोस्पेक्टिव 'हैमर ऑन द स्क्वायर' आयोजित किया गया था। 

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