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Shankho chaudhuri

शांखो चौधरी


shankho chaudhuri


          शांखो चौधरी का जन्म 1916 ईस्वी में बिहार में हुआ था शांखो चौधरी ने शांतिनिकेतन में राम किंकर बैज के सानिध्य में शिक्षा प्राप्त की इंग्लैंड और फ्रांस जाकर मूर्ति कला में विशेष दक्षता प्राप्त की आरंभ से ही मूर्ति कला में इनकी विशेष रूचि थी 1946 में शांखो चौधरी ने मेरठ के अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन अधिवेशन के लिए कार्य किया 1980 में तंजानिया दारेस्लाम विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रुप में कार्य 1984 में केन्द्रीय ललित अकादमी नई दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे एम एस विश्वविद्यालय में एक विशाल मूर्ति कार्यशाला का आरंभ किया वहीं पर 20 वर्ष तक शिक्षक के रूप में कार्य किया 1976 में ललित कला अकादमी की गाढ़ी कार्यशाला के विकाश के लिया भी योगदान दिया शंखों चौधरी पर पेरिस भ्रमण के समय में धनवादी प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है

toilet shankho chaudhuri
toilet shankho chaudhuri
  • जन्म        25 फ़रवरी 1916 बिहार
  • मृत्यु        28 अगस्त 2006 दिल्ली
  • शिक्षा      शांतिनिकेतन
  • व्यवसाय  मूर्तिकार

         शांखो चौधरी ने भारतीय आधुनिक मूर्तिकला को एक निश्चित दिशा दी शांखो चौधरी उस समय के कलाकार हैं जब भारत में दो विचारधाराएं प्रबल हो रही थी पहली जो अपने अतीत की गरिमा को महिमा मंडीत करना पसंद करती थी दूसरी विचारधारा अतीत को छोड़कर आधुनिकता पर अधिक बल देती थी शांखो चौधरी ने इन दोनों के मध्य का मार्ग अपनाया शांखो चौधरी  में आधुनिकता और परंपरा का एक उत्कृष्ट स्वरूप देखा जा सकता है यही कारण है कि इनकी मूर्ति शिल्प में भाव की गहनता के साथ-साथ नवीनता का भी समावेश हो सका है


       शांखो चौधरी ने कभी स्वयं को किसी एक माध्यम या विचार से बांधकर नहीं रखा हमेशा प्रयोगवादी कलाकार बने रहे इसीलिए इनकी मूर्ति शिल्प में हमेशा ओज दिखाई देता रहा जो एक खोजी कलाकार का दर्शन भी हमें करता है माध्यम की संभावनाओं को लेकर हमेशा प्रयोगरत रहे शांखो चौधरी के विषय में कार्ल खंडालावाला ने लिखा है कि वह एक साथ ही प्रयोगधर्मी, परंपरावादी और आधुनिक कलाकार हैं वह हमेशा नए नए प्रयोग करते रहते हैं इसके बाद भी उनकी कला मैं स्पष्ट अभिव्यक्ति आवश्यकता अनुसार हट एवं मुखर व्यंजना है इनमें जीवन का सच्चा अनुभव गहरी दृष्टि और विषय के मर्म को समझने की क्षमता हैं
    
   


मूर्तिशिल्प

Going to market, Meerut Congress, Kashi market, lotus, duck, bird - stainless Steel, मुर्गा 1951, कुलदेवता 1965, औरत 1960,

महत्त्वपूर्ण स्थानों पर बनी मूर्तियां


  • 1957 म्युजिक, मूर्ति ऑल इंडिया रेडियो नई दिल्ली, के लिए बनाई
  • 1964 महात्मा गांधी, रियो डी जेनेरियो  में स्थापित है
  • 1986 महात्मा गांधी कांस्य, कोपेनहेगन में स्थापित
  • टॉयलेट  पत्थर, 67 सेमी, आधुनिक कला दीर्घा नई दिल्ली


पुरस्कार

  • 1956 राष्ट्रीय पुरस्कार ललित कला अकादमी
  • 1971 पद्मश्री 
  • 1979 अमन गगन सम्मान
  • कालिदास सम्मान
  • 2002  आदित्य बिरला कला सम्मान
  • 2004 life time achievement award


नोट 

1946 में पहली एकल प्रदर्शनी लगाई





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