चित्रकार राजा रवि वर्मा
Kalakar Raja Ravi Varma
Kalakar Raja Ravi Varma का परिचय
राजा रवि वर्मा का जन्म ऐसे वातावरण में हुआ जब भारतीय चित्रकला के सम्मुख स्वीकार्यता का संकट खड़ा था राजा रवि वर्मा ने जन सुलभ विषयों अथवा उन विषयों को अपना चित्रण आधार बनाया जो जन सामान्य में युगो युगो से समाएं हुए थे यही कारण था राजा रवि वर्मा के चित्र जनसाधारण के दिलों तक पहुंच सके इसीलिए राजा रवि वर्मा को जनसामान्य का चित्रकार भी कहा जाता है
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| महिला और हंस कृति टिकट पर - राजा रवि वर्मा |
मद्रास के गवर्नर ने 1873 में इनके अनेक चित्रों को खरीदा इसके पश्चात 1880 में पूना में चित्रों की एक प्रदर्शनी 1892 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियाना में एवं शिकागो में चित्रों की प्रदर्शनी हुई उन्होंने मद्रास के गवर्नर का स्वर्ण पदक वियाना कला प्रदर्शनी का योग्यता प्रमाण पत्र गायकवाड स्वर्ण पदक अंग्रेज सरकार ने केसर ए हिंद पदक प्रदान किया किया
आनंद कुमारस्वामी तथा परंपरागत चित्रकला के समर्थक विद्वानों एवं चित्रकारों ने राजा रवि वर्मा के चित्रों को नाटकीय कहकर आलोचना की है किंतु समालोचनात्मक दृष्टिकोण रखने वालों ने राजा रवि वर्मा के चित्रों को इस पत्नोन्मुख काल में यूरोपीय तकनीक के आधार पर उत्कृष्ट चित्रों की रचना अवश्य की है जिन्होंने जनसाधारण में कला की समझ को विकसित किया
राजा रवि वर्मा चित्रण विषय
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| लक्ष्मी - राजा रवि वर्मा |
राजा रवि वर्मा प्रसिद्ध चित्र
पत्र लिखती हुई शकुंतला, वीणा बजाती स्त्री, नल दमयंती, शकुंतला वियोग, श्री राम द्वारा समुद्र का मान भंग ,रावण और जटायु, मराठी नैयर, कुलीन महिलाएं, महिला और दर्पण, हाथ में फल लिए हुए महाराष्ट्र की महिला ,Draupadi in the court, ए वुमन होल्डिंग ए फ्रूट, लेडी इन मुनलाइट, दक्षिण भारत के जिप्सी, मनिनी राधा, हंस और दमयंती
नोट
1. 1891में सेलेंध्री को बांबे आर्ट सोसाइटी मैं पुरस्कार मिला तेल रंग माध्यम की शिक्षा डच चित्रकार थियोडोर जानसन को देख कर प्राप्त की आरंभिक शिक्षा मदुरई के कलाकार अलाग्री नायडू व् तंजौर के चित्रकार रामास्वामी नायडू से ली
2. 1894 ईसवी में बड़ोदरा के दीवान सर माधवराव के परामर्श पर मुंबई के निकट घाटकोपर में एक लिखो लिथोमुद्रण छापाखाना की स्थापना की
3. जया अप्पास्वामी ने ने राजा रवि वर्मा को विक्टोरियन शैली का कलाकार माना है
4. मेनियर विलियम्स ने अभिज्ञानशकुंतलम ग्रंथ के अंग्रेजी अनुवाद के मुख्य पृष्ठ पर शकुंतला की पेंटिंग छापी थी5. राजा रवि वर्मा के चित्रों का सबसे बड़ा संग्रह लक्ष्मी विलास भवन बड़ौदा में है6. 1894 ईस्वी में शकुंतला का जन्म राजा रवि वर्मा की ऑलियोग्राफी प्रेस में मुद्रित प्रथम चित्र था तदुपरांत सरस्वती और महालक्ष्मी चित्र मुद्रित किए गए7. 1901 में जर्मन तकनीशियन Schizer को अपनी लिथोग्राफी प्रेस बेच दी
राजा रवि वर्मा को सम्मान
केसर ए हिंद, गायकवाड स्वर्ण पदक,ऑनर ऑफ़ बंगाल



